2019 के ‘मैन ऑफ द मैच’ बने अमित शाह, इस रणनीति से किया विपक्ष को ध्‍वस्‍त  

यूपी की हर लोकसभा सीट पर अमित शाह ने एक प्रकार से मोदी को ही प्रत्‍याशी के तौर उतार दिया. मीडिया में दिए गए विज्ञापनों को भी इसी प्रकार से डिजाइन किया गया, ताकि मोदी का नाम सबसे ऊपर रहे.   

नई दिल्‍ली: अबकी बार किसकी सरकार? पिछले कई महीनों से यह सवाल हर किसी की जुबां पर था और सभी को बेसब्री से इंतजार था, 23 मई 2019 का. ये तारीख आई और किसी को उस सवाल का जवाब मिल गया. 2019 के इस जनादेश ने 2014 लोकसभा चुनाव की मोदी लहर के आंकड़ों को भी पीछे छोड़ दिया है. यूं तो इन दिनों मोदी ही बीजेपी हैं, बीजेपी ही मोदी, लेकिन एक शख्‍स और है, जो मोदी के करिश्‍माई व्‍यक्तित्‍व की छाया में रहकर भी खुद की चमक बरकरार रखे हुए है. नाम है- अमित शाह, जिन्‍हें बीजेपी का चाणक्‍य, चुनावी मशीन जैसे नामों से जाना जाता है.

वो 125 सीटें जहां कभी बीजेपी जीती नहीं

अमित शाह ने 2019 लोकसभा चुनाव के लिए खास रणनीति तैयार की थी, जिसके मुताबिक, बीजेपी ने ऐसी 125 लोकसभा सीटों पर सबसे ज्‍यादा फोकस किया, जहां दूर-दूर तक बीजेपी के चुनाव जीतने की संभावना नहीं थी. इनमें ज्‍यादातर सीटें पश्चिम बंगाल, केरल, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, नॉर्थ-ईस्‍ट और तेलंगाना की हैं. इन 125 सीटों को ध्‍यान में रखते हुए पीएम मोदी की 100 रैलियां प्‍लान की गईं. इसके पीछे वजह यह थी कि 2014 में बीजेपी को ज्‍यादातर सीटें उत्‍तर भारत में मिली थीं. यही कारण रहा कि बीजेपी ने उन राज्‍यों पर ज्‍यादा फोकस किया, जहां उसे पहले बेहद कमजोर माना जाता था.

पीएम मोदी ने जन-जन तक पहुंचाया संदेश

सबसे पहले केरल की बात करते हैं, यहां काफी समय से सीपीआई-एम और आरएसएस के बीच सड़कों पर जंग छिड़ी, लेकिन बीजेपी चुनावी सफलता नहीं प्राप्‍त नहीं कर सकी. इसी प्रकार से पश्चिम बंगाल के भी हालात रहे, लेकिन पीएम मोदी ने दोनों राज्‍यों में जिस प्रकार से जनता को संबोधित किया और अपनी बात को रखा, उससे लोगों तक बीजेपी का संदेश एकदम स्‍पष्‍ट गया.

ओडिशा में यूं दी पटनायक को मात

इसी प्रकार से ओडिशा में बीजेपी ने संभावनाओं को तलाशा. शायद उन्‍हें इसके लिए अपने तीन मुख्‍यमंत्रियों से प्रेरणा मिली होगी, जिन्‍होंने मध्‍य प्रदेश, छत्‍तीसगढ़ और राजस्‍थान में सत्‍ता गंवाई. रमन सिंह और शिवराज तीन-तीन बार सीएम रहे, लेकिन वे 2018 में हारे. ठीक इसी प्रकार से ओडिशा में नवीन पटनायक बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन बीजेपी ने उन्‍हें कम से कम लोकसभा चुनाव में पटखनी देने में सफलता पाई है.

ममता बनर्जी पर नहीं किए निजी हमले

पीएम मोदी ने 24 दिनों के भीतर 4 बार ओडिशा में रैली कीं, जिसकी वजह से पार्टी का संगठन भी वहां सक्रिय रहा और ओडिशा की जनता को लोकसभा-विधानसभा चुनाव के बीच फर्क समझाने में कामयाब रहा. इसी प्रकार से पश्चिम बंगाल में हिंदुत्‍व के मुद्दे पर बार-बार बीजेपी ने चर्चा की और लगातार पीएम मोदी ने ममता बनर्जी की तानाशाही और हिंदू विरोधी नीतियों को जनता के सामने पेश किया. अमित शाह और नरेंद्र मोदी ने बार-बार ममता बनर्जी पर हमले किए, लेकिन हमले निजी न हों, इसका पूरा ध्‍यान रखा.

यूपी की सबसे कड़ी चुनौती से यूं पाई पार

इसी प्रकार से सबसे कठिन चुनौती के तौर पर उभरे उत्‍तर प्रदेश के लिए भी अमित शाह ने रणनीति तैयार की, जो कामयाब भी रही. यूपी में 2014 लोकसभा चुनाव में एनडीए ने 73 सीटें जीती थीं, इस किले को बचाना अमित शाह की सबसे बड़ी चुनौती थी.

गठबंधन का अचूक समझा जा रहा हथियार हुआ फेल

यूपी में सपा-बसपा-आरएलडी के गठजोड़ को ब्रैंड मोदी के खिलाफ अचूक हथियार माना जा रहा था, लेकिन यह भी फेल हो गया. यूपी के लिए अमित शाह ने जो रणनीति तैयार की, उसके तहत सभी उम्‍मीदवारों को स्‍पष्‍ट निर्देश दिए गए कि मोदी, राष्ट्रवाद, आतंकवाद, केंद्र की योजनाओं- स्वच्छ भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि को फोकस में रखा. इन सब मुद्दों से इतर अमित शाह ने यूपी की हर सीट पर प्रत्‍याशी के प्रचार से ज्‍यादा ब्रैंड मोदी पर फोकस किया. मतलब उम्‍मीदवारों के भाषण, अन्‍य नेताओं की रैलियों को इस तरह प्‍लान किया कि बात मोदी के इर्द-गिर्द ही रहे.

हर सीट पर मोदी को प्रत्‍याशी बनाया

यूपी की हर लोकसभा सीट पर अमित शाह ने एक प्रकार से मोदी को ही प्रत्‍याशी के तौर उतार दिया. मीडिया में दिए गए विज्ञापनों को भी इसी प्रकार से डिजाइन किया गया, ताकि मोदी का नाम सबसे ऊपर रहे.