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चुनाव में चंद घंटे ही बचे हैं और दोनों दिग्गज राष्ट्रीय दलों ने अपने-अपने पत्ते घोषणापत्र के रूप में खोल दिए हैं. आइए जानते हैं कि किसके दावों में कितना दम है.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव में अब चंद घंटे ही बचे हैं. ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दिग्गज राष्ट्रीय दलों ने अपने-अपने वादे घोषणा पत्र के रूप में जनता के सामने रख दिए हैं. कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र को ‘हम निभाएंगे’ नाम दिया और न्याय योजना को इसका मुख्य आधार बनाया. जबकि बीजेपी ने अपने घोषणापत्र को संकल्प पत्र का नाम देते हुए मुख्य ध्यान राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले पर रखा. इन दोनों ही दलों ने अपने घोषणापत्रों में जनता से कई अन्य मसलों पर कई खास वादे भी किए हैं. तो आइए बीजेपी और कांग्रेस के घोषापत्रों पर नजर डालते हैं और जानते हैं कि किसके वादों में कितना दम है.

किसानों से किसके वादों में है दम

भारत एक कृषि प्रधान देश है और किसानों से इस देश की इकोनॉमी पर सीधा असर पड़ता है. इसी के साथ किसानों के वोट किसी भी पार्टी को सत्ता में बैठाने या उतारने का दम रखते हैं. ऐसे में कृषि क्षेत्रों से जुडे़ लोगों को दोनों ही राष्ट्रीय दलों ने अपने घोषणापत्र में काफी जगह दी है. कांग्रेस पार्टी ने किसानों के लिए अलग से ही बजट बनाने का ऐलान किया है. किसानों के लिए एक खास ऐलान कांग्रेस का यह भी है कि कर्ज न चुका पाने की स्थिति में किसानों पर दर्ज किए जाने वाले मामले को क्रिमिनल ऑफेंस माना जाता है, जिसे कांग्रेस ने सिविल ऑफेंस बनाने का वादा किया है.

वहीं बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में किसानों की आय दोगुनी करने का वादा दोहराया है. किसानों के लिए पीएम किसान सम्मान निधि योजना और खेतिहर किसानों की सामाजिक सुरक्षा के लिए 60 साल की उम्र पार करने के बाद पेंशन योजना का जिक्र भी बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में किया है. बीजेपी ने दावा किया है कि कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिए 25 लाख करोड़ का निवेश किया जाएगा.

राष्ट्रीय सुरक्षा को कैसे करेंगे पुख्ता

राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले का जिक्र करते हुए बीजेपी ने वादा किया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की अपनी नीति पर बरकरार रहेगी. बीजेपी ने केंद्रीय सुरक्षाबलों के आधुनिकीकरण और मेक इन इंडिया के जरिए देश में ही रक्षा साजो सामान बनाने का ऐलान भी घोषणापत्र में किया है. तटीय सुरक्षा को मजबूती देने की बात भी बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में की है.

बीजेपी ने आर्टिकल 370 और 35 ए को कश्मीर के विकास में बाधा बताते हुए इन्हें खत्म करने के अपने प्रयास को भी घोषणापत्र में जगह दी है. साथ ही बीजेपी ने कश्मीरी पंडितों की घाटी में सुरक्षित वापसी के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने का भी वादा किया है. वहीं कांग्रेस ने देशद्रोह की धारा 124ए को खत्म करने का ऐलान किया है. कांग्रेस ने आफस्पा (Armed Forces Special Power Act) को हटाने की बात घोषणापत्र में कही है.

रोजगार के मामले पर किसके वादों में दम

रोजगार के मसले पर बीजेपी सत्ता में आने के बाद से ही विपक्ष के निशाने पर रही है. कड़े विरोध के बाद भी बीजेपी ने रोजगार से जुड़ा कोई बड़ा ऐलान तो नहीं किया लेकिन युवाओं को नौकरियां पैदा करने लायक बनाने का वादा जरूर किया है. वहीं कांग्रेस ने देश के युवा से 22 लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया है.

कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणापत्र में दावा किया है कि वह अगर सत्ता में आई तो ग्राम पंचायतों में 10 लाख लोगों को रोजगार दिया जाएगा. स्टार्टअप में आने वाली परेशानियों को दूर करने का वादा करते हुए अपने घोषणापत्र में कांग्रेस ने लिखा है कि युवाओं को तीन साल तक कारोबार करने के लिए किसी की अनुमति लेने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी. कांग्रेस ने मनरेगा में 100 दिनों तक काम देने की अवधि को बढ़ा कर 150 दिन करने का ऐलान भी किया है.

गरीबी मिटाने के लिए किसने क्या वादे किए

दोनों ही दलों ने गरीबी से लड़ने के अपने-अपने तरीके घोषणापत्रों में सुझाए हैं. कांग्रेस ने जहां न्याय (NYAY) को अपने घोषापत्र का आधार बनाते हुए इसे गरीबों के कल्याण की सबसे बड़ी योजना बताया है. तो बीजेपी ने गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों की संख्या 10 प्रतिशत से भी कम करने का संकल्प लिया है. समावेशी विकास पर जोर देने वाली बीजेपी ने पांच किलोमीटर के दायरे में लोगों को बैंकिंग सुविधाएं देने का ऐलान किया है.

जबकि कांग्रेस का मुख्य ध्यान न्याय योजना पर रहा है. जिसमें उन्होंने लगभग 25 करोड़ लोगों को सालाना 72 हजार रुपए देने का ऐलान किया. इसका लाभ उन पांच करोड़ गरीब परिवारों को मिलेगा जिनकी मासिक आय 12 हजार रुपये से कम है.

महिलाओं के हकों को किसने दी कितनी तरजीह

देश की आधी आबादी ने दोनों ही राष्ट्रीय दलों के घोषणापत्र में जगह बनाई है. बीजेपी ने जहां तीन तलाक, निकाह हलाला जैसी प्रथाओं को समाप्त करने वाले बिल बनाने का वादा किया है. वहीं कांग्रेस ने महिलाओं को संसद और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण के बिल को पहले ही सत्र में पास कराने का वादा किया है.

बीजेपी ने महिलाओं को रोजगार दिलाने के लिए महिला कर्मचारी रखने वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों से 10 प्रतिशत उत्पाद खरीदने का वादा अपने घोषणापत्र में किया है. बीजेपी ने सभी आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को आयुष्मान भारत योजना के तहत लाने का ऐलान भी अपने संकल्प पत्र में किया.

शिक्षा पर किसका कितना ध्यान

कांग्रेस पार्टी ने छात्रों की आईआईटी और आईआईएम समेत देश के कई नामी विश्वविद्यालयों तक पहुंच को आसान बनाने का वादा अपने घोषणापत्र में किया. वहीं बीजेपी ने 200 नए केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालयों के निर्माण का ऐलान किया है.

कांग्रेस पार्टी ने घोषणापत्र में वादा किया है कि वह अपने बजट का 6 प्रतिशत शिक्षा के क्षेत्र में खर्ज करेगी. जबकि बीजेपी ने 2024 तक एमबीबीएस और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की संख्या दोगुनी करने और भारतीय संस्थानों को विश्व के टॉप 500 शैक्षणिक संस्थानों में स्थान दिलाने का संकल्प लिया है.

स्वास्थ्य सुविधाओं को घोषणापत्र में कितनी मिली जगह

बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में बताया है कि देश के 1.5 लाख स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों में टेलीमेडिसिन और डायग्नोस्टिक लैब बनाने की सुविधा देने का वादा किया है. बीजेपी का कहना है कि अगर वह दोबारा सत्ता में आते हैं तो हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज बनाया जाएगा. साथ ही 2022 तक देश के सभी बच्चों और महिलाओं का पूर्ण टीकाकरण होगा.

वहीं कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में सभी नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए राइट टू हेल्थकेयर एक्ट बनाने का ऐलान किया है. नेशनल मेंटल हेल्थ केयर पॉलिसी 2014 और मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 को लागू करने का वादा भी कांग्रेस पार्टी ने किया है. कांग्रेस ने सभी नेशनल और स्टेट हाई वे पर ट्रॉमा सेंटर बनाए जाने का वादा किया है.