भोजपुरी सिनेमा से सियासी गली चले निरहुआ ने आखिर किसे बताया ‘बोल बच्चन’?

यूपी में जातीय गणित, खासकर पूर्वांचल में इससे निपटने के सवाल पर निरहुआ ने कहा कि सब लोग समझदार हैं. उन्हें पता है कि कौन देश के लिए काम कर रहा है और कौन स्वार्थ के लिए. देश के लिए सही व्यक्ति का चयन करना सबको आता है.

नई दिल्ली: भोजपुरी गायक-अभिनेता दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ अब राजनीति में हाथ आजमाने के लिए कूद पड़े हैं. उन्होंने अपने अभिनय का लोहा तो मनवाया ही, लेकिन अब वे असल जिंदगी में अभिनेता और राजनेता की दोहरी जिंदगी जीएंगे. राजनीति में निरहुआ कितना खरा उतर पाते हैं यह तो आगे पता चलेगा. इन्हीं सब मुद्दों पर दिनेश लाल ने खुलकर बात की है. वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) गठबंधन को उन्होंने ‘बोल बच्चन’ करार दिया है.

हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होने वाले निरहुआ ने कहा, “देश के लिए कुछ करने की तमन्ना थी, इसीलिए राजनीति में आया हूं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में  किए जा रहे विकास से प्रेरणा लेकर बीजेपी से जुड़ा हूं. इससे पहले कई पार्टियों में कलाकार के रूप में प्रचार कर चुका हूं. पहली बार किसी राजनीतिक दल से सीधेतौर पर जुड़ा हूं. देशहित में जो काम कर रहा है, उससे जुड़ने पर गर्व महसूस हो रहा है.”

खुद को बताया पार्टी का सिपाही

उन्होंने कहा, “मैं अब पार्टी का सिपाही हूं और पार्टी जो चाहेगी वही करूंगा. पार्टी टिकट देगी तो चुनाव लड़ूंगा या फिर स्टार प्रचारक के रूप में काम करूंगा. मुझे जहां से भी टिकट मिलेगा, वहीं से चुनाव लडूंगा. मुख्यमंत्री योगी ने टिकट दिलाने का आश्वासन दिया है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि एक दो दिन में बता दिया जाएगा कि आपको चुनाव कहां से लड़ाया जाएगा. टिकट ना मिलने की सूरत में भी पार्टी के सच्चे सिपाही की तरह काम करता रहूंगा. मेरी जिम्मेदारी अब बढ़ गई हैं. पार्टी के लिए भी अभी मुझे बहुत काम करना है. अभी फिलहाल तो जिस पार्टी ने मुझ पर विश्वास किया है, उसके लिए काम करना चाहता हूं.””

दिल मिले नहीं, दल मिलने का क्या फायदा

उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा के गठबंधन को लेकर निरहुआ ने कहा, “दिल तो मिले नहीं, दल मिलने से क्या फायदा. अखिलेश और मायावती ने चुनाव से पहले ही आधा-आधा प्रदेश छोड़ दिया तो वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से क्या जीतेंगे. पहले जब अखिलेश अकेले चुनाव लड़ते थे तो उनके साथ मैं भी प्रचार करता था, लेकिन अब तो विचारों का मतभेद है. अखिलेश जिसे प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं, उसे देश स्वीकार नहीं करेगा. हम जिसे पीएम बनाना चाहते हैं, वह पहले से ही देश के लिए बहुत कुछ कर चुके हैं.”

दिनेश ने कहा, “अभी गठबंधन हुआ है, उसमें किस भागीदारी के हिसाब से टिकट दिए गए हैं? मायावती ने कितने दलितों को टिकट दिया है? यह सब प्रश्न खड़े हो रहे हैं. इन लोगों की बातें सिर्फ ‘बोल बच्चन’ है. इससे यथार्थ का कोई लेना देना नहीं है. निजी स्वार्थों का मेल-मिलाप है.”

यूपी में जातीय गणित, खासकर पूर्वांचल में इससे निपटने के सवाल पर निरहुआ ने कहा कि सब लोग समझदार हैं. उन्हें पता है कि कौन देश के लिए काम कर रहा है और कौन स्वार्थ के लिए. देश के लिए सही व्यक्ति का चयन करना सबको आता है. देश की भलाई में ही सबका भला है.

भोजपुरी फिल्मों को मिली पहचान

निरहुआ ने कहा कि भोजपुरी फिल्में अब जल्द ही बॉलीवुड के समांतर खड़ी दिखाई देंगी. कार्य शुरू हो चुका है, प्रवासियों से संपर्क किया जा रहा है और सहयोग भी मिलने लगा है.  कुछ दिन पहले प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार भी भोजपुरी में फिल्म बनाने की बात कह चुके हैं. भोजपुरी में कम बजट में अच्छी फिल्में बनने लगी हैं और ये फिल्में हर जगह देखी जा रही हैं.

दिनेश लाल ने कहा, “भोजपुरी भाषा को लेकर हम लोग बहुत गंभीर हैं. इसको अनुसूची में दर्ज कराने के लिए काम चल रहा है. हम लोग मनोज तिवारी से भी मिल चुके हैं. प्रधानमंत्री भी इसे बहुत गंभीरता से ले रहे हैं.”