World No Tobacco Day 2020: युवाओं के लिए खास है इस बार की थीम, पढ़ें- क्यों मनाया जाता है ये दिन

इस बार World No Tobacco Day की थीम को यंगस्टर्स को ध्यान में रखकर रखा गया है, क्योंकि आज के युवा बहुत तेजी से तंबाकू से बनी चीजों की तरफ अग्रसर हो रहे हैं. हुक्का, धूर्मपान जैसी चीजें उनके डेली रुटीन में शामिल हो गई हैं.
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किसी भी चीज की लत नुकसानदेह हो सकती है, फिर वो चाहे तंबाकू ही क्यों न हो. आज World No Tobacco Day है. तंबाकू से बनने वाली चीजें जैसे गुटखा और सिगरेट कई लोगों के जीवन में अब यूं समा चुके हैं कि वे काफी कोशिश करने के बाद भी इससे पीछा नहीं छुड़ा पाते. कुछ लोग शौक में पीते हैं तो कुछ लोग अब इसके आदी हो चुके हैं.

लोग जानते हैं कि तंबाकू के कारण कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं उनको जकड़ सकती हैं, लेकिन फिर भी लोग इसके प्रति या तो जागरूक नहीं हैं या फिर जानकर अपनी जिंदगी के साथ खिलवाड़ करते हैं. दुनिया भर में No Tobacco Day इसलिए मनाया जाता है ताकि तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों को इससे होने वाली कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के बारे में जागरूक किया जा सके.

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World No Tobacco Day 2020 Theme

हर बार World No Tobacco Day की थीम अलग होती है. इस बार भी थीम कुछ खास है. इस बार World No Tobacco Day की थीम को यंगस्टर्स को ध्यान में रखकर रखा गया है, क्योंकि आज के युवा बहुत तेजी से तंबाकू से बनी चीजों की तरफ अग्रसर हो रहे हैं. हुक्का, धूम्रपान जैसी चीजें उनके डेली रुटीन में शामिल हो गई हैं. यही वजह है कि इस साल World No Tobacco Day 2020 की थीम ‘युवाओं को उद्योग के हेरफेर से बचाना और उन्हें तंबाकू और निकोटीन के उपयोग से रोकना’ रखी गई है.

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कब हुई इसकी शुरुआत?

साल 1987 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन द्वारा World No Tobacco Day की शुरुआत की गई थी. ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि हर साल दुनियाभर में तंबाकू से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा था. साल 1987 में तंबाकू खाने से होने वाली गंभीर बीमारी को WHO ने एक महामारी माना था. पहली बार World No Tobacco Day 7 अप्रैल, 1988 में मनाया गया था. इसके बाद हर साल 31 मई को World No Tobacco Day मनाया जाने लगा.

तंबाकू से होने वाली बीमारियां

तंबाकू में शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले कई केमिकल होते हैं जैसे टार, मार्श गैस, अमोनिया, कोलोडान, पापरीडिन, फॉस्फोरल प्रोटिक अम्ल, परफैरोल, ऐजालिन सायनोजोन, कोर्बोलिक ऐसिड, बेनजीन. तंबाकू दो प्रकार का होता है. एक वो जिसमें से धुंआ निकलता है, जैसे कि सिगरेट, हुक्का और बीड़ी. दूसरा बिना धुंए वाला होता है, जैसे कि पान मसाला, गुटखा और खैनी आदि.

किसी भी एक के तरह के तंबाकू का लंबे समय तक सेवन करने से कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियां हो सकती है. तंबाकू के कारण कैंसर (फेफड़ों और मुंह का), फेफड़े खराब होना, आंखों से कम दिखना, दिल की बीमारी, मुंह से दुर्गंध आना जैसी गंभीर बीमारियां हो सकता हैं. फेफड़ों के कैंसर के अलावा, तंबाकू धूम्रपान भी क्रोनिक प्रतिरोधी फुफ्फुसीय रोग (COPD) का कारण बनता है. इस बीमारी में फेफड़ों में मवाद से भरे बलगम बनते हैं, जिससे दर्दनाक खांसी होती है और सांस लेने में काफी कठिनाई होती है.

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World No Tobacco Day का महत्व

दुनिया में कई जगह ऐसी हैं जहां पर तंबाकू की खेती की जाती है. हालांकि कई जगहों पर तंबाकू की खेती पर बैन भी है. तंबाकू के पत्तों में एक नशीला पदार्थ होता है, जो कि शरीर को काफी नुकसान पहुंचाता है. तंबाकू का स्वास्थ्य पर बुरा असर न पड़े, इसलिए कई जगहों पर कैंपेन और प्रोग्राम किए जाते हैं. इस दिन का सबसे बड़ा महत्व यही है कि लोगों को तंबाकू से होने वाली गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूक करना और दुनिया को तंबाकू मुक्त करना.

तंबाकू का धुआं बेहद खतरनाक

ग्लोबल टीबी की एक रिपोर्ट कहती है कि भारत में टीबी के अनुमानित मामले दुनिया के टीबी मामलों के लगभग एक चौथाई लगभग 28 लाख दर्ज की गई थी. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी फेफड़े को नुकसान पहुंचाता है और फेफड़ों की कार्यक्षमता को कम करता है और ऐसी स्थिति में यदि कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है तो यह आगे चलकर उसकी स्थिति और खराब हो सकती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू का धुआं इनडोर प्रदूषण का बहुत खतरनाक रूप है, क्योंकि इसमें 7000 से अधिक रसायन होते हैं, जिनमें से 69 कैंसर का कारण बनते हैं. तंबाकू का धुआं पांच घंटे तक हवा में रहता है, जो फेफड़ों के कैंसर, सीओपीडी और फेफड़ों के संक्रमण को कम करता है.

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