चुनाव आयोग का फैसला मोदी के लिए गिफ्ट, बंगाल प्रचार बैन पर बोले रणदीप सुरजेवाला

भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो और लोकसभा चुनाव 2019 के बीच पश्चिम बंगाल में होती हिंसाओं के बीच चुनाव आयोग ने राज्य में गुरुवार रात 10 बजे से सभी राजनीतिक पार्टियों के प्रचार-प्रसार पर रोक लगा दी, जिसके बाद से विपक्ष नाराज है.

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से प्रचार-प्रसार पर लगाए गए बैन के बाद सियासत तेज हो गई है. कांग्रेस ने चुनाव आयोग के इस फैसले को गलत बताया है और साथ ही इसे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धयान में रखकर लिया गया फैसला बताया गया है.

बंगाल हिंसा पर बात करते हुए प्रेस कॉ़न्फ्रेंस में कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, “प्रसिद्ध, प्रख्यात और स्वतंत्रता सेनानी पंडित ईश्वरचंद विद्यासागर की मूर्ती को भाजपा के गुंडों ने खंडित किया. हॉस्टल की दीवारें चढ़कर, दरवाजे तोड़कर छात्रों को प्रताड़ित किया गया. इसके बावजूद चुनाव आयोग ने अमित शाह के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए कल की उनकी गीदड़भभकी से डरकर चुनाव प्रचार पर ही पाबंदी लगा दी, ताकि अकेले मोदी जी की रैली हो सकें और विपक्ष का कोई भी प्रचार प्रसार न कर सके.”

इसके आगे कांग्रेस नेता ने कहा, “कांग्रेस पार्टी ने हमेशा ही इस बात से गुरेज किया है कि जबतक कोई सबूत न हो, तबतक किसी भी संवैधानिक संस्था पर सवाल न उठाए जाएं, पर अब लगता है कि चुनाव आयोग जैसी निर्भीक, निष्पक्ष और संवैधानिक संस्था आज मोदी दरबार के अंदर असहज, असहाय, डरी हुई नजर आती है. प्रजातंत्र पर हमला हो रहा है. संवैधानिक परिपार्टियों को धूमिल किया जा रहा है और चुनाव आयोग मूकदर्शक बना बैठा है.”

उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग का आदेश जिसमें प्रचार पर पहले से पश्चिम बंगाल में रोक लगाया है ये लोकतंत्र में डार्क स्पॉट है. ऐसा लगता है कि मोदी जी की दो रैलियों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नही करना है. लोग आयोग की स्वायत्तता पर सवाल खड़े कर रहे हैं. आयोग का ऑर्डर सिर्फ मोदी जी की रैलियों को फ्री पास देना है?”

सुरजेवाला ने आगे कहा, “कांग्रेस ने मोदी जी और अमित शाह के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन की कई शिकायतें दी, लेकिन आयोग ने कोई कार्रवाई नही की. कई शिकायतों के बावजूद आयोग ने नमो टीवी पर बैन नही लगाया. चुनाव आयोग प्रजातंत्र का चीर हरण होते हुए देख रहा है. चुनाव आयोग का यह फैसला मोदी के लिए गिफ्ट है.”

 

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