अखिलेश ने ‘चौकीदार की चौकी’ तो मायावती ने चला मुस्लिम कार्ड, पढ़ें, देवबंद रैली के 22 Points

उत्तर प्रदेश के देवबंद में रविवार को हुई महागठबंधन की रैली में अखिलेश यादव ने पीएम मोदी पर हमला बोला तो वहीं मायावती ने कांग्रेस के मुस्लिम वोट बैंक को अपने पाले में लाने के लिए दांव चला.

देवबंद : उत्तर प्रदेश के देवबंद में रविवार को सपा (SP), बसपा(BSP), रालोद (RLD), महागठबंधन ने चुनावी रैली की. इस रैली में समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव, बहुजन समाजवादी पार्टी (BSP) की मुखिया मायावती, राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के अध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह मुख्य रूप से मौजूद रहे. इस रैली में नेताओं ने अपने भाषणों से न सिर्फ मोदी सरकार पर सवाल खड़े किए बल्कि कांग्रेस पर भी निशाना साधा. जानिए किसने क्या कहा.

अखिलेश यादव ने कहीं ये 10 बड़ी बातें. 

1. यह चुनाव, इतिहास बनाने का चुनाव है. यहां ऐसे लोग आए जो नफरत के अलावा कुछ नहीं बोले. उनके वादे कहां है. अच्छे दिन कहां हैं. कोई भी वादा पूरा नहीं किया. चुनाव आए तो चौकीदार बनकर आ गए. नफरत फैलाने वालों को पहचानिए.

2.सराब को शराब बोलने वाले सत्ता के नशे में हैं. जिसे वह मिलावट का गठबंधन बता रहे हैं वह महापरिवर्तन का गठबंधन है. नया प्रधानमंत्री बनाने का गठबंधन है.

3. मैं जनता के सामने भरोसा दिलाना चहाता हूं कि यही गरीब किसान मिलकर एक एक चौकीदार की चौकी छीनने का काम करेंगे. कहा कि जीएसटी से बडे लोगों को लाभ हुआ होगा. हमारे छोटे व्‍यापारीयो को कोई लाभ नहीं हुआ है. उनका कोई कारोबार आगे नहीं बढ़ा है.

4. अंग्रेजों से ज्‍यादा भाजपा ने समाज को बांट दिया है. बीएसपी और एसपी ने जितना देश को जोड़ा है उतना बीजेपी ने नहीं किया. कांग्रेस की नीतियां ही बीजेपी की नीतियां है. कांग्रेस बदलाव नहीं, पार्टी बनाना चाहती है. कांग्रेस व बीजेपी में कोई फर्क नहीं है.

5. हम सहारनपुर में है, यह तो एक ऐसी पवित्र धरती है, जहां एक तरफ शाकंभरी देवी का मंदिर है तो दूसरी तरफ दारुल उलूम है. यह देश को बदलने का चुनाव है. हमारी आपके बीच की दूरियां मिटाने का चुनाव है. यहां शाकंभरी में लोग माता के दर्शन करने आते हैं वहीं दारुल उलूम में पढ़कर मोहब्बत का पैगाम बांटते हैं.

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6. हम इंतजार कर रहे थे कि कुंभ में 56 इंच का सीना दिख जाए, लेकिन हमें नहीं दिखा. भाजपा वाले कहते हैं बीएसपी-एसपी की सरकार में बिजली के क्षेत्र में काम नहीं हुआ है, मैं कहता हूं कि जितना हमारी सरकार में काम हुआ उतना बीजेपी की सरकार में नहीं हुआ. मैं भाजपा से अपील करता हूं कि नवरात्र पर संकल्प ले कि वह आगे झूठ नहीं बोलेगी.

7. भाजपा ने कहती है कि हम भ्रष्टाचार मिटा देंगे, कालाधन वापस आ जाएगा, लेकिन हमारा सारा पैसा बैंक में जमा करा लिया. जीएसटी से बड़े कारोबारियों को फायदा हुआ होगा, लेकिन छोटे किसानों की परेशानी बढ़ गई.

8. बीजेपी अपने पुराने वादों पर बात नहीं करना चाहती है. पहले हमारे बीच चाय वाला बनकर आ गये, हमने उनपर भरोसा कर लिया, हमने अच्छे दिन का भरोसा किया, हमने 15 लाख रुपये, करोड़ों रोजगार का भरोसा किया. अब चुनाव आया तो कह रहे हैं कि हम चौकीदार बनकर आए हैं.

9. ये टीवी पर गरीबों के पैर धो रहे थे और दूसरी तरफ नौकरियां धो डालीं. हमारे व्यापारी भाई बीजेपी सरकार में केवल लंच और मंच के लिए रह गए हैं, उनकी तरक्की नहीं हुई.

10. ये हमारे चौधरी चरण सिंह की विरासत को खत्म करना चाहते हैं, तो जान लें कि यह गठबंधन चौधरी चरण सिंह की विरासत को आगे बढ़ाने का गठबंधन है.

मायावती की मंच से 7 बड़ी बातें

1. बीजेपी और कांग्रेस को चुनाव के वक्त ही गरीबों की याद आती है. सबका साथ-सबका विकास सिर्फ जुमलेबाजी है. कांग्रेस की 72 हजार देने वाली योजना भी गरीबों पर निशाना है. पिछली सरकार ने गरीब का मजाक बनाया. इस चुनाव में प्रलोभन भरे चुनावी वादे कांग्रेस पार्टी भी कर रही है. चुनाव में ही इन्हें मंदिर, मस्जिद में चादर चढ़ाने की याद आती है. जनता अब समझती है कि ये वोटों की आड़ में तरह-तरह की नाटकबाजी हो रही है.

2. राफेल डील में भ्रष्टाचार हुआ. आज देश की सीमा सुरक्षित नहीं हैं. बीजेपी पूंजीपतियों को धनवान बनाने में जुटी रही. मोदी सरकार ने सिर्फ उद्योगपतियों की मदद की. अच्छे दिनों का वादा करके बीजेपी ने गुमराह किया. गलत नीतियों की वजह से बीजेपी सत्ता से बाहर जाएगी.

3. अगर ईवीएम में गड़बड़ नहीं हुई तो महागठबंधन की जीत होगी. बीजेपी के राज में आरक्षण व्यवस्था कमजोर हुई. नोटबंदी और जीएसटी पर उन्होंने कहा कि यह जल्दबाजी में लिया गया फैसला था और इससे मोदी भी दुखी हैं. बिना तैयारी के नोटबंदी की गई. इससे गरीबी व बेरोजगारी और बढ़ी है. इनकी सरकार में भ्रष्टाचार और भी बढ़ा है. कांग्रेस की सरकार में बोफोर्स का मामला और मोदी सरकार में राफेल का मामला इसका ताजा उदाहरण है.

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4. सहारनपुर में मुसलमानों को मालूम है कि यहां के बसपा प्रत्याशी का टिकट हमने पहले ही घोषित कर दिया था लेकिन कांग्रेस ने जानबूझ कर भाजपा को जिताने के लिए मुस्लिम प्रत्याशी दिया. हमारे कार्यकर्ताओं का हर पोलिंग और सेक्टर लेवर पर ये जिम्मेदारी हैं कि हमारा एक भी वोट ना बंटने पाए. कांग्रेस ने मुझे मिलने वाले वोटों को बांटने के लिए ऐसी जाति और धर्म के उम्मीदवारों को टिकट दिया है जिससे भाजपा जीत जाए.

5. इससे पहले इनकी दादी इंदिरा गांधी भी गरीबी हटाओ का बीस सूत्रीय नाटकबाजी कार्यक्रम चला चुकीं हैं. कांग्रेस पार्टी चाहती है कि हम जीतें या ना जीतें गठबंधन नहीं जीतना चाहिए. कांग्रेस भी प्रलोभन दे रही है. मायावती ने जनता से किया कहा कांग्रेस को वोट देकर अपना वोट बर्बाद न करें.

6. ये चुनाव घोषित होने वाले दिन तक भी हवा-हवाई घोषणाओं में जुटे रहे, इन्होंने इसे पुलवामा हमले तक भी जारी रखा है. पुलवामा हमले के दिन भी कई कार्यक्रम हुए, पुलवामा घटना ने इनकी देशभक्ति का भी पर्दाफाश किया है.

7. बीजेपी जाने वाली है और महागठबंधन आने वाला है. मोदी आज भीड़ को देखेंगे तो घबरा जाएंगे. बीजेपी इस बार सत्ता से जरूर बाहर होगी. इन्हें लगता है कि इनकी चौकीदारी की नाटकबाजी इन्हें बचा पाएगी लेकिन यह काम नहीं आएगी. यदि इस चुनाव में इनके छोटे बड़े चौकीदार कितनी ही ताकत क्यों ने लगा लें. ये नाटकबाजी इन्हें नहीं बचा सकेगी.

चौधरी अजीत सिंह की 4 बड़ी बातें

1. पांच साल में मोदी ने क्या किया.. अच्छे दिन आपके नहीं, मोदी के आए हैं.. मायावती जी और मुलायम जी के शासन में गन्ने का दाम बढ़ाया गया, लेकिन योगी के शासन में गन्ने का दाम एक रुपया नहीं बढ़ा. भाजपा किसान विरोधी है.

2. पीएम मोदी जी दिन में तीन सूट बदलते हैं. वह तो देश-विदेश घूमते हैं और कहते है कि फकीर आदमी हूं. भगवान हमको भी ऐसा फकीर बना दे. अजीत सिंह ने कहा कि संविधान ने ताकत दी है कि हर पांच साल में सरकार बदली जा सकती है, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं.

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3. भाजपा पिछले पांच साल में कुछ नहीं कर पाई. गांवों में किसान कहते है कि मोदी-योगी उनका फसल चर रहे हैं. इस रैली की भीड़ देखकर लग रहा है कि भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया है. अब तो उनका सत्ता से बाहर होना तय हो गया है.

4. भाजपा के नेता कहते हैं कि मोदी 50 वर्ष राज करेगा और भाजपा सांसद साक्षी महाराज कहते हैं कि आखिरी चुनाव है. मैं भी आप लोगों से कहता हूं कि संविधान ने हमको ताकत दी है कि हर पांच साल में सरकार बदली जा सकती है उसका इस्तेमाल कीजिए.