ये तस्‍वीर बताती है 2014 से 2019 तक बीजेपी में आया कौन सा बड़ा बदलाव

2019 लोकसभा चुनाव के लिए संकल्‍प पत्र जारी होते ही बीजेपी के भीतर ही घमासान मच गया है.

नई दिल्‍ली: बीजेपी ने सोमवार को 2019 लोकसभा चुनाव के लिए घोषणा पत्र जारी कर दिया. इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह समेत कई बड़े नेता मौजूद थे, लेकिन दो वरिष्‍ठ नेता मंच पर नजर नहीं आए- लाल कृष्‍ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी.

अमित शाह कर सकते हैं जल्‍द मुलाकात

पार्टी के संस्‍थापक सदस्‍य आडवाणी, जोशी न केवल मंच से गायब दिखे बल्कि कार्यक्रम में तक में उनकी मौजूदगी नहीं रही. यही नहीं, संकल्‍प पत्र के कवर से भी आडवाणी और जोशी दोनों की तस्‍वीर भी नहीं दिखी. यहां तक कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तस्‍वीर भी संकल्‍प पत्र पर नहीं रखी गई. खबर है कि आडवाणी और जोशी दोनों इस अपमान से नाराज हैं, अमित शाह इन दोनों से जल्‍द मुलाकात कर सकते हैं.

काट दिया गया आडवाणी का टिकट 

पांच साल पहले यानी 2014 लोकसभा चुनाव की बात करें तो तब बीजेपी का घोषणा पत्र मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में बना था. कुछ दिनों पहले की ही बात है, जब बीजेपी ने 2019 लोकसभा चुनाव के उम्‍मीदवारों के नाम की घोषणा की थी. बीजेपी की कैंडिडेट लिस्‍ट से न केवल आडवाणी बल्कि जोशी का भी काटा गया. आडवाणी गांधीनगर लोकसभा सीट से कई बार चुनाव जीते, 2019 में भी वह इसी सीट से लड़ने के इच्‍छुक थे, लेकिन 75 पार नेताओं को टिकट न देने की पॉलिसी के चलते आडवाणी की जगह अमित शाह को गांधीनगर से टिकट दे दिया गया. इसी प्रकार से मुरली मनोहर जोशी का भी टिकट काट दिया गया, वह 2014 में कानुपर सीट से लड़े थे.

‘रामलाल ने कहा- चुनाव मत लड़ो’ 

सूत्रों के हवाले से यह भी खबर आई कि 91 साल के आडवाणी टिकट काटे जाने नहीं, बल्कि टिकट काटे जाने के तरीके से नाराज हैं. आडवाणी के करीबी ने कहा कि पार्टी के संस्‍थापक सदस्‍य के साथ कम से कम किसी बड़े नेता को बात करके उनके राजनीतिक भविष्‍य के बारे में बात करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया बल्कि पार्टी के राष्‍ट्रीय महासचिव रामलाल ने उनसे बात करके कहा कि आप खुद ही रिटायरमेंट का ऐलान कर दीजिए, आडवाणी ने इससे इनकार कर दिया.

वहीं, मुरली मनोहर जोशी ने तो कानपुर की जनता के नाम ओपन लेटर लिखकर कह दिया, ‘रामलाल ने मुझे चुनाव लड़ने से मना किया है.’ जोशी के पत्र से स्‍पष्‍ट था कि वह चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने उन्‍हें रिटायरमेंट लेने पर मजबूर कर दिया.

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