पीएम मोदी के इन बयानों से नहीं टूटी चुनाव आचार संहिता, EC ने आठवीं बार दिया क्लीन चिट

धानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को आचार संहिता उल्लंघन के मामलों में लगातार क्लीन चिट दिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई होगी.

नई दिल्ली: आदर्श आचार संहिता (MCC ) उल्लंघन के मामने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनाव आयोग ने आठवीं बार क्लीन चिट दे दिया है… ताज़ा दो मामलों में पीएम मोदी को क्लीन चिट मिला है. दरअसल 23 अप्रैल को गुजरात के सभी 26 लोकसभा सीटों पर वोटिंग डाले गए थे.

पीएम मोदी ने गांधीनगर के रानिप पोलिंग बूथ पर अपना वोट डाला. पीएम खुली जीप में सवार होकर पोलिंग बूथ तक वोट डालने पहुंचे जहां बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने उनका स्वागत किया. कांग्रेस का आरोप है कि पीएम मोदी ने वोट डालने के बाद रोड शो निकाला और राजनीतिक टिप्पणी की जो MCC का उल्लंघन है.

इसके अलावा नौ अप्रैल को कर्नाटक के चित्रदुर्ग में पीएम मोदी द्वारा दिये गये भाषण को लेकर भी कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी. EC ने पीएम मोदी को इस आरोप से भी बरी कर दिया है. दरअसल पीएम मोदी ने कथित रूप से चित्रदुर्ग में चुनावी भाषण के दौरान नये मतदाताओं से अपना वोट बालाकोट हवाई हमले के नायकों को समर्पित करने का आह्वान किया था. महाराष्ट्र के लातूर जिले के औसा में भी उन्होंने एक ऐसी ही अपील की थी.

गुजरात के निर्वाचन कार्यालय का मानना है कि प्रथम दृष्टया कोई उल्लंघन नहीं पाया गया. कांग्रेस यह आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग गयी थी कि मोदी ने वोट डालने के बाद आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए रोड शो निकाला और राजनीतिक टिप्पणी की। पहले चुनाव आयोग मोदी के छह भाषणों, शाह के दो भाषणों और कांग्रेस प्रमुख के एक भाषण को सही ठहरा चुका है.

पीएम मोदी को इससे पहले इन बयानों पर मिल चुका है क्लीन चिट

– प्रधानमंत्री ने एक अप्रैल को वर्धा में एक रैली को संबोधित करते हुए कथित रूप से कहा था, ‘कांग्रेस ने हिंदुओं का अपमान किया और देश के लोगों ने पार्टी को चुनाव में दंडित करने का फैसला किया है. उस पार्टी के नेता अब उन लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ने से डर रहे हैं जहां बहुसंख्यक (हिंदू) जनसंख्या का प्रभुत्व है. इसी कारण से वे ऐसे स्थानों पर शरण लेने के लिए बाध्य हैं जहां बहुसंख्यक अल्पसंख्यक हैं.’ उन्होंने यह टिप्पणी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के केरल के वायनाड से दूसरी सीट के तौर पर चुनाव लड़ने के निर्णय की ओर इशारा करते हुए की थी. राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के अमेठी से भी चुनाव लड़ रहे हैं.

– मोदी ने नौ अप्रैल को महाराष्ट्र के लातूर के औसा में पहली बार मतदान करने वाले लोगों से कहा, ”क्या आपका पहला वोट हवाई हमला करने वालों के लिए हो सकता है?” प्रधानमंत्री ने कहा था, ”मैं पहली बार मतदान करने वालों से कहना चाहता हूं, क्या आपका पहला वोट वीर जवानों को समर्पित हो सकता है जिन्होंने पाकिस्तान में हवाई हमले किए.” माना जाता है कि महाराष्ट्र के स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों ने चुनाव आयोग से कहा था कि मोदी का बयान पहली नजर में उसके आदेश का उल्लंघन करता है जिसमें पार्टियों से प्रचार के दौरान सशस्त्र बलों का इस्तेमाल नहीं करने को कहा गया था.

– 6 अप्रैल को महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक चुनावी भाषण में उन्होंने कांग्रेस को ”डुबता टाइटैनिक ” बताया था. मोदी ने कहा कि जब भी कांग्रेस मुश्किल में होती है तब वह झूठे वादे करती है और गजनी (आमिर खान द्वारा निभाया गया यादाश्त भूल जाने वाला किरदार) बन जाती है. मोदी ने कहा, ”कांग्रेस एक ऐसा टाइटेनिक जहाज है जो डूब रही है.”

– पीएम नरेंद्र मोदी ने 21 अप्रैल को राजस्थान के बाड़मेड़ में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत को पाकिस्तान की परमाणु हथियारों की धमकी का डर नहीं है. उन्होंने कहा, ‘भारत पाकिस्तान की किसी धमकी से नहीं डरता है. मैंने सही किया न? वरना पाकिस्तान हमेशा यही कहता था कि हमारे पास न्यूक्लियर बटन है. हमारे पास क्या नहीं हैं? क्या हमारे पास न्यूक्लियर बटन दिवाली के लिए है.’ . कांग्रेस ने कहा था कि पीएम मोदी ने अपने भाषण में सशस्त्र बलों का जिक्र किया है, जो चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है और ऐसे में उन पर कुछ वक्त के लिए चुनाव प्रचार पर बैन लगाया जाना चाहिए.

– 25 अप्रैल को नरेंद्र मोदी ने वाराणसी की एक रैली में कहा था, ”उन्होंने हमारे 40 जवान मारे हमने बदल में उनके 42 जवानों को मार गिराया.”

– लातूर में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि देश के नए मतदाता वोट देते समय पुलवामा आतंकी हमले के शहीदों और बालाकोट एयर स्ट्राइक को अंजाम देने वाले वीर पायलटों को ध्यान में रखें. चुनाव आयोग ने भाजपा के सबसे बड़े नेता के इस बयान को भी क्लीन चिट दे दी. हालांकि यह स्पष्ट रूप से आयोग के उस निर्देश का उल्लंघन था जिसमें उसने सेना और सैनिकों के चुनावी इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी. वहीं, उस्मानाबाद जिले के चुनाव अधिकारी ने भी अपनी जांच में इस बयान को ‘अनुचित’ पाया था.

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को आचार संहिता उल्लंघन के मामलों में लगातार क्लीन चिट दिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका कांग्रेस सांसद सुष्मिता देब ने दायर की थी.

इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई होगी. निर्वाचन आयोग सुप्रीम कोर्ट के संभावित सवालों को ध्यान में रखते हुए अपना जवाब तैयार कर रहा है.

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