चुनाव खत्म होते ही योगी हुए सख्त, राजभर को मंत्रिमंडल से निकाला

राजभर कई मौकोंं पर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर निशाना साधते रहे हैं.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार में रहकर अक्सर सरकार के खिलाफ बयानबाजी करने वाले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सहयोगी पार्टी सुहेलदेव भासपा के अध्य्क्ष ओमप्रकाश राजभर को सीएम योगी सरकार ने मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की सिफारिश की है.

राजभर कई मौकोंं पर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर निशाना साधते रहे हैं. राजभर के इस रवैये को लेकर योगी सरकार ने राज्यपाल से राजभर को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की सिफारिश की है.

इसकी जानकारी सीएम योगी के कार्यालय ने ट्विटर हैंडल के जरिए दी है. उन्होंने लिखा, “आज यूपी सीएम योगी आदित्य नाथ जी ने महामहिम श्री राज्यपाल को पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांग जन कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर को मंत्रिमंडल से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने की सिफारिश की है.”

इसके बाद राज्यपाल श्री राम नाईक ने मंत्रिमण्डल के सदस्य श्री ओम प्रकाश राजभर, मंत्री पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं विकलांग जन विकास को तात्कालिक प्रभाव से प्रदेश मंत्रिमण्डल की सदस्यता से पदमुक्त कर दिया है. श्री नाईक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्ताव पर श्री ओम प्रकाश राजभर को मंत्री पद से मुक्त करने के लिये अपना अनुमोदन प्रदान कर दिया है.

वहीं इसके अलावा ओमप्रकाश राजभर की पार्टी के अन्य सदस्य जो सरकार में विभिन्न निगमों और परिषदों में अध्यक्ष और सदस्य हैं, उन्हें भी तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है.

बीजेपी ने नहीं दी 1 भी सीट

सुहेलदेव भासपा अध्यक्ष ओममप्रकाश राजभर ने लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी के 35 से ज्यादा प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतारे थे. बीजेपी ने उन्हें एक भी सीट नहीं दी थी. राजभर चुनावों से पहले सीएम को इस्तीफा सौंपने की बात भी करते रहे हैं. राजभर पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण में कोटे की व्यवस्था को लेकर मांंग कर रहे थे.

चुप नहीं बैठेंग, हक के लड़ते रहेंगे

योगी सरकार से बर्खास्त किए जाने के बाद ओमप्रकाश राजभर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.

राजभर ने कहा, “मुख्यमंत्री ने जो फैसला लिया, वो बहुत सही फैसला लिया है. मुख्यमंत्री जी ने समाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट कमेटी बनाई. रिपोर्ट आई और रिपोर्ट को रद्दी की टोकरी में रख दिया. उसपर सिफारिश लागू करने के लिए समय नहीं है. एक करोड़ 70 लाख गरीब लोगों के बच्चे प्राइमरी में पढ़ते हैं. उस शिक्षा में सुधार कैसे हो, उन्हें इसपर जल्दबाजी नहीं है. गुजरात और बिहार में शराब बंद है, लेकिन उत्तर प्रदेश में शराब बंद करने के लिए समय नहीं है.”

इसके बाद राजभर बोले, “अगर हम अपने हक की लड़ाई लड़ते हैं, पिछड़ों को छात्रवृत्ति देने के लिए इनके पास समय नहीं है. सामान्य वर्ग को छात्रवृत्ति देने के लिए धन है. अगर उसके लिए हम लड़ते हैं तो सरकार के विरुध होते हैं. मैं कहना चाहता हूं मुख्यमंत्री जी से कि जितना जल्दी उन्होंने आज फैसला लिया है उतनी जल्दी समाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट भी लागू कर दीजिएगा, ताकि पिछडे वर्ग से आने वाले बच्चों को भी छात्रवृत्ति मिले. जितना समान्य वर्ग और अनुसूचित जाति को बजट देते हैं उतना इन्हें भी दिया जाए. हम चुप नहीं बैठेंगे और अपने हक की लड़ाई लड़ते रहेंगे.”

 

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