बुढ़ापे में चाहते हैं अच्छी याददाश्त तो रात में लें पूरी नींद

रात में पूरी नींद नहीं लेने से न केवल याददाश्त पर असर पड़ता है बल्कि इससे कई स्वास्थ्य सम्बंंधी अन्य बीमारियों से भी लोग ग्रस्त हो जाते हैं.

नई दिल्ली: उम्र के साथ-साथ याददाश्त कम होने लगती है. ऐसे रात में अच्छी नींद लेने से दिन भर मूड ठीक रहता है और इसकी मदद से बुढ़ापे में याददाश्त को तेज रखा जा सकता है. यह खुलासा एक शोध में हुआ है.

इंटरनेशनल न्यूरोसाइकोलॉजिकल सोसाइटी के जर्नल में इस अध्ययन को प्रकाशित किया गया है, जिसमें यह बात कही गई है कि उचित मात्रा में नींद न लेने से या गहरी नींद न होने से हमारा मूड दिन भर उखड़ा-उखड़ा सा रहता है. इससे आगे चलकर बुढ़ापे में पुरानी किसी घटना को याद रखने की संभावना कम हो जाती है.

इस शोध में कार्य स्मृति और तीन स्वास्थ्य संबंधी कारक जैसे कि नींद, उम्र और डिप्रेस्ड मूड के बीच शोधकर्ताओं ने गहरा संबंध पाया है.

कार्य स्मृति, अल्पकालिक स्मृति का एक हिस्सा है जो संज्ञानात्मक कार्यो जैसे कि सीखने, तर्क करने और समझने के लिए आवश्यक जानकरियों को अस्थायी रूप से संग्रहित कर उन्हें व्यवस्थित रखती है.

हम किसी चीज का विकास किस तरह से करते हैं, उसका उपयोग कैसे करते हैं और सूचनाओं को किस तरीके से याद रखते हैं, इन सभी में कार्य स्मृति एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है.

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रिंसिपल वीवेई झांग ने कहा, “अन्य शोधकर्ताओं की ओर से पहले ही इनमें से हर एक कारक को दिमाग की सम्पूर्ण कार्य प्रणाली से जोड़कर देखा जा चुका है, लेकिन हमारे काम ने इस विषय पर प्रकाश डाला है कि किस तरह से ये सभी कारक, स्मृति की गुणवत्ता और मात्रा से संबंधित है और ऐसा पहली बार किया गया है.”

झांग ने आगे कहा, “ये तीनों कारक एक-दूसरे से परस्पर जुड़े हुए हैं. उदाहरण के तौर पर, युवाओं की तुलना में वृद्ध व्यक्तियों में नेगेटिव मूड को अनुभव करने की संभावना ज्यादा रहती है. नींद की खराब गुणवत्ता भी अक्सर डिप्रेस्ड मूड से संबंधित रहती है.”

इस विषय पर शोधकर्ताओं ने दो अध्ययन किए हैं. पहले में, 110 कॉलेज स्टूडेंट्स से स्वयं उनके द्वारा बताए गए नींद की क्वालिटी और डिप्रेस्ड मूड और कार्य स्मृति के प्रयोगात्मक उपायों से संबंधित, सारी चीजों के नमूने लिए गए.

दूसरे में, 21 से 77 वर्षो के बीच 31 सदस्यों के नमूने लिए गए. इस अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने उम्र और कार्य स्मृति से उनके संबंध की छानबीन की. शोध के इस निष्कर्ष से कार्य स्मृति पर इन तीन कारकों के प्रभाव को कम करने के लिए भविष्य में इससे बचने के उपाय या उपचारों की खोज की जा सकती है.

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