मेनस्‍ट्रुअल साइकिल में भी ना लगने दें वर्कआउट पर ब्रेक

कई महिलाओं को Menstruation के समय ज्यादा ब्लीडिंग, असहनीय दर्द, स्ट्रेस, मूड स्विंग्स जैसी कई दिक्कतें होती हैं. इन सभी तकलीफों से निपटने में Exercise बहुत हेल्पफुल होती है.
precautions to be taken while exercising in periods, मेनस्‍ट्रुअल साइकिल में भी ना लगने दें वर्कआउट पर ब्रेक

माहवारी, मासिक धर्म या Periods  महिलाओं में हर महीने होने वाली ब्लीडिंग को कहते हैं. हर महीने होने वाले यह रक्त स्त्राव महिलाओं के लाइफ  को कई तरीके से इफ़ेक्ट करते हैं. कई महिलाओं को इस समय  ज्यादा ब्लीडिंग, असहनीय दर्द, स्ट्रेस, मूड स्विंग्स जैसी कई दिक्कतें होती हैं. इन सभी तकलीफों से निपटने में एक्सरसाइज बहुत हेल्पफुल होती है. 63%  फीमेल एथलीट के अनुसार पीरियड्स के टाइम, एक्सरसाइज करने से दर्द कम होता है.

precautions to be taken while exercising in periods, मेनस्‍ट्रुअल साइकिल में भी ना लगने दें वर्कआउट पर ब्रेक

देखिये फिक्र आपकी सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर हर रात 9 बजे

चूंकि बॉडी  में प्रोजेस्टेरोन व एस्ट्रोजन हॉर्मोन का लेवल कम होने के कारण माहवारी के दौरान शरीर पहले से ही थका हुआ और ऊर्जा विहीन लगता है, ऐसे में एक्सरसाइज करने की हिम्मत जुटाना, एवरेस्ट पर चढ़ने के जैसा लगता है. लेकिन यकीन मानिए अगर बॉडी  साथ दे तो कुछ सावधानियों के साथ की लाइट एक्सरसाइज उन दर्द भरे दिनों में भी शरीर को बहुत आराम देती  है.

पीरियड्स के दौरान की जा सकने वाली एक्सरसाइज

*Walking/Light Cardio– Low Intensity कार्डियो या एरोबिक एक्सरसाइज, टहलना, ट्रेडमिल पर धीमी स्पीड से चलना जैसे हल्के एक्सरसाइज इस दौरान ब्लड फ्लो को सुचारू रूप से बनाए रखने हेल्पफुल होते हैं.

*Yoga– योग व मेडिटेशन की मदद से माहवारी के दर्द, मेंटल एंड फिजिकल स्ट्रेस और मूड स्विंग्स को कंट्रोल किया जा सकता है.

*Stretching and Balancing– बॉडी के निचले हिस्से को आराम देते हुए, अपर पार्ट की स्ट्रेचिंग, बैलैंसिंग वगैरह की मदद से पूरे शरीर को राहत पहुंचायी जा सकती है.

*Strength training– वेट लिफ्टिंग या अधिक स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने वाली महिलाएं इस दौरान वजन कम कर या एक्सरसाइज का समय घटाकर आसानी से उसे जारी रख सकती हैं.

पीरियड्स के दौरान ना की जा सकने वाली एक्सरसाइज

ऐसा कोई पर्टिकुलर व्यायाम या  एक्सरसाइज नहीं होता है जिन्हें माहवारी के दौरान नहीं कर सकते हैं, बस जरूरत है थोड़ा ध्यान देने व उनकी इंटेंसिटी और समय घटाने की.

*Crunches– चूंकि इस दौरान महिलाओं के पेट व पेड़ुओं में दर्द रहता है जोकि crunches करने पर बढ़ सकता है. साथ ही पेट पर दबाव पड़ने से अधिक ब्लीडिंग या लीकेज हो सकता है.

*Squats– कुछ महिलाओं को पीरियड्स के समय कमर, पीठ, पैरों में दर्द रहता है जोकि squats से बढ़ सकता है. इसलिए इनकी जगह पैरों की दूसरी एक्सरसाइज कर सकते हैं.

*Running- ज्यादा स्पीड से लंबे समय तक दौड़ने से पहले से थके हुए शरीर में एनर्जी लॉस होने से कमजोरी महसूस होने के साथ ही Menstrual Cramps बढ़ सकते हैं.

precautions to be taken while exercising in periods, मेनस्‍ट्रुअल साइकिल में भी ना लगने दें वर्कआउट पर ब्रेक

पीरियड्स के दौरान एक्सरसाइज  करने में सावधानियां

*ध्यान रखें इस समय शरीर कमजोर रहता है इसलिए उतना ही करें जितना सहन कर पाएं.

*अधिक वेट उठाना या अधिक ताकत वाले एक्सरसाइज नहीं करने चाहिए.

*एक्सरसाइज करने का समय कम कर देना चाहिए.

*वह सभी एक्सरसाइज जिनसे शरीर के निचले भाग, कमर, पेट पर बल पड़ता है, इस समय नहीं करने चाहिए.

*लीकेज की प्रॉब्लम से बचने के लिए लंबे/बड़े व अच्छी क्वालिटी के पैड/टैंपून/मेंसट्रुअल कप का यूज़ करना चाहिए.

*दर्द, थकान, चक्कर, उल्टी महसूस होने पर तुरंत एक्सरसाइज रोक देनी चाहिए.

*अपने साथ पानी, ग्लूकोज हमेशा रखने चाहिए.

*एक्सरसाइज के बाद नहाकर साफ कपड़े पहनने चाहिए.

*अंडरवियर, पैड/टैंपून एक्सरसाइज के बाद ज़रूर बदलने चाहिए.

*पीरियड्स के समय एक्सरसाइज के साथ डाइटिंग पर ख़ास ध्यान देना चाहिए.बॉडी को एनर्जी देने वाले हेल्दी फ़ूड ही खाना चाहिए.

देखिये परवाह देश की सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर हर रात 10 बजे

 

 

Related Posts