BJP लगा रही जख्मों पर मरहम, अमित शाह ने आडवाणी से की मुलाकात

भारतीय जनता पार्टी ने अपने रूठे नेताओं को मनाने की पहल की है. बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने कुछ समय से नाराज चल रहे लालकृष्ण आडवाणी और मनोहर जोशी से मुलाकात कर बिगड़े मसले सुलझाने की कोशिश की है.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी जोर-शोर से जुटी हुई है. पार्टी वो हर तैयारी कर रही जो चुनाव में जीत दिला सके. बीते इतवार पार्टी ने चुनाव के लिए संकल्प पत्र जारी करने के साथ रैलियां और बैठकें करके जन साधारण का ध्यान अपनी ओर खींचा. पार्टी के पक्ष को मजबूत बनाने की कड़ी में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से मुलाकात की. सच कहें तो बीजेपी ने माहौल कुछ यूं कर दिया है कि जख्म भी हम देंगे और मरहम भी हम ही लगाएंगे.


आडवाणी जी से मीटिंग पिछले सोमवार की शाम उन्ही के आवास पर हुई, इस दौरान संगठन मंत्री रामलाल भी मौजूद थे. इस मुलाकात के दौरान अमित शाह ने आडवाणी जी को भाजपा के संकल्प पत्र की कॉपी सौंपी और उससे जुड़े मुद्दों पर बातचीत की. इसके अलावा अमित शाह ने आडवाणी जी से लोकसभा चुनाव, भाजपाई राजनीति में उनकी भूमिका और टिकट मुद्दे पर चर्चा की.

इतना ही नहीं इस मीटिंग में अमित शाह ने आडवाणी की टिकट नहीं दिए जाने को लेकर जो नाराजगी थी, उसे भी दूर करने की कोशिश की. अमित शाह ने आडवाणी से ये भी कहा है कि वो ऐसा कुछ न कहें जिससे विपक्षी सरकार भारतीय जनता पार्टी की आलोचना कर सके.

अमित शाह ने जोशी से भी मुलाकात की
आडवाणी जी से मिलने से पहले अमित शाह पार्टी के पूर्व अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी से उनके घर मिलने पहुंचे थे. करीब 50 मिनट तक दोनों के बीच बातचीत का दौर चलता रहा. इस बैठक में रामलाल को बाहर बैठाया गया था, कोई तीसरा शख्स मीटिंग में मौजूद नहीं था.

पार्टी से खफा थे आडवाणी और जोशी
बता दें कि बीजेपी की 2019 लोकसभा चुनाव के उम्मीरदवारों के नामों की घोषणा के दौरान भाजपा की कैंडिडेट लिस्टत से आडवाणी और जोशी दोनों टिकट काटा गया. गांधीनगर लोकसभा सीट से कई बार चुनाव जीतने के बावजूद आडवाणी की जगह अमित शाह को टिकट दे दिया गया. पार्टी के राष्ट्रीगय महासचिव रामलाल ने आडवानी जी से बात करके कहा था कि आप खुद ही रिटायरमेंट का ऐलान कर दीजिए, आडवाणी ने इससे इनकार कर दिया था.

यही हाल मुरली मनोहर जोशी का भी हुआ. कानपुर सीट से उनका भी टिकट काट दिया गया. इस बात पर मुरली मनोहर जोशी ने कानपुर की जनता के नाम ओपन लेटर के जरिए कहा था कि ‘रामलाल ने मुझे चुनाव लड़ने से मना किया है.’ जोशी के इस लेटर से साफ जाहिर था कि वह चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें रिटायरमेंट लेने पर मजबूर कर दिया.