बीजेपी ने आडवाणी का टिकट काटकर इस बड़े नेता को गांधीनगर सीट से उतारा, पढ़ें Facts

गांधीनगर लोकसभा सीट पर बीजेपी को पहली बार 1989 में जीत मिली थी, तब से यहां किसी और पार्टी को जीत नसीब नहीं हुई. इस वीआईपी से आडवाणी का बेहद खास नाता रहा है.

नई दिल्‍ली: बीजेपी ने लंबे इंतजार के बाद गुरुवार को 2019 लोकसभा चुनाव के लिए पहली लिस्‍ट जारी कर दी. इस बार भी पीएम नरेंद्र मोदी वाराणसी लोकसभा सीट से ही चुनाव लड़ेंगे. इस बारे में पहले से भी चर्चा थी, लेकिन लिस्‍ट की सबसे ज्‍यादा चौंकाने वाली बात रही लाल कृष्‍ण आडवाणी का टिकट काटा जाना.

बीजेपी के पितामह कहे जाने वाले आडवाणी की गांधीनगर सीट से इस बार पार्टी अध्‍यक्ष अमित शाह को मैदान में उतारा गया है. गांधीनगर सीट गुजरात की वीआईपी सीटों में से मानी जाती है. इसका एक कारण यह भी है कि गांधीनगर गुजरात की राजधानी है. यह सीट लंबे समय से बीजेपी का गढ़ रही है. 2014 में आडवाणी इसी सीट से लड़े थे और जीते भी थे.

-गांधीनगर लोकसभा सीट पर लंबे समय से बीजेपी का राज रहा है.

-इस सीट पर सबसे पहला चुनाव 1967 में हुआ, तब यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी.

-पहले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर एसएम सोलंकी ने इस सीट से चुनाव जीता था. अगला चुनाव 1971 में हुआ और इस बार भी सोलंकी ही जीते.

-1977 में यह सीट सामान्य कैटेगरी में डाली गई और भारतीय लोक दल ने यहां जीत दर्ज की.

-1980 में कांग्रेस ने फिर वापसी की और 1984 में भी कांग्रेस ही यहां से जीती.

-1989 में पहली बार गांधीनगर सीट पर बीजेपी ने जीत दर्ज की और तब से अब तक लगातार यहां भगवा झंडा ही लहराया.

-बीजेपी के टिकट पर पहला चुनाव शंकर सिंह वाघेला ने जीता. इसके बाद लालकृष्ण आडवाणी ने 1991 में गांधीनगर से चुनाव लड़ा और जीत गए.

-1996 के उपचुनाव में हरीशचंद्र पटेल गांधीनगर से लड़े और जीते. 1996 के आम चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी ने यहां से चुनाव लड़ा और जीते.

-वाजपेयी के बाद 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में लगातार आडवाणी गांधीनगर सीट से लड़े और जीते.

-गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में 79 फीसदी लोग शहरों में बसते हैं, जबकि 21 प्रतिशत ग्रामीण आबादी है. अनुसूचित जाति (SC) की आबादी 11.41% और अनुसूचित जनजाति (ST) की आबादी 1.96% है.

-2011 की जनगणना के मुताबिक, गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र की आबादी 19,33,986 है. गांधीनगर में मुसलमानों की आबादी 4 फीसदी है.