हिमाचल प्रदेश: मॉक पोल के साथ पड़े असल वोट, पता चला तो डिलीट कर दिया गया EVMs का डेटा

हिमाचल प्रदेश की चार लोकसभा सीटों पर अंतिम चरण के मतदान के दौरान चुनाव अधिकारियों की गंभीर लापरवाही सामने आई है.

नई द‍िल्‍ली: लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में 19 मई को मतदान के दौरान पांच पोलिंग स्‍टेशनों पर अधिकारी मॉल पोल के वोट डिलीट करना ही भूल गए. यह चौंकाने वाला वाला मामला है हिमाचल प्रदेश का. राज्‍य के मुख्‍य निर्वाचन अधिकारी (CEO) देवेश कुमार ने मंगलवार को कहा कि चुनाव आयोग मामले की जांच कर रहा है और गलती करने वाले अधिकारियों को सस्‍पेंड किया जा सकता है. मामले में 5 पीठासीन अधिकारियों और 15 पोलिंग अधिकारियों पर आरोप हैं.

चुनाव आयोग की गाइडलाइंस के मुताबिक, असल वोटिंग से एक घंटा पहले मॉक पोल कराया जाता है. कम से कम 50 टेस्‍ट वोट डाले जाते हैं, ये जांचने के लिए कि इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) ठीक से काम कर रही है या नहीं. पोलिंग एजेंट्स की मौजूदगी में मॉक पोलिंग कराई जाती है, बाद में उन्‍हें नतीजे भी दिखाए जाते हैं.

ऑब्‍जर्वर्स की पकड़ में आई गलती

हिंदुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार, CEO ने कहा कि चुनाव के अंतिम चरण में रविवार को जब वोटिंग हुई तो ये 20 अधिकारी EVMs से टेस्‍ट वोट डिलीट करना भूल गए. यह वोट भी असल वोटों में जुड़ गए. जब अधिकारियों को गलती का पता चला तो हड़बड़ी में उन्‍होंने कुछ वोट डिलीट कर दिए, लेकिन गलती ऑब्‍जर्वर्स की पकड़ में आ चुकी थी.

ये अधिकारी मंडी लोकसभा सीट के चौक, सलवाहन और हरवाहनी गांव, शिमला सीट के कश्‍मीरपुर गांव और हमीरपुर सीट के भागेर में बने पोलिंग बूथों पर तैनात किए गए थे. अंतिम चरण में राज्‍य की शिमला, मंडी, हमीरपुर और कांगड़ा लोकसभा सीट पर वोट डाले गए थे.

ये भी पढ़ें

मध्य प्रदेश में अंताक्षरी खेलकर हो रही है ईवीएम की पहरेदारी, देखें वीडियो

EVM मसले पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी हुए चिंतित, कहा- EC पर है सुरक्षा की जिम्मेदारी