Padmini Ekadashi: अधिकमास में पद्मिनी एकादशी का है विशेष महत्व, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

महाभारत में श्रीकृष्ण ने खुद युधिष्ठिर और अर्जुन को इस एकादशी के महत्व के बारे में बताया है. हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पद्मिनी एकादशी कहा जाता है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 6:08 pm, Wed, 23 September 20

अधिकमास 18 सितंबर से लग चुका है जो की 16 अक्टूबर तक रहेगा. अधिकमास के दौरान यानी 27 सितंबर को पद्मिनी एकादशी (Padmini Ekadashi 2020) पड़ रही है. यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है जिसका अधिकास में काफी महत्व है.  दरअसल हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पद्मिनी एकादशी कहा जाता है. इस साल ये तिथि 27 सितंबर को पड़ रही है. आइए जानते हैं क्या है इसका महत्व-

महाभारत में श्रीकृष्ण ने खुद युधिष्ठिर और अर्जुन को इस एकादशी के महत्व के बारे में बताया है. मान्यता है कि 12 महीने में होने वाले एकादशी व्रतों में अगर कोई व्रत आपने नहीं किया है तो इस पद्मिनी एकादशी को करने से सारे व्रतों को पूरा करने जितना फल मिलता है. बताया ये भी गया है कि सच्चे मन से पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से विष्णु लोक की प्राप्ती होती है. अधिक मास या पुरुषोत्तम मास में पड़ने के चलते इस एकादशी को पुरुषोत्तम एकादशी के नाम से भी जाना जाता है.

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पद्मिनी एकादशी पूजा विधि

पद्मिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. इस दिन विष्णु पुराण का पाठ किया जाता है. वहीं सभी प्रहर में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. एकादशी की कथा सुने बगैर ये व्रत पूरा नहीं माना जाता. वहीं मान्यता है कि प्रथम प्रहर में नारियल, दूसरे प्रहर में बेल, तीसरे प्रहर में सीताफल, चौथे प्रहर में नारंगी और सुपारी भगवान को भेंट की जाती है. द्वादशी के दिन व्रत का पारण किया जाता है.

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शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि- 27 सितंबर सुबह 6.12 से 28 सितंबर सुबह 8 बजे तक
पद्मिनी एकादशी पारणा मुहूर्त- 28 सितंबर सुबह 6.12 से सुबह 8.36 तक