मध्य प्रदेश में ‘बाप-बेटे’ ने मिलकर कांग्रेस को शून्य होने से बचाया

मध्य प्रदेश में कांग्रेस को 29 में से 28 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है.

भोपाल. मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है. 29 संसदीय क्षेत्रों में से 28 में वह हार की राह पर है. छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र से नकुलनाथ और विधानसभा क्षेत्र के उप-चुनाव में नकुलनाथ के पिता कमलनाथ ने जीत दर्ज कर कांग्रेस का कम से कम जीत का खाता खोल दिया है.

राज्य में कांग्रेस के दिग्गजों को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है. देश की सबसे चर्चित सीटों में से एक भोपाल में कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भाजपा की साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के हाथों हार का सामना करना पड़ा है. इसी तरह गुना संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपने ही समर्थक रहे डॉ. के. पी. यादव से पिछड़ना पड़ा है.

इसके अलावा राज्य की प्रमुख सीट खंडवा में कांग्रेस के पूर्व मंत्री अरुण यादव, रतलाम में कांतिलाल भूरिया, जबलपुर में विवेक तन्खा को पिछड़ना पड़ा है. वर्ष 1977 के चुनाव के बाद राज्य में चार दशक बाद यह स्थिति बनी है, जब कांग्रेस को एक पर आकर सिमटना पड़ा है. कांग्रेस का जहां पूरे प्रदेश में सफाया हुआ है, वहीं छिंदवाड़ा एक मात्र संसदीय क्षेत्र है, जहां कांग्रेस को जीत मिली है. यहां नकुलनाथ 37,536 वोटों के अंतर से जीत रहे हैं, वहीं विधानसभा के उपचुनाव में मुख्यमंत्री कमलनाथ को 25,734 वोटों की बढ़त मिली है.

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वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक गिरिजा शंकर के अनुसार, देश का मूड जानने में कांग्रेस और उसके नेता पूरी तरह असफल रहे हैं. मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार पूर्ववर्ती सरकार की खामियां खोजने में लग गई और उसने लोकसभा चुनाव पर अपना ध्यान केंद्रित नहीं किया.

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कांग्रेस के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “नकुलनाथ और कमलनाथ ने कांग्रेस की राज्य में लाज बचा ली है और कांग्रेसियों का गम कुछ कम कर दिया है.” लगभग पांच माह पूर्व राज्य के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को डेढ़ दशक बाद सत्ता में वापसी मिली थी. वर्तमान की कमलनाथ सरकार सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से चल रही हैं. राज्य के 230 विधायकों में से कांग्रेस के 114 और भाजपा के 109 विधायक चुने गए.