नामांकन भरने के बाद सोनिया गांधी ने पीएम मोदी को क्यों याद दिलाया 2004

आत्मविश्वास से लबरेज यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को रायबरेली सीट से नामांकन भरा. इस वक्‍त कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी भी उनके साथ मौजूद थीं.

नई दिल्ली: क्या पीएम मोदी अजेय हैं? इस सवाल का जवाब देते हुए सोनिया गांधी ने कहा, ‘बिल्कुल नहीं, 2004 को मत भूलिए. तब वाजपेयी जी भी अजेय लग रहे थे, लेकिन हम जीत थे.’ यूपी की रायबरेली सीट से पांचवी बार सोनिया गांधी ने नामांकन पत्र दाखिल किया. उसके बाद पत्रकारों को एक लाइन में जो जवाब दिया उससे कई मायने निकाले जा रहे हैं.

आत्मविश्वास से लबरेज यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को रायबरेली सीट से नामांकन भरा. इस वक्‍त कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी भी उनके साथ मौजूद थीं. पर्चा भरने के बाद सोनिया गांधी से पत्रकारों ने सवाल पूछा- क्या पीएम मोदी अजेय हैं? इस सवाल का जवाब देते हुए सोनिया गांधी ने कहा, ‘बिल्कुल नहीं, 2004 को मत भूलिए. तब वाजपेयी जी भी अजेय लग रहे थे, लेकिन हम जीत थे.’

चौंकाने वाले परिणाम आए थे 2004 आम चुनावों में
सोनिया गांधी ने जिस चुनाव का जिक्र किया वाकई उस चुनाव के नतीजों ने चौंका दिया था. 1999 में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. इस लिहाज़ से सरकार बनाने का न्योता मिला अटल बिहारी वाजेपयी को. वाजपेयी जी ने अपने साथ 21 दलों को मिलाया और सरकार भी बनाई. सरकार बनते ही अटल बिहारी वाजपेयी ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से अच्छे रिश्ते की कवायद की लेकिन बदले में करगिल वार मिला. खैर, इसके बाद सरकार चली. कई बार कई मुद्दों को लेकर सरकार को बैकफुट में भी जाना पड़ा लेकिन सरकार ने सफलता पूर्वक पांच साल बिताए. साल 2004 में दोबारा चुनाव आ गए. तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने शाइनिंग इंडिया का नारा दिया. इस नारे के साथ बीजेपी ने प्रचार-प्रसार के लिए करोड़ों रुपये भी खर्च किए. लेकिन फिर भी भाजपा चुनाव हार गई थी.

शाइनिंग इंडिया
साल 2004 में आम चुनाव के पहले इंडिया शाइनिंग अभियान के पीछे बीजेपी के तत्कालीन ‘चाणक्य’ प्रमोद महाजन की सोच मानी जाती है और इसे ग्रे वर्ल्डवाइड ऐडवर्टाइजिंग कंपनी के निर्विक सिंह के नेतृत्व में साकार किया गया था. इंडिया शाइनिंग के जरिए भारत को एक ओर उभरता और चमकदार देश बताया जा रहा था, तो दूसरी ओर जमीनी पर आंकड़े कुछ और ही कहानी कह रहे थे.

जमीनी हकीकत से दूर था शाइनिंग इंडिया का नारा
भारत के विकास वृद्धि के आंकडे़ ऐसे नहीं थे, जिससे कि ये नारा सटीक बैठता. उस वक्त की बात करें तो भारत की जीडीपी में बढ़त क्रमश: 4.4 फीसदी (2000-01), 6 फीसदी (2001-02) और 3.8 फीसदी (2002-03) ही थी. जबकि बीजेपी ने जो शाइनिंग इंडिया का नारा दिया उसमे भारत को विकास के मार्ग पर अग्रसर बताया था. कमोबेश ये नारा सिर्फ पूंजीपतियों और उद्योगपतियों को ही रास आया. और चुनाव में जो नतीजे आए वो बिल्कुल चौंकाने वाले आए. उस वक्त जितने भी ओपिनियन पोल आ रहे थे उसमें यही लग रहा था कि अटर बिहारी वाजपेयी दोबारा पीएम बनेंगे. यानि एनडीए की सरकार फिर सत्ता पर काबिज होगी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.

अतिआत्मविश्वास में अपनों को ही किया दरकिनार
बीजेपी सरकार को शाइनिंग इंडिया पर इतना विश्वास था कि जिनके सहारे 1999 में सरकार बनाई थी उन्हीं दलों से नाता तोड़ लिया था. 2004 के आम चुनाव से पहले डीएमके, इंडियन नेशनल लोकदल और लोजपा जैसे दल एनडीए से बाहर हो गए. इन तीनों दलों के अलग हो जाने के कारण एनडीए को लोकसभा की 55 सीटों का नुकसान हो गया.

2004 में ऐसे आए थे परिणाम
2004 में एनडीए को कुल 185 सीटें मिली थीं. इन दलों का साथ रहता तो उसे 240 सीटें मिल जातीं. बीजेपी की सीटें भी 1999 के 182 के मुकाबले 2004 में घटकर 138 ही रह गईं थी. अब 2019 में सभी लोग पीएम मोदी को अजेय बता रहे हैं. अब तक जितने भी ओपिनियन पोल आए हैं उनमें भी एनडीए की सरकार बनती दिख रही है लेकिन सोनिया गांधी ने जिस अंदाज से 2004 की याद दिलाई है उसने एकबार लोगों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है.

बाकायदा पूजा-पाठ करके किया चुनावी अभियान
सोनिया गांधी ने गुरुवार सुबह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ हवन कराया. पूजा-पाठ के बाद सोनिया गांधी ने रायबरेली में रोड शो भी किया. सोनिया पांचवीं बार रायबरेली से लोकसभा चुनाव लड़ रही है. इस वजह से इस बार उनके प्रचार में ‘पांच लाख पार’ का नारा भी चल रहा है. 2019 लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी के सामने बीजेपी के दिनेश प्रताप सिंह हैं, जो कि कांग्रेस छोड़कर कुछ ही समय पहले बीजेपी में शामिल हुए. एसपी-बीएसपी गठबंधन ने इस सीट पर कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है.