दिग्गजों की जगह BJP ने नए चेहरों को दिया था मौका, मोदी लहर में सबने मारी बाजी

जहां सुषमा स्वराज और उमा भारती जैसे दिग्गज नेताओं ने स्वास्थ्य चिंताओं के चलते खुद को चुनावी दौड़ से बाहर रखा, वहीं पार्टी ने 75 वर्ष की आयु पार कर चुके दिग्गज नेताओं को टिकट से वंचित रखा.
लोकसभा चुनाव 2019, दिग्गजों की जगह BJP ने नए चेहरों को दिया था मौका, मोदी लहर में सबने मारी बाजी

नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (BJP) का पुराने दिग्गज नेताओं की जगह नए चेहरों को मौका देने का निर्णय बड़ा काम का साबित हुआ है. लोकसभा चुनाव के परिणामों में BJP ने गांधीनगर, झांसी, विदिशा और इंदौर की पूर्व दिग्गजों की हाई-प्रोफाइल सीटों पर 4 लाख के अधिक अंतर से जीत हासिल की है. 

जहां सुषमा स्वराज और उमा भारती जैसे दिग्गज नेताओं ने स्वास्थ्य चिंताओं के चलते खुद को चुनावी दौड़ से बाहर रखा, वहीं पार्टी ने 75 वर्ष की आयु पार कर चुके दिग्गज नेताओं को टिकट से वंचित रखा. पार्टी के निर्णय का पूर्वानुमान लगाते हुए कलराज मिश्र और भगत सिंह कोश्यारी जैसे वरिष्ठ नेताओं ने भी पहले ही चुनाव न लड़ने की इच्छा जता दी थी. बता दें कि, भजपा ने 75 वर्ष की आयु को एक तरह से अनौपचारिक रिटायरमेंट ऐज बना दिया है. इसी के चलते पिछली सरकार में लाल कृष्ण अडवानी और मुरली मनोहर जोशी को मंत्री पद नहीं मिला था.

 कलराज मिश्र की जगह रमापति राम त्रिपाठी

कलराज मिश्र ने 2014 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की देवरिया सीट से  2.65 लाख मतों से जीत दर्ज की थी. पर 2019 लोकसभा चुनाव में उनका टिकट काटकर BJP ने यूपी के पूर्व पार्टी अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी को टिकट दिया. त्रिपाठी ने ब्राह्मण और क्षत्रीय वोटों के सहारे देवरिया में 2 लाख 50 हजार वोटों  के अंतर से बड़ी जीत दर्ज की है. सपा-बसपा गठबंधन के विनोद जयसवाल दूसरे नंबर पर रहे.

लोकसभा चुनाव 2019, दिग्गजों की जगह BJP ने नए चेहरों को दिया था मौका, मोदी लहर में सबने मारी बाजी
अडवानी गांधीनगर लोकसभा सीट से 6 बार सांसद रहे हैं. 

गांधीनगर सीट पर अडवानी की जगह शाह

गुजरात की गांधीनगर लोकसभा सीट पर भाजपा ने छः बार के सांसद लाल कृष्ण अडवानी का टिकट काटकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को टिकट दिया था. इस सीट से शाह ने 5.57 लाख वोटों से जीत दर्ज की. वाजपेयी सरकार में गृह मंत्री रह चुके अडवानी ने 2014 में 4.83 लाख वोटों से जीत दर्ज की थी.

कानपुर से जोशी की जगह सत्यदेव पचौरी

ऐसे ही भाजपा के एक और दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी को कानपुर लोकसभा सीट से दोबारा टिकट नहीं दिया गया. पिछले चुनाव में उन्होंने इस सीट से पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल को 2.23 लाख मतों से हराया था. इस बार इस सीट से भाजपा ने उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सत्यदेव पचौरी को टिकट दिया. पचौरी ने 1.56 लाख मतों से श्रीप्रकाश जयसवाल को करारी मात दी है. पिछले महीने जोशी ने टिकट नहीं मिलने पर अपनी नाराजगी सार्वजानिक की थी.

झांसी में उमा भारती की जगह अनुराग शर्मा 

झांसी लोकसभा सीट से हिन्दू फायरब्रांड नेता उमा भारती ने 2014 में 2 लाख वोटों से जीत दर्ज की थी. इस बार उनकी जगह भाजपा ने बैद्यनाथ ग्रुप के मालिक अनुराग शर्मा को मैदान में उतारा. शर्मा ने 3.65 लाख मतों से सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी को हराया. भाजपा की झांसी में लगातार दो जीत से ये साफ़ हो गया है कि यहां कांग्रेस का दबदबा अब लगभग ख़त्म हो गया है. इस सीट से कांग्रेस ने 8 बार लोकसभा चुनाव जीता है.

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विदिशा में सुषमा की जगह रमाकांत भार्गव 

हमेशा से भाजपा का मजबूत गढ़ रही विदिशा लोकसभा सीट से दो बार की सांसद सुषमा स्वराज ने इस बार चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया. हालांकि, उनकी अनुपस्थिति ने पार्टी को नुक्सान नहीं पहुंचाया. उनकी जगह मैदान में उतारे गए रमाकांत भार्गव ने 5 लाख मतों से चुनाव जीता.

2014 लोकसभा चुनाव में स्वराज ने विदिशा से 4.10 लाख मतों से चुनाव जीता था, वहीं 2009 में विदेश मंत्री ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के भाई को धुल चटाई थी. विदिशा से अटल बिहारी वाजपेयी और शिवराज सिंह चौहान भी चुनाव लड़ और जीत चुके हैं.

लोकसभा चुनाव 2019, दिग्गजों की जगह BJP ने नए चेहरों को दिया था मौका, मोदी लहर में सबने मारी बाजी
उमा भारती, सुषमा स्वराज और सुमित्रा महाजन ने चुनाव नहीं लड़ा.

इंदौर में सुमित्रा महाजन की अनुपस्थिति नहीं भुना पाई कांग्रेस 

8 बार की सांसद सुमित्रा महाजन (76) के मैदान से हटने के बाद कांग्रेस के पास इंदौर से चुनाव जीतने का बड़ा मौका था. कांग्रेस ने आखिरी बार 1984 में इस सीट से चुनाव जीता था. इस बार भाजपा ने नए चेहरे शंकर लालवानी को मैदान में उतारा और उन्होंने यहां से 5.47 लाख मतों से जीत दर्ज की. लोकसभा अध्यक्ष महाजन भले ही इस सीट से चुनाव न लड़ी हों, लेकिन उन्होंने भाजपा की आयोजित 110 में से 100 रैलियों में हिस्सा लिया.

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कांगड़ा में शांता कुमार की विरासत को किशन कपूर ने जिंदा रखा

हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा लोकसभा सीट से भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार चुनाव लड़ा करते थे. इस बार उनको टिकट नहीं मिला. भाजपा ने शांता कुमार की जगह राज्य सरकार में मंत्री रहे किशन कपूर को टिकट दिया और उन्होंने 4.50 लाख मतों से चुनाव जीतकर पार्टी का भरोसा बनाए रखा.

कुमार जहां ब्राह्मण हैं, वहीं कपूर ट्राइबल समुदाय से आते हैं. इस क्षेत्र में ट्राइबल मतदाता अधिक संख्या में हैं. 2014 में कुमार, जोकि दो बार के मुख्यमंत्री भी हैं ने चंदर कुमार को 1.70 मतों से हराते हुए चौथी बार इस सीट से चुनाव जीता था.

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