निर्मला सीतारमण ने ली मंत्री पद की शपथ, जानें उनका पूरा सफर

1999 में बनी केंद्र में अटल बिहारी बाजपेई की सरकार बनी तब निर्मला का रुख बीजेपी की तरफ हुआ.

नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री पद की शपथ ले रहे हैं. उनकी नई कैबिनेट में कुछ नए-कुछ पुराने चेहरे नजर आने वाले हैं. जो पुराने चेहरे हैं उनमें से एक निर्मला सीतारमण होंगी. पिछली कैबिनेट में ये रक्षामंत्री थीं. निर्मला सीतारमण दोबारा मंत्री पद की शपथ ले रही हैं, उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें:

तमिलनाडु के मदुरै में 18 अगस्त 1959 को सावित्री और नारायणन सीतारमण के घर एक बेटी का जन्म हुआ. नाम रखा गया निर्मला. नारायणन सीतारमण भारतीय रेलवे में नौकरी करते थे, उनका ट्रांसफर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में होता रहता था. इसकी वजह से निर्मला को खूब घूमने का मौका मिला. शुरुआती पढ़ाई के बाद 1976 में शीतललक्ष्मी रामास्वामी कॉलेज, तिरुचिरापल्ली में अर्थशास्त्र की पढ़ाई के लिए एडमिशन लिया. 1978 तक इस कॉलेज में रहने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली आ गईं.

जेएनयू का सफर

जेएनयू में उस वक्त तक छात्र राजनीति के नाम पर सिर्फ स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया का बोलबाला था. ये मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का छात्र संगठन था. प्रकाश करात और सीताराम येचुरी जैसे नेता उस वक्त वहां तैयार हो रहे थे. इसी दौरान जेएनयू में ‘फ्री थिंकर्स’ नाम का एक और छात्र संगठन खड़ा हुआ. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पढ़कर आये छात्र नेता आनंद कुमार की अगुवाई में इसका गठन हुआ. ये संगठन एसएफआई के खिलाफ था, गांधीवादी, समाजवादी था और आरएसएस, बीजेपी के भी खिलाफ था. निर्मला सीतारमण इस संगठन में शामिल हो गईं.

Nirmala Sitharaman, निर्मला सीतारमण ने ली मंत्री पद की शपथ, जानें उनका पूरा सफर

यहीं निर्मला की मुलाकात परकला प्रभाकर से हुई, जिनका परिवार बहुत पहले से राजनीति में था. प्रभाकर की मां विधायक थीं और पिता कम्युनिस्ट नेता रह चुके थे. बाद में कांग्रेस में शामिल हुए और 5 बार आंध्र प्रदेश की सरकार में मंत्री रहे. प्रभाकर जेएनयू में छात्र संगठन एनएसयूआई में शामिल हो गए. निर्मला और प्रभाकर की राजनीति बिल्कुल अलग थी. जेएनयू से पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों ने शादी कर ली.

लंदन प्रवास

शादी के कुछ समय बाद यह जोड़ा लंदन चला गया जहां प्रभाकर को आगे की पढ़ाई करनी थी. वहां निर्मला ने कुछ समय तक सेल्स गर्ल की नौकरी भी की. ज्यादा दिन संघर्ष नहीं करना पड़ा और उन्हें एक रिसर्चर की नौकरी मिल गई. 1991 में वहां से लौटने के बाद निर्मला एक बच्ची की मां बनीं. इसके बाद निर्मला यहां समाज कार्य में लग गईं.

बीजेपी में एंट्री

1999 में बनी केंद्र में अटल बिहारी बाजपेई की सरकार बनी तब निर्मला का रुख बीजेपी की तरफ हुआ. सरकार की तरफ से उन्हें राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य बनाया गया. 2004 में सरकार बदल गई और 2006 में निर्मला का कार्यकाल पूरा हो गया. इसी साल इन्होंने बीजेपी ज्वाइन की. 2010 में बीजेपी की राष्ट्रीय प्रवक्ताओं की टीम बनी, उसमें निर्मला को मौका मिला और दिल्ली बुला गिया गया.

प्रवक्ता के तौर पर बीजेपी के लिए निर्मला सीतारमण ने अच्छा काम किया. 2014 चुनाव के दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी की उम्मीदवारी को लेकर टीवी पर बहसें कीं. इन सबका फायदा मिला, उन्हें सरकार में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय का राज्यमंत्री बनाया गया. कुछ समय बाद उन्हें देश की रक्षामंत्री बना दिया गया.