सोशल मीडिया के सहारे 400 लोकसभा सीटों को फतह करने निकली बीजेपी

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नयी दिल्ली
आजकल चुनाव का माहौल इस कदर है कि चाय की गुमटी, गुप्ता जी की दुकान से लेकर सोशल मीडिया तक बस चुनाव की बातें ही हो रही हैं. 2014 के चुनावों के समय जो मोदी लहर चली थी उसमें सोशल मीडिया का बहुत बड़ा हाथ था. एक बार फिर सोशल मीडिया को आगे रखकर NaMo की पार्टी चुनाव जीतने चली है. आइये जानते हैं आखिर कैसे…

• सोशल मीडिया में बड़ी तादाद में फॉलोवर जुटाने वाले कई लोग भाजपा के सपोर्ट में आए हैं और प्रचार-प्रसार की कमान संभाली है. ये पार्टी के सदस्य नहीं बल्कि नौकरीपेशा लोग हैं. नमो के प्रचार के लिए इनमें से कुछ ने काम से छुट्टी ले ली है तो कुछ ऑफिस टाइम में ही एक्टिव हैं. आई सपोर्ट मोदी, मोदी इज नेक्स्ट पीएम जैसे फेसबुक पेज भी इन दिनों खूब सक्रिय हैं.

• आंकड़ों पर जाएं तो देश में 2014 के समय, 77 करोड़ मोबाइल कनेक्शन थे जो अब बढ़कर लगभग 102 करोड़ हो गए हैं. इसी तरह, इंटरनेट कनेक्शन पिछले पांच सालों में 15 करोड़ से बढ़कर 56 करोड़ हो चुके हैं. इस बदलती संख्या के हिसाब से अंदाजा लगाया जा रहा है कि सोशल मीडिया 2019 में लगभग 400 लोकसभा सीटों पर असर डालेगा.

• भाजपा द्वारा #5YEARSCHALLENGE नाम से कैम्पेन चलाया गया है. इस हैशटैग का यूज करके भाजपा फेसबुक और ट्विटर में पांच साल पुरानी और नई फोटो एक साथ पोस्ट कर रही है. इस कैम्पेन का मकसद पिछले पांच सालों में किए अपने विकास के कामों को दिखाना है. इसके अलावा आई सपोर्ट नमो, माई फर्स्ट वोट फॉर मोदी, मोदी वन्स मोर, मोदी फॉर मिडिल क्लास जैसे हैशटैग भी सोशल मीडिया में खूब चलाए जा रहे हैं.

• सोशल ट्रेंड में एक नया तरीका शामिल हुआ है, वाट्सएप. चूंकि भारत में लगभग 20 करोड़ वाट्सएप यूजर हैं, इसलिए वाट्सएप ग्रुप के जरिए भी पार्टी के सपोर्ट में आए लोग माहौल बनाए हुए हैं. इनमें से कई लोगों ने वाट्सएप ग्रुप इसलिए भी ज्वाइन कर रखे हैं ताकि पार्टी के विरोध में हो रही बातों का पता लगा सकें.

• धीरे-धीरे दूसरी पार्टियों को फेसबुक और ट्विटर जैसी जगहों पर एक्टिव होता देख, बीजेपी की आईटी सेल वालों का कहना है कि विपक्षी पार्टियों का सोशल स्यापा बढ़ता जा रहा है और वो लगातार अफवाह फैला रही हैं. इन तमाम वजहों से बीजेपी के ये सपोर्टर अधिक सक्रिय हो गए हैं और 2019 के चुनाव जीतने के लिए नई रणनीतियां बना रहे हैं. उनके हिसाब से किसी के व्यक्तित्व पर उंगली उठाने की बजाय सरकार और विकास की बातों पर जोर दिया जाएगा.

बीजेपी के आईटी सेल हेड ‘अमित मालवीय’ के अनुसार ये सभी लोग किसी के कहने पर नहीं बल्कि अपनी मर्जी से पार्टी के सपोर्ट में आगे आए हैं.

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