चेतना से भरे दिमाग में घर नहीं कर पाता तनाव, ब्‍लड प्रेशर भी रहता है कंट्रोल: स्‍टडी

माइंडफुलनेस (Mindfulness) से हमें तनाव को कम करने में मदद मिलती है और हम खुश रहना सीख जाते हैं. ऐसा करने से हम अपने मन को धीरे-धीरे स्थिर कर पाते हैं और अपने विचारों और भावनाओं में संतुलन बनाकर भावनात्मक रूप से मजबूत होते हैं.
mindfulness to reduce blood pressure, चेतना से भरे दिमाग में घर नहीं कर पाता तनाव, ब्‍लड प्रेशर भी रहता है कंट्रोल: स्‍टडी

हमेशा खुश रहने का सबसे अच्छा तरीका माइंडफुलनेस (Mindfulness) या चेतना से भरा हुआ दिमाग है, जिसे मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद अच्‍छा माना जाता है. यह तनाव को तो कम करता ही है, इसी के साथ-साथ यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है. एक नई रिसर्च में इस बात की संभावना जताई गई है कि चेतना से भरे हुए दिमाग से सांस की तकलीफ के साथ-साथ ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) को भी कम किया जा सकता है. हाई ब्लड प्रेशर में कमी से दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा कम रहता है.

अमेरिकन स्ट्रोक एसोसिएशन और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, 100 मिलियन से ज्यादा अमेरिकी नागरिकों में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है. हाई ब्लड प्रेशर अमेरिका और दुनियाभर में समय से पहले ही बुढ़ापा, बीमारी और मृत्यु दर की एक मुख्य वजह बनता है. इन समस्याओं को दूर करने के लिए वजन घटाने और नमक की कमी जैसे इलाज किए जाते हैं. लेकिन इनके आलावा अपनी जीवन शैली में बदलाव लाकर जैसे- ब्रीदिंग एक्‍सरसाइज और माइंडफुलनेस से भी इन समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है.

क्या है चेतना से भरा हुआ दिमाग

चेतना से भरा हुआ दिमाग या माइंडफुलनेस एक स्वस्थ जीवन शैली तकनीक है. यह ध्यान का एक तरीका है. बस दोनों में यह अंतर है कि ध्यान लगाने के लिए एक तय समय पर अलग-से कोशिश की जाती है तो, वहीं माइंडफुलनेस में हम जहां होते हैं, जो लम्हा हमारे सामने होता है, उसी पर अपना पूरा ध्यान लगाना होता है और उसे पूरी तरह महसूस करके जीना होता है. यानी आप पूरी तरह से वर्तमान के बारे में जागरूक हो जाते हैं.

इसमें आपको सांस लेने में सावधानी बरतनी होती है, जिसमें आपको एक मिनट में पांच से सात लंबी सांसें लेनी होती हैं. इस प्रैक्टिस से हमें तनाव को कम करने में मदद मिलती है और हम खुश रहना सीख जाते हैं. लगातार थोड़ी-थोड़ी प्रैक्टिस से सांसों पर ध्यान केंद्रित करना सीखा जा सकता है. ऐसा करने से हम अपने मन को धीरे-धीरे स्थिर कर पाते हैं और अपने विचारों और भावनाओं में संतुलन बनाकर भावनात्मक रूप से मजबूत होते हैं.

प्रमुख लेखक और न्यूरोएडियोलॉजिस्ट डॉ. सुजान लेबांग का कहना है कि इस एक्सरसाइज से तंत्रिका और पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र उत्तेजित होता है, जो मस्तिष्क में तनाव के रसायनों को कम करके वैस्कुलर रिलैक्सेशन को बढ़ाता है. गहरी सांस के साथ शरीर में पहुंचने वाली ऑक्सीजन खून के जरिए शरीर की कोशिकाओं (Body Cells) को पूरा पोषण देती है.

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