राहुल का गढ़ भेदने वाली स्मृति ईरानी ने एक बार फिर ली मंत्री पद की शपथ, पढ़ें सियासी सफर की दिलचस्प बातें

साल 2003 में स्मृति ईरानी ने राजनीति में आने का फैसला किया और बीजेपी में शामिल हो गईं.

नरेंद्र मोदी के दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के साथ ही ये पक्का हो गया था कि स्मृति ईरानी भी उनकी कैबिनेट का हिस्सा होंगी. पिछली बार जब वो राहुल गांधी के खिलाफ हार गई थीं तो भी कैबिनेट में थीं. इस बार तो अमेठी के अभेद्य किले को जीत लिया है. इस बार तो मंत्री बनना तय ही था.

23 मार्च 1976 को दिल्ली में शिबानी बागची और अजय कुमार मल्होत्रा के घर पैदा हुई स्मृति ईरानी तीन बहनों में सबसे बड़ी हैं. बचपन की कठिनाइयों का जिक्र करते हुए स्मृति ने इंडिया टुडे के एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी मां को ताने दिए जाते थे. क्योंकि वो तीन बेटियों की मां थीं. वो बचपन में गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं तो परिवार की एक पोंगापंथी महिला ने उन्हें बिना कपड़ों के जमीन पर मरने के लिए छोड़ दिया. मां ने विरोध किया तो कहा कि बेटी है, मर जाएगी तो तुम्हारी जिंदगी आसान हो जाएगी. स्मृति ईरानी कहती हैं कि मां-बाप प्रगतिशील थे, जिनकी वजह से उनका जीवन कुछ आसान हुआ.

मुंबई में संघर्ष

शुरुआती पढ़ाई दिल्ली से करने के बाद मुंबई चली गईं. मन में सपना था कुछ कर दिखाने का. राह आसान नहीं थी. मुंबई के संघर्ष की मिसालें दी जाती हैं. स्मृति ईरानी के हिस्से भी संघर्ष आया, उन्होंने मैकडॉनल्ड में वेट्रेस का काम भी किया. छोटी मोटी ऐड फिल्मों में काम किया और मिस इंडिया के फाइनल तक पहुंचीं. ये साल 1998 था. फिल्मों में भी छोटे मोटे रोल किए. उसके बाद ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ सीरियल आया और स्मृति ईरानी की पहुंच हर घर में हो गई.

 

Smriti Irani, राहुल का गढ़ भेदने वाली स्मृति ईरानी ने एक बार फिर ली मंत्री पद की शपथ, पढ़ें सियासी सफर की दिलचस्प बातें

साल 2003 में स्मृति ईरानी ने राजनीति में आने का फैसला किया और बीजेपी में शामिल हो गईं. 2004 में उन्हें महाराष्ट्र बीजेपी युवा मोर्चा का उपाध्यक्ष पद दिया गया. इसी साल लोकसभा चुनाव हुए तो उन्हें दिल्ली की चांदनी चौक सीट से प्रत्याशी बनाया गया लेकिन कांग्रेस के कपिल सिब्बल के सामने उनकी हार हुई.

स्मृति ईरानी का भविष्य राजनीति में उज्ज्वल था. 2010 में बीजेपी का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया. फिर महिला मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया. 2011 में गुजरात से राज्यसभा में भेज दिया गया. 2014 का लोकसभा चुनाव अपने आप में ग्रैंड था और बीजेपी ने इन्हें राहुल गांधी को चुनौती देने अमेठी भेजा. करीब सवा लाख वोटों से हार गईं लेकिन अमेठी नहीं छोड़ी. शायद यही बात अमेठी को अपील कर गई और दूसरी बार में पूरी ताकत लगाकर स्मृति ईरानी जीत गईं. जीतने के बाद ट्वीट किया- कौन कहता है कि आसमां में सुराख हो नहीं सकता.

उस हार के बाद स्मृति ईरानी को मोदी की कैबिनेट में मानव संसाधन मंत्री का पद मिला था. 2016 में फेरबदल हुआ तो उन्हें कपड़ा मंत्रालय दे दिया गया. अब एक बार फ