कुत्ते-बिल्ली पालने से कम होता है स्टूडेंट्स का स्ट्रेस

कई विश्वविद्यालयों ने 'पेट योर स्ट्रेस अवे' कैंपेन चलाया है, जहां विद्यार्थी आकर कुत्ते और बिल्लियों से बात कर सकते हैं, उनके साथ खेल सकते हैं.

न्यूयॉर्क: आधुनिक समय में स्टूडेंट कॉलेज में स्ट्रेस से गुजर रहे होते हैं, स्टूडेंट्स को कक्षाएं, परीक्षाएं और ऐसी ही कई चीजों का दबाव रहता है. शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक शोध में इस बात का पता लगाया है कि कुत्ते या बिल्ली पालने से स्टूडेंट्स को तनाव से राहत देने वाले शारीरिक लाभों के साथ-साथ उनके मूड में सुधार लाया जा सकता है.
जर्नल एईआरए ओपन में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, कई विश्वविद्यालयों ने ‘पेट योर स्ट्रेस अवे’ कैंपेन चलाया है, जहां विद्यार्थी आकर कुत्ते और बिल्लियों से बात कर सकते हैं, उनके साथ खेल सकते हैं.

वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर पेट्रीसिया पेंड्री ने कहा, “सिर्फ दस मिनट से महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है. हमारे अध्ययन में जिन विद्यार्थियों ने कुत्ते और बिल्लियों संग समय बिताया उनमें कॉर्टिसोल हॉरमोन में उल्लेखनीय कमी पाई गई. यह तनाव पैदा करने वाला एक प्रमुख हॉरमोन है.”

इस अध्ययन में 249 कॉलेज स्टूडेंट्स को शामिल किया गया जिन्हें चार समूहों में बांट दिया गया. इनमें से पहले समूह को कुत्ते और बिल्लियों संग दस मिनट का समय बिताने को दिया गया.

रिसर्च में पाया गया कि जिन स्टूडेंट्स ने जानवरों संग वक्त बिताया, इस मुलाकात के बाद उनके लार में कॉर्टिसोल बहुत कम पाया गया.

पेंड्री का कहना है कि हम बस यह देखना चाहते थे कि इस तरह के कार्यकलाप से तनाव में कमी आती है या नहीं और इससे तनाव में कमी आई. यह काफी रोमांचक है क्योंकि हो सकता है कि स्ट्रेस हॉरमोन में कमी वक्त के साथ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण लाभ पहुंचाए.