Exclusive Interview: सांसद होते हुए भी रामपुर में रात गुजारने से डरती थीं जया, आखिर क्यूं?

समाजवादी पार्टी की नेता रहीं जया प्रदा अब भगवा रंग में रंग गयी हैं. बीजेपी ज्वाइन करने के बाद टीवी 9 भारतवर्ष से उन्होंने कई मुद्दों पर खुलकर बातचीत की. पेश हैं इंटरव्यू के मुख्य अंश...


नयी दिल्ली: रुपहले परदे से सियासत की तरफ रुख करने वाली जया प्रदा ने आज उस पार्टी का दामन थाम लिया, जिसके विरोध में कभी वो खड़ी हुआ करती थीं. सपा में ‘लड़के’ की चलने के बाद इनका रहना वहां थोड़ा मुश्किल हो गया था. पढ़िए सियासत और संगत पर उनके बेबाक बोल….

सवाल: BJP में आप क्या उद्देश्य लेकर आई हैं?

जवाब: राजनीति में जब मैंने शुरुआत की थी तो एनटीआर के एक फ़ोन कॉल पर मैंने TDP ज्वाइन की. बाद में चंद्रबाबू के साथ आयी और लंबे समय तक समाजवादी पार्टी के साथ रही. राजनीति में मैं कुछ तय कर नहीं आयी थी. सब कुछ अपने आप होता चला गया. राजनीति की शुरुवात मैंने बड़े नेताओं के साथ की लेकिन अब पहली बार नेशनल पार्टी में काम करने का मौक़ा मिल रहा है. मुझे इस मौक़े पर बेहद गर्व की अनुभूति हो रही है. मैं अब एक ऐसी पार्टी से जुड़ रही हूं, जो महिलाओं का बहुत सम्मान करती है. साथ में मोदीजी के राज में किसी भी देश की हिम्मत नहीं है कि भारत पर बुरी नज़र डाले. मोदी एक मज़बूत नेता हैं.

सवाल: रामपुर से आपका पुराना रिश्ता है. क्या आप 2019 में रामपुर से लोकसभा चुनाव लड़ने जा रही हैं?
जवाब: देखिए ये मुझे तय करने का अधिकार नहीं है. मुझे पार्टी जो भी ज़िम्मेदारी देगी, मैं उसे भलीभाँति निभाऊंगी. पार्टी जो तय करेगी वह मुझे मंज़ूर होगा. मैं मोदीजी से प्रभावित होकर बीजेपी में आई हूं. मोदी ग़रीब मज़दूरों की आवाज हैं.

सवाल: रामपुर को आप याद करती हैं.
जवाब: रामपुर की जनता ने मुझे बहुत प्यार दिया. लेकिन वहां से कुछ कड़वी यादें भी जुड़ी हैं. रामपुर की सांसद होते हुए भी मुझे इतना डर लगता था कि रात में सोने के लिए मैं मुरादाबाद चली जाती थी. तो आप समझ सकते हैं कि वहां मेरे साथ कैसा बर्ताव हुआ. निर्वाचित सांसद होने के बाद भी मेरी हैसियत नहीं थी कि मैं रामपुर में रुक सकूँ. जनता मुझे बेहद याद करती है. समाजवादी पार्टी अब बदल चुकी है. जहां मुलायम सिंह के लिए अब उनकी पार्टी में जगह नहीं है. समाजवादी पार्टी में महिलाओं का सम्मान नहीं होता है. सपा में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं.

सवाल: वो कौन था जिसकी वजह से आप डर के मारे रामपुर में रात नहीं गुज़ार पाती थीं.
जवाब: देखिए मैं उनका नाम नहीं लेना चाहती हूँ. मैं उनका प्रचार नहीं करना चाहती. लोग जानते हैं कि रामपुर का इस वक़्त कौन सा विधायक है. किस पार्टी में है. वह अपनी पार्टी को कितना दबाव में रखता है. रामपुर के लोगों को दबाव में रखता है. मैं उसका नाम नहीं लेना चाहती हूँ. लेकिन मैं उस दौर से बहुत आहत हूँ.

सवाल: अखिलेश यादव की लीडरशिप आप कैसे देखती हैं?
जवाब: शुरू में हम सबने अखिलेश और मुलायम सिंह के साथ काम किया, लेकिन अखिलेश ने रिश्तों को ख़राब किया है. अखिलेश जब अपने पिता के नहीं हुए तो वो किसी के नहीं हैं. मायावती के साथ गठबंधन को करके मुलायम सिंह यादव का सम्मान गिराया है अखिलेश ने.