पश्चिम बंगाल में हिंसा के बाद EC सख्त, हटाए गए दो अफसर, 72 घंटे पहले ही थमेगा प्रचार

पश्चिम बंगाल के प्रधान सचिव (गृह) अत्रि भट्टाचार्य और सीआईडी के अतिरिक्त महानिदेशक राजीव कुमार को उनके पदों से हटा दिया गया है.

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार में हो रही हिंसा को लेकर चुनाव आयोग ने एक सख्त फैसला लिया है. आयोग ने बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में गुरुवार रात 10 बजे से चुनाव प्रचार थम जाएगा.

पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी है. आयोग का कहना है कि पश्चिम बंगाल में सभी दलों पर यह रोक का निर्देश लागू होगा. आमतौर पर आचार संहिता के मुताबिक मतदान के 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार पर रोक लग जाती है. लेकिन आयोग ने राज्य में हो रही हिंसा को लेकर 24 घंटे पहले ही रोक लगा दी है.

बंगाल की 9 सीटों पर 19 मई को होना था मतदान

इसी के साथ एक और बड़ा फैसला पश्चिम बंगाल में लिया गया है. पश्चिम बंगाल के प्रधान सचिव (गृह) अत्रि भट्टाचार्य और सीआईडी के अतिरिक्त महानिदेशक राजीव कुमार को उनके पदों से हटा दिया गया है. राजीव कुमार को मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर के साथ अटैच किया गया है. उन्हें कल 10 बजे गृह विभाग को रिपोर्ट करने का भी आदेश दिया है.

पश्चिम बंगाल के 9 संसदीय क्षेत्रों – दुमदम, बारासात, बसीरहाट, जयनगर, मथुरापुर, जादवपुर, डायमंड हार्बर, दक्षिण और उत्तरी कोलकाता में कल रात 10 बजे से चुनाव के समापन तक कोई चुनाव प्रचार नहीं होगा. इन सीटों पर 19 मई को मतदान होना था.

बीजेपी के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष ने टीवी9 भारतवर्ष से बातचीत में इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में हिंसा के कारण चुनाव आयोग ने यह फैसला लिया. यह दुखद है कि सातवें चरण के प्रत्याशियों को प्रचार का एक दिन कम मिलेगा.

शाह की रैली में हिंसा के बाद चुनाव आयोग ने उठाया ये कदम

विद्यासागर की प्रतिमा के साथ की गई बर्बरता पर भी आयोग ने गहरा दुख जताया है. आयोग ने यह उम्मीद जताई है कि राज्य प्रशासन जल्द ही उत्पात मचाने वालों का लगाएगा. आयोग के मुताबिक यह संभवत: पहली बार है जब ईसीआई ने आर्टिकल 324 को इस तरीके से लागू किया है.

मालूम हो कि मंगलवार को कोलकाता में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो में हुए बवाल के एक दिन बाद चुनाव आयोग ने यह फैसला लिया है. अमित शाह के रोड शो में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उन्हें काले झंडे दिखाए थे. जिसके बाद बीजेपी कार्यकर्ता उनसे भिड़ गए. इसके बाद वहां आगजनी और पत्थरबाजी की भी घटना सामने आई. उपद्रवियों ने ईश्वरचंद्र विद्यासागर की प्रतिमा को भी तोड़ दिया था.

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