कांग्रेस की सरकार बनी तो हटाऊंगा नीति आयोग, क्यों बोले राहुल गांधी?

चुनाव आयोग ने हाल ही में नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार को चिट्ठी लिखकर 2 अप्रैल तक उस बयान पर स्पष्टीकरण देने की मांग की है जिसमें उन्होंने न्यूनतम आय गांरटी योजना की आलोचना की थी.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में देश की सत्ता संभालते ही योजना आयोग का नाम बदल कर नीति आयोग कर दिया था. अब 2019 आते आते नीति आयोग पर विपक्षी दल सवाल उठाने लगे हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नीति आयेाग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए मार्केटिंग प्रेजेंटेशन बनाने और अपने डेटा के जरिए देश को बहकाने का आरोप लगाया है. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि अगर केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी तो वो इसे ख़त्म कर देंगे.

राहुल गांधी ने कहा, ‘अगर उनकी सरकार सत्ता में आती है तो सबसे पहले नीति आयोग को खत्म किया जाएगा.’

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, ‘नीति आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए मार्केटिंग प्रेजेंटेशन बनाने और अपने डेटा के जरिए देश को बहकाने के अलावा कोई काम नहीं किया है. हम इस आयोग को हल्का करेंगे,  जिसमें 100 से कम कर्मचारी होंगे. इस आयोग में अर्थशास्त्री और विशेषज्ञ ही होंगे.’

बता दें कि चुनाव आयोग ने हाल ही में नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार को चिट्ठी लिखकर 2 अप्रैल तक उस बयान पर स्पष्टीकरण देने की मांग की है जिसमें उन्होंने न्यूनतम आय गांरटी योजना की आलोचना की थी.

नीति आयोग उपाध्यक्ष ने मंगलवार को 20 प्रतिशत ग़रीब लोगों को 6000 रुपये की न्यूनतम आय गांरटी योजना देने वाले बयान पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा ‘पार्टी चुनाव जीतने के लिए कुछ भी बोल सकती है और कुछ भी कर सकती है.’

उन्होंने कहा, “यह कांग्रेस का पुराना तरीका है. वे चुनाव जीतने के लिए कुछ भी कह और कर देते हैं. 1966 में गरीबी हटा दी गई थी, वन रैंक वन पेंशन लागू हो गया था, सबको शिक्षा के अधिकार के तहत शिक्षा मिल रही थी! तो आप देखते हैं कि वो कुछ भी बोल और कर सकते हैं.”