जानलेवा हुई दिल्ली की जहरीली हवा, नॉन स्मोकर को हुआ फेफड़ों का कैंसर

सिगरेट में 70 ऐसे केमिकल होते हैं जिससे कैंसर हो सकता है. वही सारे केमिकल दिल्ली की हवा में भी हैं.

नई दिल्ली: दिल्ली की हवा अब और जानलेवा होती जा रही है. इस प्रदूषित वायु में सांस लेने से एक युवती को फेफड़े का कैंसर हो गया है. सर गंगाराम हॉस्पिटल के सेंटर फॉर चेस्ट सर्जरी के प्रमुख डॉक्टर अरविंद कुमार ने एक 28 वर्षीय युवती में कैंसर डायग्नोज किया है.

डॉक्टर अरविंद कुमार का कहना है कि युवती एक मल्टी नेशनल आईटी कंपनी में काम करती है. वह लंबे समय से दिल्ली में रह रही है. पहले वह लंबे दिल्ली के गाजीपुर इलाके में रही और अब पश्चिमी दिल्ली में रह रही है. डॉ अरविंद ने टीवी9 भारतवर्ष को बताया कि उसके परिवार में कोई सिगरेट नहीं पीता है. वह ऐक्टिव नहीं, लेकिन दिल्ली की प्रदूषित हवा से पैसिव स्मोकिंग जरूर करती है. इसी वजह से उसे फेफड़े का कैंसर हो गया है.

सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि युवती में कैंसर का पता चौथी स्टेज पर चला है. इसलिए बच पाना और ज्यादा मुश्किल है. इसमें भी खासी जैसे लक्षण देखने में आते हैं. खासी के नाम पर लोग टीबी का इलाज कराते रहते हैं, लेकिन बीमारी कुछ और होती है.

डॉक्टर के मुताबिक, इस कैंसर की वजह दिल्ली का वायु प्रदूषण है. सिगरेट में 70 ऐसे केमिकल होते हैं जिससे कैंसर हो सकता है. वही सारे केमिकल दिल्ली की हवा में भी हैं.

बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए और भी खतरनाक

डॉ अरविंद कुमार ने बताया कि भले की कैंसर का यह पहला मामला हो, लेकिन वायु प्रदूषण से होने वाली दूसरी बीमारियों जैसे सीओडी, अस्थमा से मौतें रिपोर्ट हो चुकी हैं. हो सकता है कि उन्हें भी कैंसर हो, लेकिन पता न चल पाया हो. उन्होंने यह भी बताया कि चिंता की बात यह है कि 30 साल से कम उम्र की युवती को कैंसर ने अपनी गिरफ्त में लिया है. उन्होंने कहा कि इसी जहरीली वायु में गर्भवती महिलाएं और बच्चे भी सांस लेती हैं. इससे बच्चों के दिमागी विकास पर भी असर पड़ता है.

मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंसेज के एक रिसर्च पेपर के मुताबिक, जो अक्टूबर 2018 में प्रकाशित हुआ, दिल्ली के वायु प्रदूषण में 41 फीसदी हिस्सा गाड़ियों से निकलने वाले धुएं का है जिसमें PM2.5 होता है, 21.5 फीसदी धूल और 18 फीसदी प्रदूषण कण विभिन्न फैक्टरियों की वजह से है.

तो अब समय आ गया है पूरी गंभीरता से दिल्ली के वायु प्रदूषण के बारे में सोचने का, और सिर्फ सोचने का ही नही अब समय है इस प्रदूषण को रोकने का. जिंदा रहने के लिए सांस लेना जरूरी है लेकिन यही सांस कैंसर का कारण बन रही है. प्रदूषित हवा में सांस लेना भी पल पल मरने के समान है. हमारे ब्रेन को अगर एक मिनट भी ऑक्सीजन न मिले तो इसके सेल्स मरना शुरू हो जाते हैं…लेकिन यह अपने आप में आश्चर्य की बात है कि इस युवती को इस हवा में सांस लेने मात्र से कैंसर हो गया. जब हवा ही इतनी जहरीली हो जाए तो कोई इससे कैसे बच पाए. अब समय आ गया है कि हमें गंभीरता से इस मुद्दे पर विचार करना होगा, ताकि हमे आने वाली पीढ़ियों को ये चेतावनी न देनी पड़े कि यहां सांस लेना स्वास्थ के लिए हानिकारक है, इससे आपको कैंसर हो सकता है.

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