Exclusive: “सिंगल डिजिट में सिमट जाएगी बीजेपी,” अखिलेश यादव ने किया दावा

यूपी से गुजरने वाली देश की सियासत से जुड़े कुछ सवालों के जवाब जानने के लिए टीवी9 भारतवर्ष ने यूपी के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव से बातचीत की. पढ़ें पूरा इंटरव्यू.

लखनऊ: कहते हैं प्रधानमंत्री की कुर्सी का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है. और इसबार यूपी में समाजवादी पार्टी और बहुजनसमाज पार्टी ने मिलकर बीजेपी के रथ को रोकने की कमान संभाली है. ऐसे में ये तो साफ है कि यहीं से तय होगा कि देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होता है. इसलिए यूपी से गुजरने वाली देश की सियासत से जुड़े कुछ सवालों के जवाब जानने के लिए टीवी9 भारतवर्ष ने यूपी के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव से बातचीत की. पढ़ें,  कंसल्टिंग एडिटर Ajit Anjum के साथ Akhilesh Yadav का एक्‍सक्‍लूसिव इंटरव्‍यू.

बीजेपी की तरफ से एक नारा दिया गया “मोदी है तो मुमकिन है,” क्या मोदी की वजह से ही सपा-बसपा का गठबंधन मुमकिन हुआ है?

मुमकिन बहुत सकारात्मक शब्द है. जब वहां कुछ लोग कुछ मुमकिन कर सकते हैं तो यहां भी तो लोग कुछ मुमकिन कर सकते हैं. देश ने पांच साल की उनकी सरकार देख ली है. यूपी ने तो अतिरिक्त दो साल की सरकार और देखी है. लेकिन जनता को जैसी राहत मिलना चाहिए थी वो नहीं मिली. इसीलिए ये गठबंधन मुमकिन हुआ. इसके लिए अजीत सिंह और मायावती जी को धन्यवाद दूंगा.

क्या ये मोदी जी के डर के कारण हुआ कि इतने वर्षों पुरानी दुश्मनी भूल कर सपा-बसपा साथ आ गए?

ये मोदी जी की डर के वजह से नहीं हुआ. बस कभी-कभी कुछ सीखना चाहिए सभी से. हमने बीजेपी से सीखा कि कैसे दलों को जोड़ा जा सकता है. आज भी हम देखें तो उनका कई दलों से गठबंधन है. उनसे यह सीख कर हम उन्ही को रोक रहे हैं तो आगे देश हमें याद करेगा कि गठबंधन से ही रुके हैं ये.

क्या आपको लगता है कि यूपी में आप उन्हें रोक लेंगे?

अपने बूथ से हमें जो रिपोर्ट मिल रही हैं उससे हमें पता चल रहा है कि सबसे ज्यादा सीटें गठबंधन जीत रहा है. बीजेपी की भाषा से भी यह पता चल रहा है. उनके भाषणों में देखने को मिलता है कि वह अपनी उपलब्धियां नहीं बता रहे हैं. नोटबंदी पर वह बात नहीं कर रहे हैं. जीएसटी से कितने व्यापार को सहूलियत मिली वह यह नहीं बता रहे हैं.

लेकिन वह यह बता रहे हैं कि कैसें आप लोगों ने उत्तर प्रदेश को लूटा बारी-बारी से.

आज हम सरकार में नहीं हैं. और बीजेपी को कांग्रेस की बातें नहीं करनी चाहिए. कांग्रेस भी ऐसी ही बात कर रहे हैं. अगर हमारे भ्रष्टाचार की बात कर रहे हैं. तो उनका तो दामन साफ था. लेकिन एक बात याद रखिए कि जिसका दामन सबसे ज्यादा साफ रहता है उसके दामन पर लगा एक छींटा भी दूर से दिखाई देता है. कम से कम जो छींटे पड़े हैं उनपर वो उसकी सच्चाई तो बताएं.

अखिलेश यादव का एग्जिट पोल क्या कहता है?

उत्तर प्रदेश में तो ज्यादातर सीटों पर गठबंधन जीत रहा है और बीजेपी को बहुत मुश्किल होगी सिंगल डिजिट पार करने में भी. जनता बहुत दुखी है उनके शासन से.

अगर आपके आकलन के मुताबिक गठबंधन सीटें जीतता है तो अखिलेश यादव का अगला दांव क्या होगा. क्या आप अपने उसी बयान पर कायम रहेंगे जिसमें आपने कहा था कि मायावती जी प्रधानमंत्री बनेंगी और मुझे सीएम बनाने में मदद करेंगी.

मैंने जो इंटरव्यू दिया था उसे उन्होंने ज्यादा बढ़ा कर पेश कर दिया. मैंने कहा था कि देश के किसी भी कोने से कोई भी प्रधानमंत्री बन सकता है लेकिन मुझे खुशी होगी कि उत्तर प्रदेश से फिर एक बार कोई प्रधानमंत्री बने. और देश चाहता है कि नया प्रधानमंत्री बने जिसे बनाने में ये गठबंधन काम करेगा.

23 तारीख को जब परिणाम आ जाएगा. तब मायावती जी, अजीत जी और हम बैठ कर चर्चा करेंगे के नाम किस का हो. राजनीतिक गलियारों में सब लोग जानते हैं कि मैं किसका नाम आगे करूंगा. मैं अभी इसलिए नहीं बोल रहा हूं क्योंकि अभी परिणाम नहीं आया है. अभी रिजल्ट नहीं आया है लेकिन कांग्रेस पार्टी ने कह दिया है कि पार्टी तैयार है कि किसी और दल का प्रधानमंत्री बनता है तो वो समर्थन के लिए तैयार हैं.

मैं उन्हें प्रधानमंत्री बनते हुए देखना चाहता हूं उन्होंने मुझसे ज्यादा अनुभव है. इंटरव्यू में दिए इस बयान पर क्या कहना है.

ये मैंने जरूर कहा है. हां वह उत्तर प्रदेश की कई बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं. उनके पास अनुभव है और कोई मुझसे सवाल करता है कि क्या वह प्रधानमंत्री बन सकती हैं तो मैं कहूंगा कि हां बिलकुल बन सकती हैं. मैं ये ही फिर कह रहा हूं कि उन्हे अनुभव है और वह प्रधानमंत्री बन सकती हैं. गठबंधन मिलकर यह फैसला करेगा कि देश को एक नया प्रधानमंत्री दे.

अगर वैकल्पिक स्थिति बनती है तो क्या होगा. क्योंकि दो-तीन परिस्थितियां बन रही हैं. ऐसे में क्या होगा क्योंकि बीजेपी और पीएम मोदी कह रहे हैं कि महामिलावट दल खिचड़ी सरकार बनाने की तैयारी कर रहे हैं.

जो ये एक्सरसाइस हो रही है ये अच्छी बात है. चुनावों के पहले भी ममता जी ने बुलाया था तब सबी दलों के नेता पहुंचे थे. सब एक मंच पर थे. इसी तरह चंद्रबाबू नायडू जी भी कोशिश कर रहे हैं कि सभी दलों से बातचीत हो. तेलंगाना के मुख्यमंत्री भी कोशिश कर रहे हैं सभी दलों से मिलने की. और भी कई ऐसे नेता हैं जो पहले भी कोशिश कर रहे थे. शरद पवार जी भी उनमें से एक हैं.

ये अच्छा है और मुझे लग रहा है कि जब तक परिणाम आएंगे. ये सभी वरिष्ठ नेता किसी एक नाम पर जरूर सहमत हो जाएंगे.

अतीत के अनुभवों को देखा जाए तो आपकी विश्वसनीयता पर सवाल उठता है. ऐसे में बीजेपी की तरफ से आरोप लगता है कि यह एक बार फिर पहले की तरह ही भानूमति का कुनबा बनाने की कोशिश है. जिसमें 5-6 उम्मीदार हैं जिनकी व्यक्तिगत महत्वकांक्षाएं हैं.

ये स्वभाविक है कि ऐसी बातें कही जाएंगी. लेकिन देश को इस समय के हालात में प्रधानमंत्री मिला है. और हम पिछले कुछ समय की सरकारें देखें तो सब गठबंधन से बनी हैं. ये बात अलग है कि एक दल बड़ा रहा होगा. आज भी बीजेपी की ही अकेले सरकार हीं है. वो भी गठबंधन की सरकार है.

अगर गैर बीजेपी सरकार बनती है और मायावती के नाम पर सहमती नहीं बनती है तब आप क्या करेंगे?

मैं अभी इसबारे में सोचुंगा ही नहीं. मैं 23 तारीख का इंतजार कर रहा हूं. जो पहले से तय है वही बात कहेंगे. बाद में क्या होगा इसपर बाद में विचार करेंगे.

आपकी थिंकिंग में कांग्रेस कहीं है क्या?

मुझे पूरा भरोसा है कि बहुत सारे दल देशहित में एक होंगी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बयानों से लग रहा है कि वह भी गैर एनडीए गठबंधन बनाने को तैयार हैं.

कांग्रेस को लेकर आप इतने तल्ख क्यों हैं? जबकि आपने पूर्व में उनसे गठबंधन किया था.

हां उस समय मैंने समझौता किया था. समझौता भी ऐसा कि मुझे ज्यादा सीटें देनी पड़ी थी और मैंने कांग्रेस को दी थी. और उन परिस्थितियों में वह समझौता सबसे बेहतर था. उनके लिए भी मेरे लिए भी. मेरी कांग्रेस के किसी नेता से कोई शिकायत नहीं है.

लेकिन सवाल यह है कि अगर आप किसी के साथ गठबंधन में हैं, उपचुनाव होने जा रहा है, ऐसे में आप अपने सहयोगी दल से पूछेंगे नहीं और अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर देंगे. तो ये तो स्वभाविक है कि दूसरा दल भी ये ही कर देगा. दूसरे राज्यों में हमारी कोई खास ताकत नहीं है, लेकिन हम अपनी ताकत से तो लड़ सकते हैं. जब तक बीएसपी उनके साथ नहीं होगी तब तक हम नहीं आ सकते उनके साथ.

क्या कांग्रेस के बाहर से सपोर्ट वाली स्थिति भी सकती है?

देश आगे बढ़े इसके लिए गैर बीजेपी सरकार बननी चाहिए. कई नेताओं ममता बनर्जी, मायावती जी सबने कई बड़े काम किए हैं. ये सब मिलकर अनुभव के साथ अच्छी सरकार दे सकते हैं. कौन कहां खड़ा होकर समर्थन देगा यह अभी नहीं कह सकते हैं.

कोई वैकल्पिक सरकार बनती है तो अखिलेश कहां होंगे?

मैं उत्तर प्रदेश में भी जिम्मेदारी निभाउंगा और दिल्ली भी जाऊंगा. इसीलिए मैंने लोकसभा का चुनाव लड़ा है. मंत्री पद के बारे में अभी कुछ नहीं कह सकता.

पीएम मोदी अपनी सभाओं में कह रहे हैं कि सपा-बसपा ने ऐसे को टिकट दिया जो बलात्कार का आरोपी है और भगोड़ा.

वो बलात्कारी हैं या नहीं ये वो या मैं तय नहीं करूंगा. वो न्यायाधीष तय करेंगे. मैं प्रदेश में आपको कई ऐसे मामले गिनवा सकता हूं जिनमें बीजेपी ने हमारे उम्मीदवारों पर 376 के झूठे आरोप लगाए हैं. हमारे तीन जिला पंचायत सदस्यों के खिलाफ बीजेपी ने ये आरोप लगाए थे. इसलिए मैं कहुंगा कि बीजेपी चुनाव जीतने के लिए कुछ भी कर सकती है.

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