EVM पर सवाल उठाने वालों की बात पर इसलिए नहीं करता कोई विश्वास!

एग्जिट पोल्स का रिजल्ट आते ही ईवीएम पर बहस तेज हो गई. हर बार चुनावी रिजल्ट के एक दो दिन पहले और बाद में सवाल उठते हैं.
EVM, EVM पर सवाल उठाने वालों की बात पर इसलिए नहीं करता कोई विश्वास!

आज यानी मंगलवार को 22 विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग से मिलने जा रही हैं. चुनाव आयोग के तमाम फैसलों के अलावा उसमें ईवीएम के सवालों पर भी बात की जाएगी.

यूपी के गाजीपुर में सपा और बसपा गठबंधन प्रत्याशी अफजाल अंसारी ईवीएम बदलने की कोशिश का आरोप लगाते हुए जंगीपुर में स्ट्रॉन्गरूम के बाहर धरने पर बैठ गए. अफजाल अंसारी की पुलिस से भी काफी गरमा गरमी हो गई.

EVM, EVM पर सवाल उठाने वालों की बात पर इसलिए नहीं करता कोई विश्वास!

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी ईवीएम की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं. ट्वीट किया है कि ईवीएम स्विच करने की खबरें लगातार आ रही हैं. चुनाव आयोग की तरफ से कोई सफाई नहीं दी गई है, ये एक तरह से दूसरा बालाकोट करने की तैयारी है.

महबूबा मुफ्ती के तंज के अलावा बिहार से आरजेडी का ट्वीट भी देखने लायक है. उस ट्वीट में लिखा गया है कि महागठबंधन के मजबूत सिपाहियों से अपील है कि फर्जी एग्जिट पोल में ज्यादा न फंसें. बस स्ट्रॉन्गरूम की रखवाली करें.

उधर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट किया कि झांसी, मेरठ, गाजीपुर, चंदौली, सारन, हर जगह मतगणना केंद्रों पर मशीने बदली जा रही हैं. लेकिन चुनाव आयोग और तथाकथित मीडिया मोदी के सामने नतमस्तक, आंखों पर पट्टी बांधे घुटनों के बल बैठा है.

इनके अलावा बहुत सारे वीडियोज़ ट्विटर और व्हाट्सऐप पर सर्कुलेट हो रहे हैं जिनमें कहीं ट्रकों में भरकर ईवीएम ले जाई जा रही है तो कहीं खुले में रखी है. इन वीडियोज़ के सामने आने से पैनिक वाली स्थिति बनी हुई है. इतना सब होने के बावजूद सवाल ये है कि ईवीएम पर सवाल उठाने वाले नेताओं की बात गंभीरता से क्यों नहीं ली जाती?

इसकी कुछ संभावित वजहें हो सकती हैं. जैसे एग्जिट पोल का रिजल्ट आने से पहले ऐसे वीडियोज़ की फ्रीक्वेंसी और ऐसे बयानों के सुर धीमे थे. ईवीएम पर सवाल उठाते हुए भी इन लोगों का मन आगे पीछे हो रहा था. पूरे कॉन्फिडेंस और आक्रामकता से बात नहीं की. एग्जिट पोल्स के नतीजे असली नतीजे साबित हो जाएं तो हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ना है, सारी कवायद इसकी जान पड़ती है.

इस समय की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस का रुख भी ईवीएम पर साफ नहीं है. हां-नहीं वाली स्थिति बनी हुई है. राहुल गांधी ने एकाध इंटरव्यू में ईवीएम को शक की निगाह से देखने की बात स्वीकारी है. लेकिन उसे पूरे कॉन्फिडेंस से नहीं नहीं नकारा. पिछले साल नवंबर-दिसंबर में हुए विधानसभा चुनावों में जो तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनी है, उस पर भी सवाल उठ सकता है.

EVM, EVM पर सवाल उठाने वालों की बात पर इसलिए नहीं करता कोई विश्वास!

जनवरी में ईवीएम हैकिंग का दावा लंदन में एक प्रोग्राम में किया गया, जिसकी लाइव स्ट्रीमिंग की गई. हैकर सैय्यद शुजा ने सिर्फ हवाई बातें की उनके पास किसी बात का सबूत नहीं था. अहम बात ये थी कि उस प्रोग्राम में कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल भी मौजूद थे, इस वजह से उस कार्यक्रम पर पूरी तरह से मिट्टी पड़ गई. इस कार्यक्रम के आयोजकों पर ही सवाल खड़े हो गए.

सवाल ये है कि जब सवाल उठाने वाले ही गंभीर नहीं हैं और उनकी टाइमिंग और तरीका संदिग्ध है तो उनके आरोप कौन गंभीरता से लेगा?

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