सिर्फ नुकसानदायक ही नहीं, शरीर के लिए फायदेमंद भी होते हैं कुछ फैट

फूड आइटम्स में मिलने वाले फैट (fat), कंस्ट्रक्शन और कैरेक्टरिस्टिक के बेस पर चार टाइप के होते हैं, सैटुरेटेड (Saturated), मोनोसैचुरेटेड (Mono saturated), पॉलीसैचुरेटेड (Polysaturated) और ट्रांस फैट (Trans fat).
different types of fat in food items, सिर्फ नुकसानदायक ही नहीं, शरीर के लिए फायदेमंद भी होते हैं कुछ फैट

हम सब ज्यादातर फैट को नुकसानदायक मानते हैं, लेकिन कुछ फैट ऐसे होते हैं जो हमारे शरीर के लिए ज़रूरी होते हैं. वहीं दूसरी ओर ज्यादातर फैट फ्री प्रोडक्ट्स (Fat free Products) सच में हेल्दी नहीं होते हैं. फ़ूड आइटम्स में मिलने वाले फैट, कंस्ट्रक्शन और कैरेक्टरिस्टिक के बेस पर चार टाइप के होते हैं, सैटुरेटेड, मोनोसैटुरेटेड, पॉलीसैटुरेटेड और ट्रांस फैट. अब इनमें से कौन हेल्दी और कौन अन-हेल्दी आइए जानते हैं.

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Healthy/ Good Fat– दो तरह के फैट को इस केटेगरी में रखते हैं- मोनोसैटुरेटेड और पॉलीसैटुरेटेड फैट.

*Monosaturated Fat – लिमिटेड क्वांटिटी में लेने पर यह दिल के लिए फायदेमंद होते हैं और ब्लड में बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल कम करने में मदद करते हैं. ये जिन फ़ूड आइटम्स में ज्यादा पाए जाते हैं वो हैं, ऑलिव आयल, मूंगफली का तेल, एवोकैडो, ड्राई फ्रूट और सीड.

*Polysaturated Fat – ये भी हार्ट अटैक का खतरा कम करने में मददगार होते हैं, साथ ही ब्लड में बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं. पॉलीसैटुरेटेड से भरे फ़ूड आइटम्स में विटामिन ई भी होता है, जोकि एक अच्छा एंटीऑक्सीडेंट है. सबसे ज्यादा फायदेमंद पॉलीसैटुरेटेड फैट, ओमेगा 3 फैटी एसिड (Omega 3 fatty acid) होता है. ये जिन फ़ूड आइटम्स में ज्यादा मिलते हैं वो हैं, तिल, सूरजमुखी/खरबूजे के बीज, फ्लैक्स सीड, अखरोट, चिलगोजा, सालमन मछली.

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Unhealthy/ Bad Fat– ऐसे फैट जिनको ज्यादा खाना बॉडी के लिए नुकसानदायक होता है, बैड फैट कहलाते हैं. सैचुरेटेड और ट्रांस फैट इस केटेगरी में आते हैं.

* Saturated Fat – यह मेनली उन फ़ूड आइटम्स में मिलता है जो जानवरों से पाए जाते हैं, जैसे कि मीट और फुल फैट डेयरी प्रोडक्ट. ये दिल की बीमारी, टाइप-2 डायबिटीज़ और ब्लड में बैड कोलेस्ट्रॉल का खतरा बढ़ाते हैं, लेकिन लिमिटेड क्वांटिटी में इनको खाना हमारे दिमाग, फेफड़े, लीवर और इम्‍युनिटी सिस्टम के लिए अच्छा होता है.

*Trans Fat – यह ज्यादातर फास्ट/डीप फ्राई फूड, बिस्किट, पेस्ट्री वगैरह में पाया जाता है.

Fat Free – आजकल फैट फ्री प्रोडक्ट्स काफी ट्रेंड में हैं. हेल्थ की तरफ अवेयर लोगों के आराम के लिए ये बनाए जाते हैं. हेल्दी रहने के लिए जो लोग अपने कोलेस्ट्रॉल, फैट, वेट पर कंट्रोल रखना चाहते हैं वो अपनी डाइट में इन्हें शामिल करते हैं. ये मेनली दो तरह के होते हैं:

*Naturally Fat Free –ऐसे फ़ूड आइटम्स जो ओरिजनली ही गुड फैट के सोर्स होते हैं और जिनसे बॉडी  को ज़रूरी न्यूट्रिशन और  फाइबर मिलते हैं, नैचुरली फैट फ्री होते हैं. हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, अंडे का सफेद पार्ट , ओट्स, दाल, मसाले नैचुरल फैट होते हैं.

*Processed- ये प्रोसेसिंग से फैट हटाकर बनाए जाते हैं. ये टेस्टलेस होते हैं, क्योंकि खाने में टेस्ट और कलर फैट से ही होते हैं. इनमें स्टार्च, मैदा, आर्टिफीसियल स्वीटनर, नमक वगैरह का यूज़ टेस्ट और फैट को बैलेंस करने के लिए किया जाता है. जिनकी वजह से खाने में कैलोरी बढ़ सकती है.

*फैट फ्री प्रोडक्ट्स में पर सर्विंग 0.5 ग्राम से कम फैट होना चाहिए.

*लो-फैट खाने में कम से कम 3 ग्राम फैट पर सर्विंग होना चाहिए.

*लाइट फूड में 50% कम फैट होना चाहिए.

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न्यूट्रिशन एक्सपर्ट के मुताबिक खाने में फैट की क्वांटिटी 30% से कम होनी चाहिए. ऐसा नहीं है कि सारे फैट फ्री प्रोडक्ट्स किसी काम के नहीं होते लेकिन उन्हें लिमिटेड क्वांटिटी में ही खाना चाहिए. क्योंकि यह जेब पर भी बहुत भारी पड़ते हैं.

फैट फ्री फूड के यूज़ में सावधानियां 

*लेबल ध्यान से पढ़ें. ताकि उसमें इस्तेमाल फ़ूड आइटम्स का सही रेशियो पता कर सकें.

*अधिकतर लोग इन्हें भूख से ज्यादा खा लेते हैं, यह सोचकर कि ये नुकसान नहीं करते .

*इनकी एक सर्विंग में कितनी कैलोरी होती है हमेशा यह ध्यान रख कर खाना चाहिए.

*प्रोसेस्ड की जगह नैचुरल फैट फ्री का इस्तेमाल करें.

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