नेताओं ने शुरू किया नया ढकोसला, वोट जुटाने का जरिया बने सेना और किसान

जयपुर ग्रामीण संसदीय क्षेत्र से बीजेपी के उम्मीदवार कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ एक किसान को खेत मे लावणी करते देखा तो वे भी खेत मे पहुंच गए.

नई दिल्ली: एक ओर जहां चुनाव नजदीक है, तमाम पार्टियां साम, दाम, दंड और भेद का खेल खेलते हुए जीतने की होड़ में लगी हैं. आलम ये है कि जीतने के लिए पार्टियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है. छोटे-मोटे नेताओं से लेकर बड़े दिग्गज नाम इस चुनावी खिलवाड़ में शामिल हैं. हद तो तब हो गई जब इन पार्टियों ने सेना और किसानों को आगे रखकर अपने पैर जमाना शुरू किया. पार्टी के लोगों को साफ मालूम है कि देश की कमजोर कड़ी हमारे किसान और दुखती नब्ज हमारी सेना है. दोनों के नाम पर देश की जनता सेंसेटिव हो जाती है. ऐसे में पार्टियां गेम प्लान कर रही हैं.

देश के नेता कभी खेतों में फावड़ा लेकर खेतों में फोटो खिचवा रहे हैं तो कहीं किसी फौजी के आने पर रोड शो कराए जा रहे हैं. गौ माता के लिए गाने गाए जा रहे हैं. कहने का मतलब ये कतई नहीं कि देश के लिए इनके मायने कम हैं, बहुत हैं. मगर इसे चुनाव में जीत का जरिया बनाना गलत है.

यही नहीं चुनाव आयोग ने सख्त आदेश दिए हैं कि प्रचार-प्रसार के लिए कोई भी पार्टी किसानों और सेना को टारगेट नहीं करेगी, फिर भी इन पार्टी के लोगों को किसी बात का डर नहीं है. पिछले कुछ समय पहले हेमामालिनी इस चर्चा का हिस्सा बन चुकी हैं. फसल उठाते हुए उनकी एक फोटो खूब वायरल हुई है. हेलीकॉप्टर से उतर कर, मेक-अप लगाकर, दो सेकंड फसल का गठ्ठा उठाने से कोई किसान नहीं बन जाता मोहतर्मा.

बात यहां खत्म नहीं होती, लोकसभा चुनावों में विभिन्न दलों के प्रत्याशियों की ओर से मतदाताओं से रूबरू होने व उन्हें रिझाने के नए नए तरीके सामने आते ही रहते हैं. ऐसी ही एक बानगी जयपुर ग्रामीण संसदीय क्षेत्र से बीजेपी के उम्मीदवार कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के जनसंवाद के कार्यक्रम के दौरान देखने को मिली.

कर्नल राठौड़ जनसंवाद कार्यक्रम के तहत शाहपुरा के देवन गांव पहुंचे तो लोगों ने उन्हें घोड़ी पर बैठा दिया तथा बैंड बाजों की धुनों के साथ स्वागत किया. इस दौरान उन्होंने रोड़ शो किया. इसके बाद कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने रास्ते मे पटवारियों वाली ढाणी में एक किसान को खेत मे लावणी करते देखा तो वे भी खेत मे पहुंच गए. कर्नल राठौड़ ने दांतली लेकर फसल की कटाई शुरू कर दी. अपने साथ कर्नल राठौड़ को फसल काटते देख किसान गदगद हो गया.

ये सारे चोचले सिर्फ पॉपुलैरिटी बटोरने के लिए हैं. किसान को फोटो नहीं अपनी फसल के उचित दाम चाहिए साहेब, आप वो दिला सकें तो खिचाइए फोटो. ये ढकोसला इतना ही नहीं है इससे पहले भी ऐसा होता आया है, और चुनाव आयोग ने कार्यवाही नहीं की तो आगे भी होता रहेगा.