अमेठी के इस मंदिर के गर्भ में छिपे हैं कई राज, जानिए क्यों स्मृति ईरानी ने भी लाइन में लगकर किए दर्शन

अमेठी से भाजपा उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने नवरात्र के पहले दिन अमेठी के गौरीगंज जिला मुख्यालय में शक्ति पीठ माँ दुर्गन भवानी धाम पर लाइन में लगकर दर्शन किए.

अमेठी: लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है. कुछ दिनों बाद ही पहले चरण के लिए वोट डाले जाएंगे. शनिवार से चैत्र की नवरात्र शुरू हो चुके हैं. अमेठी से भाजपा उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने नवरात्र के पहले दिन अमेठी के गौरीगंज जिला मुख्यालय में शक्ति पीठ माँ दुर्गन भवानी धाम पर लाइन में लगकर दर्शन किए. ये मंदिर बहुत ही ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं को समेटे हुए है.

स्मृति ईरानी इस बार भी अमेठी से ही चुनाव लड़ रही हैं. उनकी लड़ाई कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से होंगी. अमेठी तो वैसे गांधी परिवार का गढ़ रहा है लेकिन गांधी परिवार के गढ़ पर सेंध लगाने के लिए बीजेपी ने स्मृति ईरानी को मैदान पर उतारा हुआ है. ऐसा कहा जा रहा है कि इस बार राहुल गांधी को अमेठी से हार का डर सता रहा है तभी उन्होंने दक्षिण भारत की तरफ रूख कर लिया है. राहुल गांधी केरल की वायनाड सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.

शक्ति पीठ मां दुर्गन भवानी धाम क्यों है प्रसिद्ध
अमेठी के गौरीगंज जिला मुख्यालय में शक्ति पीठ मां दुर्गन भवानी धाम है. चैत्र नवरात्रि और कुवार नवरात्रि के साथ प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को यहां बड़ा मेला आयोजित होता है. वहीं दूर दराज से लाखों श्रद्धालु मां भवानी के दर्शन और आशीर्वाद पाने के लिए आते हैं.

लोगों की मान्यताएं
लोगों का मानना है कि यहां आने से मां भवानी हर दुख को दूर कर देती हैं. यह शक्ति पीठ गौरीगंज शहर से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. प्राचीन समय में प्राप्त मूर्तियां मन्दिर प्रांगण में विराजमान तथ्य को काफी हद तक प्रमाणिकता प्रदान करते हैं. मंदिर के पीछे स्थित सरोवर और उसमें खिले सुंदर कमल के फूल लोगों को आकर्षित करते हैं.

17वीं शताब्दी का इतिहास समेटे है धाम
17वीं शताब्दी के पूर्व में बने इस शक्ति पीठ धाम से लोगों की दिली आस्था जुड़ी है. लोगों की मान्यता है कि यहां मां भवानी के दर्शन के लिए आने वाले हर शख्स की मान्यता पूरी होती है. मां के भक्तों के अनुसार गूंगा भी यहाँ बोल सकता है. अंधे को यहां आख मिलती है. साथ ही मां भगवती के चरण पादुका से निकलने वाला नीर आंखो के लिए काफी लाभकारी होता है.

भव्य है ये धाम
दुर्गन धाम में मां दुर्गा के भव्य मंदिर के साथ ही छोटे बड़े मंदिर बने हुए हैं, जो मां के धाम की भव्यता में चार चांद लगाते हैं. मन्दिर के पुजारी ने बताया कि 17वीं शताब्दी के प्राचीन इस मंदिर की स्थापना दो सौ वर्ष पहले अमेठी राजघराने के महाराज माधव सिंह के पूर्वजों द्वारा कराई गई थी.

ऐसे पता बना था ये भव्य धाम
अमेठी के राजा अपनी सीमाओं को देखने निकले थे. उनका पड़ाव भवन शाहपुर गांव के पास जंगल में रुका था. इसी बीच एक पत्थर की मूर्ति स्वत: जमीन चीरकर बाहर आ गई. इसे देखकर महाराजा भगवान बक्स सिंह सहित उनके सैनिक और मंत्री आश्चर्य चकित हो गए. धार्मिक भावना में विश्वास रखने वाले अमेठी नरेश ने अपने राज्य की दक्षिण पश्चिम सीमा पर मां दुर्गा के नाम पर दुर्गन धाम की स्थापना कराई. धीरे-धीरे यह आश्रम भक्तों का पवित्र तीर्थ स्थल ही बन गया.