‘राजीव गांधी ने INS विराट को टैक्सी बना दिया, मनाई छुट्टियां’: PM मोदी का आरोप

PM नरेंद्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस को बताना पड़ेगा कि सिख दंगों से जुड़ा होने का जिन पर आरोप है, उनको मुख्यमंत्री बनाना कौन सा न्याय है.
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने सरकार की सफलताओं को बताया और विपक्षी दलों पर निशाना साधा.

इस दौरान उन्होंने नामदार परिवार का जिक्र करते हुए राजीव गांधी की INS विराट (युद्धपोत) से यात्रा पर सवाल खड़े किए और देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया.

ये कहीं बड़ी बातें-

  • मिडिल क्लास को अपने घर के लिए अब प्रधानमंत्री आवास योजना से सहायता मिल रही है, उसकी 5-6 लाख रुपए तक की बचत हो रही है. पहले कुछ बेईमान लोगों के कारण जिस लोगों का अपने घर का सपना अधूरा रह जाता था, उन्हें रेरा कानून से राहत मिली है.
  • जब साफ नीयत से काम होता है, ईमानदारी से अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए प्रयास किया जाता है, तो नतीजे भी मिलते है. जो महंगाई देश के हर चुनाव मे सबसे बड़ा मुद्दा होती थी, वो आज कैसे नियंत्रण में है, विपक्ष के लोग चाहकर भी उस पर कुछ बोल नही पा रहे.
  • बीते 5 वर्षों में देश में जो बड़े फैसले लिए गए हैं, उसमें आपने सदैव मेरा साथ दिया है. आज VIP वाली लाल बत्ती अगर नेताओं और अफसरों की गाड़ी से उतरी है तो, इसका कारण आप सभी हैं. आज पूरी सरकार आपके मोबाइल फोन की पहुंच में आ पाई है तो, इसका कारण आप सभी हैं.
  • क्या आपने सुना है कि कोई अपने परिवार के साथ युद्धपोत से छुट्टियां मनाने जाये ? आप इस सवाल से हैरान मत होइए, ये हुआ है और हमारे ही देश में हुआ है. कांग्रेस के नामदार परिवार ने आईएनएस विराट का व्यक्तिगत टैक्सी की तरह इस्तेमाल किया, उसका अपमान किया था. ये बात तब की है जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे और 10 दिन की छुट्टियां मनाने निकले थे.
  • राजीव गांधी के साथ छुट्टी मनाने वालों मे, उनकी ससुराल वाले यानि इटली वाले भी शामिल थे. सवाल ये कि क्या विदेशियों को भारत के वॉरशिप पर ले जाकर तब देश की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं किया गया था? या सिर्फ इसलिए क्योंकि वो राजीव गांधी की ससुराल के लोग थे.
  • बुलेट प्रूफ दीवारों में रहना न मेरा शौक है और न ही मेरी आदत है. जब-जब मौका मिला है मैंने इस दीवार को साइड रखने की कोशिश भी की है.
    अक्सर दिल्ली मेट्रो में सफर करते हुए जब लोगों से घिर जाता हूं, तो वो मेरे लिए बहुत यादगार पल होते हैं.
  • प्रदूषण दिल्ली की एक बड़ी चुनौती है. इसका हल तकनीक के बेहतर इस्तेमाल और ट्रांसपोर्ट के आधुनिक तौर-तरीकों में है. राजधानी में मेट्रो का विस्तार हो, सोलर सेक्टर से जुड़ी नीतियां हों या नेक्स्ट जेनरेशन इंफ्रास्टक्चर का काम, इसका बड़ा लाभ दिल्ली के भी लोगों को मिलने वाला है.
  • मोबाइल का बिल पहले की अपेक्षा बहुत सस्ता हुआ है. हमने मिडिल क्लास का सम्मान करते हुए 5 लाख रुपये तक की टैक्सेबल इनकम को टैक्स के दायरे से बाहर कर दिया है.
  • कांग्रेस आजकल अचानक न्याय की बात करने लगी है. कांग्रेस को बताना पड़ेगा, कि 1984 के सिख दंगों में हुए अन्याय का हिसाब कौन देगा? कांग्रेस को बताना पड़ेगा कि सिख दंगों से जुड़ा होने का जिन पर आरोप है, उनको मुख्यमंत्री बनाना कौन सा न्याय है.
  • कांग्रेस ने देश के साथ जो अन्याय किया, हम उसे निरंतर कम करने की कोशिश कर रहे हैं. मुझे संतोष है कि तीन दशक बाद पहली बार 84 के सिख दंगों के गुनहगारों के गिरेबान तक कानून पहुंचा है. पहली बार वो सलाखों के पीछे पहुंचे हैं, फांसी के फंदे तक पहुंचे हैं.
  • भारत में चार अलग-अलग तरह की राजीतिक परम्पराएं रही हैं. पहला – नामपंथी, दूसरा – वामपंथी, तीसरा- दाम और दमन पंथी, चौथा- विकास पंथी. लेकिन दिल्ली देश का इकलौता राज्य है जिसने पॉलिटिकल कल्चर का एक पांचवां मॉडल भी देखा. ये है नाकाम पंथी. यानि जो दिल्ली के विकास से जुड़े हर काम को ना कहते हैं और जो काम करने की कोशिश भी करते हैं, उसमें नाकाम रहते हैं.

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