EC ने जम्मू-कश्मीर में BJP नेताओं पर मीडिया को रिश्वत देने का आरोप माना सही

लेह प्रेस क्लब के मुताबिक, बीजेपी ने क्लब के सदस्यों को पैसों से भरे लिफाफों की पेशकश कर रिश्वत देने की कोशिश की. लेह प्रेस क्लब के इस आरोप के बाद देश में घमासान मच गया है.

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में मंगलवार को बीजेपी नेताओं पर कथित रूप से लिफ़ाफ़े में पैसे भरकर पत्रकारों को देने का आरोप प्रथम दृष्टया सही पाया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मामले की जांच के आदेश देने वाली लेह की जिला चुनाव अधिकारी और उपायुक्त अवनि लवासा ने कहा, ‘हम इस मामले को जिला अदालत ले गए और एफआईआर दर्ज करने के लिए निर्देश मांगे लेकिन अदालत ने इस केस में अब तक कोई आदेश जारी नहीं किया है.’

अवनि लवासा 2013 बैच की जम्मू कश्मीर कैडर की आईएएस अधिकारी हैं. इसके साथ ही वह मौजूदा चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की बेटी हैं. बता दें कि अशोक लवासा ने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिए जाने पर असहमति जताई थी.

अवनि लवासा ने कहा कि जो शिकायतें मिली हैं उसके मुताबिक बीजेपी नेताओं ने आचार संहिता का कथित उल्लंघन ही नहीं बल्कि अपराध भी किया है. उन्होंने कहा, ‘हमने पुलिस को लिखा है कि वह या तो एफआईआर दर्ज करें या शिकायत लिखें.’ पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और मंगलवार को इसे अदालत के समक्ष पेश किया गया.

लवासा ने कहा, ‘हम इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की गुहार लगा रहे हैं. अब तक तीन शिकायतें आ गई हैं, जिसमें से एक हमारी तरफ से और दो अन्य प्रेस क्लब लेह और लेह के एसएचओ की हैं.’

उन्होंने कहा कि पुलिस अब इन सभी शिकायतों को एक साथ दर्ज करने वाली हैं. दरअसल लेह प्रेस क्लब ने ज़िला चुनाव अधिकारी और एसएचओ लेह के साथ अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराया था. उन्होंने कहा कि दो मई को लेह में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी के नेताओं ने मीडियाकर्मियों को जो लिफाफे दिए गए थे, उसमें एक रैली का निमंत्रण पत्र था, जिसे दो दिन बाद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने संबोधित किया था.

प्रेस क्लब ने मीडियाकर्मियों को रिश्वत देने के लिए जम्मू कश्मीर बीजेपी के अध्यक्ष रविंद्र रैना और एमएलसी विक्रम सहित बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं पर आरोप लगाया था. हालांकि जम्मू कश्मीर बीजेपी अध्यक्ष रैना ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है.

उन्होंने कहा, ‘हमने निर्मला सीतारमण की रैली में ख़ास लोगों को आमंत्रित करने के लिए लगभग 2,000 कार्ड छपवाए थे और इनमें से कुछ मीडियाकर्मियों को भी दिए गए थे.’

रैना के मुताबिक उन्होंने निजी तौर पर किसी भी मीडियाकर्मी को लिफाफा नहीं दिया. रैना अब उन मीडियाकर्मियों के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराने की बात कह रहे हैं जिन्होंने उनका नाम लिया.

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