Happy Fathers Day 2020: एक बेटे का पिता के नाम Open Letter- ‘आयरन मैन मुस्कुराते नहीं’

Fathers Day 2020: पता है सबसे मुश्किल चीज़ क्या है चट्टान का टूटना, इमारतों का धराशाई होना, पहाड़ों का अपने अस्तित्व को खो देना और जो सबसे ज्यादा तकलीफ देह है वो है अपने पिता का बिखर जाना.
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प्यारे पापा,

फादर्स डे (Happy Fathers Day 2020) पर आपके लिए लिखना वैसे है जैसे खुद की ज़िंदगी लिखना. ये दिन मेरे लिए भी उतना ही अजीज़ है जितना मेरे जैसे न जाने कितने बेटे और बेटियों के लिए होगा. अपनी ज़िंदगी के उस शख्स को कागज़ पर उतारना बेहद मुश्किल है जिसका अस्तित्व ऐसा हो जिसमें हम खो जाते हों. हम खामोश हो जाते हैं और सोचने लगते हैं उस अतीत को जो बेहद हसीन है.

हम जब एक टक सूरज को निहारते हैं तो उससे रश्क करने लगते हैं. अपने पिता को देखते वक्त भी हम सब उसी तरह के एक जादू में बंधने लगते हैं, लगता है जैसे सब कितन प्यारा है. आपको नज़र आने लगता है वो चेहरा जो समय के साथ बदलता रहा है. वक्त के साथ हम बड़े हो रहे होते हैं और आप जैसा एक शख्स जी रहा होता है हमारे सपनों को. वो दिन रात लगा होता है हमारे सपनों को सहेजने के लिए, पीठ पीछे चोरी छुपे देखता है हमारे चेहरे को, हमारे हाव-भाव को, आप भी कुछ वैसा ही करते होंगे.

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हम सब बड़े होते वक्त उस पिता को भूल जाते हैं जो हमारे जन्म पर दिल खोल कर हंसा होगा, मुस्कुराया होगा, सीना चौड़ा करके सबसे कहा होगा के देखों मे बाप बन गया. उसने दुनिया में आकर किरदार बदले, जब बेटा बना तो लाड़ला हुआ, पति बना तो जीवन पूरा हुआ, पर जब बाप बना तो सबकुछ भूल गया. उसकी दुनिया सिमट सी गई उसकी औलाद में. उसके लिए बेटा-बेटी जैसे शब्द कभी मायने नहीं रखते.

पिता की आंखों के आंसू देखे हैं कभी

हमारी हंसी-खुशी की जिम्मेदार मां जरूर है पर उसके पीछे एक साया भी है जो दिखता नहीं, पर होता है. साया इसलिए कहा कि हम लोगों ने कहावतें भी उसके लिए उसी के जैसी गढ़ी हैं. कहते हैं न जिसके सिर पर बाप का साया न हो वो कहीं का नहीं रहता. मुझे भी वैसा ही लगता है, वो नहीं तो कुछ भी नहीं. हममें से न जाने कितनों को पता भी नहीं होता कि उनके पिता की आंखों में कभी आंसू भी आते हैं. कैसा शख्स होता है जो मुस्कुराता कभी नहीं, कभी रोता भी नहीं, हर वक्त किसी न किसी पशोपेश में रहता है. हां पर सामने एक शख्त सा चेहरा दिखाई देता है, मुस्कुराना भी हुआ तो कभी-कभार.

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सबसे मुश्किल है पिता का बिखर जाना

पता है सबसे मुश्किल चीज़ क्या है चट्टान का टूटना, इमारतों का धराशाई होना, पहाड़ों का अपने अस्तित्व को खो देना और जो सबसे ज्यादा तकलीफ देह है वो है अपने पिता का बिखर जाना. पहाड़ जैसा कलेजा किसी के पास होता है तो वो बाप ही तो होता है. आपने कभी बूढ़े होते पिता को देखा है, कभी उनका टूटना, उनका बिखरना और अंदर ही अंदर तड़पना देखा है. नहीं तो आज जीभर कर उस चेहरे को निहार लेना, जिसने उम्र लगा दी तुम्हें संवारने में.

पिता बिल्कुल आयरन मैन जैसे होते हैं

एक किस्सा है जो मुझसे जुड़ा है. पापा से बातें हमेशा बहुत नहीं होतीं पर एक चीज़ है जो मुझे उनसे जोड़े रखती है, वो है उनका चेहरा. आप सबकी तरह मैने भी अपने पिता को बेहद मज़बूत लिबास में देखा है, वो बिल्कुल वैसा ही आयरन मैन वाला लिबास, जिसके बीचो-बीच लगा होता है आर्क रिएक्टर. वही आर्क रिएक्टर जिससे वो अपनी सारी एनर्जी (न्यूक्लियर पावर) पैदा करता है. मुझे लगता है कि ईश्वर ने जब पिता को बनाया तो उसके सीने में एक आर्क रिएक्टर लगा दिया. पिता ही तो है जो सबसे ज्यादा ताकतवर है, जो उस एनर्जी को भी झेल जाता है जिसे झेलना किसी के बस की बात नहीं. मुझे लगता है हर किसी के पिता बिल्कुल आयरन मैन जैसे होते हैं, बिल्कुल मेरे पिता के जैसे, इनकी कहानियां नहीं किस्से होते हैं.

बाप की आंख में आंसू हों तो सैलाब उमड़ आता है

आयरन मैन जब कमजोर होता है तो फिल्म देखते वक्त हमारे सीने में अजीब सी टीस उठने लगती है, शायद ये टीस मुझे भी उस वक्त सबसे ज्यादा उठती है जब मैं अपने आयरन मैन को कमजोर होते हुए देखता हूं. ये सच है आंसू हैं कि रुकते नहीं उस वक्त. कहते हैं बेटे रोते नहीं, पर जब बाप की आंख में आंसू दिख जाए तो सैलाब सा उमड़ आता है.

एक कार्बन कॉपी मेरे घर भी है

कुछ साल पहले की ही बात है, हर बार की तरह इस बार भी घर से लौट रहा था. इन दिनों मेरे पिता 60 पार कर चुके हैं, डायबिटीज और हाईबीपी से परेशान रहते हैं. रिटायर्ड हैं तो आजकल कुछ ऐसा सोचने लगे हैं कि जैसे वो किसी काम के नहीं रहे. शायद मेरे जैसे बेटे-बेटियों के मां-बाप ऐसा ही सोचते होंगे. ईश्वर ने जब एक पिता का चेहरा गढ़ा होगा तो उसकी कई कार्बन कॉपियां निकाली होंगी, ऐसी ही कोई कार्बन कॉपी मेरे घर में भी है.

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ये मेरे पहाड़ का दरकना तो नहीं

अपने पिता के चेहरे पर कुछ सालों में ऐसा बदलाव देख रहा हूं जो देखते नहीं बन रहा. उनका दिन ब दिन कमजोर होते जाना, कभी-कभी जुबान का लड़खड़ा जाना, कुछ कहते-कहते चुप हो जाना. ये सब बातें हैं जो सीने से दिल निकाल कर हलक में ले आती हैं. उस दिन कुछ ऐसा हुआ कि मैने अपना सामान पैक किया और तैयार होकर बैठ गया. ये मैं हमेशा ही करता हूं जाने से पहले मां-बाप से कुछ दिल की बातें करने के लिए कुछ वक्त तलाश करता हूं. ज्यादा से ज्यादा उनके करीब रहना चाहता हूं उस वक्त. बैग उठाया ही था बस मुड़कर देखा तो वो नज़र आया जो कभी नहीं देखा, अपने पापा की आंखों में आंसू. कुछ कहा नहीं उन्हें गले से लगाया और तेज कदमों से घर से दूर जाने की कोशिश करने लगा. गला रुंध सा गया था और बहुत कुछ था जो भारी सा लग रहा था. ट्रेन के ऐसी कोच में चढ़ने के बावजूद माथे से पसीना और आंखों से आंसू रुके ही नहीं. सोचता रहा कि ये मेरे आयरन मैन का बिखरना तो नहीं. मेरे पहाड़ का दरकना तो नहीं, दिल आज भी लिखते-लिखते रूंध सा गया है.

आयरन मैन को अच्छे से निहार लेना

बस एक ख्वाहिश है कि आप सब एक बार फिर अपने आयरन मैन को अच्छे से निहार लेना, देख लेना उस सूरत को जो हर रोज़ बदलने वाली है, उनसे बातें कर लेना बैठकर कुछ देर. सच बताऊं फादर्स डे पर ये कर लिया तो बाकी सब फीका अपने आप लगने लगेगा. आयरन मैन हमेशा नहीं रहते…………………………………………………..फादर्स डे की शुभकामनाएं.

आंखों में आंसू जिनके समाते नहीं
आयरन मैन मुस्कुराते नहीं
दिल की ख्वाहिश बताते नहीं
आयरन मैन मुस्कुराते नहीं

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