विश्व अल्जाइमर दिवस: कितनी खतरनाक है ये बीमारी? जानें- लक्षण और बचाव के उपाय

डॉक्टर ने बताया कि इस भूलने की बीमारी पर नियंत्रण पाने के लिए जरूरी है कि शारीरिक (Physical) रूप से स्वस्थ रहने के साथ ही मानसिक रूप से अपने को स्वस्थ रखें.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 1:13 pm, Mon, 21 September 20

विश्व अल्जाइमर दिवस (Alzheimer  Day) 21 सितंबर को मनाया जाता है. यह बीमारी एक उम्र के बाद लोगों में होने लगती है, जिसमें लोग चीजों को याद नहीं रख पाते हैं. हेल्दी लाइफ स्टाइल और नशे से दूरी जैसी एहतियात बरतकर अल्जाइमर (Alzheimer ) और डिमेंशिया (dementia) से बचा जा सकता है. उम्र बढ़ने के साथ ही तमाम तरह की बीमारीयां हमारे शरीर को निशाना बनाना शुरू कर देती हैं. इन्हीं में से एक प्रमुख बीमारी बुढ़ापे में भूलने की आदतों (अल्जाइमर्स-डिमेंशिया) की है.

ऐसे बुजुर्गों की तादाद बढ़ रही है. इसीलिए इस बीमारी की जद में आने से बचाने के लिए हर साल 21 सितम्बर को विश्व अल्जाइमर्स-डिमेंशिया दिवस मनाया जाता है. इसका उद्देश्य जागरूकता लाना है, ताकि घर-परिवार की शोभा बढ़ाने वाले बुजुर्गों को इस बीमारी से बचाकर उनके जीवन में खुशियां लायी जा सके.

इन उपायों को कर बुजुर्गों को बचाएं डिमेंशिया से

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. आदर्श त्रिपाठी का कहना है कि बुजुर्गों को डिमेंशिया (Dementia) से बचाने के लिए जरूरी है कि परिवार के सभी सदस्य उनके प्रति अपनापन रखें. अकेलापन न महसूस होने दें, समय निकालकर उनसे बातें करें, उनकी बातों को नजरअंदाज न करें बल्कि उनको ध्यान से सुनें. ऐसे कुछ उपाय करें कि उनका मन व्यस्त रहे, उनकी मनपसंद की चीजों का ख्याल रखें. निर्धारित समय पर उनके सोने-जागने, नाश्ता व भोजन की व्यवस्था का ध्यान रखें.

 65 साल के बाद होती है ये बीमारी 

अमूमन 65 साल की उम्र के बाद लोगों में यह बीमारी देखने को मिलती है. वृद्धावस्था (old days) में मस्तिष्क के ऊतकों को नुकसान पहुंचने के कारण ये बीमारी होती है. मस्तिष्क में प्रोटीन की संरचना में गड़बड़ी होने के कारण इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. ये एक मस्तिष्क से जुड़ी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति धीरे-धीरे अपनी याददाश्त खोने लगता है. इस बीमारी में व्यक्ति छोटी से छोटी बात को भी याद नहीं रख पाता है. जब यह बीमारी अत्यधिक बढ़ जाती है तो व्यक्ति को लोगों के चेहरे तक याद नहीं रहते हैं. अभी तक इस बीमारी का कोई सटीक इलाज नहीं मिला है.

घर में बुजुर्गों का खास ध्यान रखें

डॉक्टर ने बताया कि इस भूलने की बीमारी पर नियंत्रण पाने के लिए जरूरी है कि शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के साथ ही मानसिक रूप से अपने को स्वस्थ रखें. नकारात्मक विचारों को मन पर प्रभावी न होने दें और सकारात्मक विचारों से मन को प्रसन्न बनाएं. पसंद का संगीत सुनने, गाना गाने, खाना बनाने, बागवानी करने, खेलकूद आदि जिसमें सबसे अधिक रुचि हो, उसमें मन लगायें तो यह बीमारी नहीं घेर सकती.

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली की तरफ से अभी हाल ही में जारी एक एडवाइजरी में कहा गया है कि वर्ष 2011 की जनगणना (Census) के अनुसार, देश में करीब 16 करोड़ बुजुर्ग (60 साल के ऊपर) हैं. इनमें से 60 से 69 साल के करीब 8. 8 करोड़, 70 से 79 साल के करीब 6. 4 करोड़, दूसरों पर आश्रित 80 साल के करीब 2.8 करोड़ और 18 लाख बुजुर्ग ऐसे हैं, जिनका अपना कोई घर नहीं है या कोई देखभाल करने वाला नहीं है.