IT रेड पर राजनीति के बीच पढ़िए क्या कहता है चुनाव आयोग का ऑर्डर

निर्वाचन आयोग ने वित्त मंत्रालय को सलाह दी कि चुनाव के दौरान उसकी प्रवर्तन एजेंसियों की कोई भी कार्रवाई “निष्पक्ष” और “भेदभाव रहित” होनी चाहिए तथा ऐसी कार्रवाई की जानकारी चुनाव आयोग के अधिकारियों के संज्ञान में होनी चाहिए.

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में आयकर विभाग की टीम द्वारा मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों के ठिकानों पर चल रही छापेमारी के बीच चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार को निर्देश जारी किया है. निर्देश में केंद्र सरकार से कहा गया है कि चुनाव के दौरान वो जांच एजेंसी का प्रयोग “निष्पक्ष” तरीके से करें.

आयोग ने कहा कि चुनाव के दौरान उसकी प्रवर्तन एजेंसियों की कोई भी कार्रवाई “निष्पक्ष” और “भेदभाव रहित” होनी चाहिए तथा ऐसी कार्रवाई की जानकारी चुनाव आयोग के अधिकारियों के संज्ञान में होनी चाहिए.

चुनाव आयोग ने खत लिखकर निर्देश जारी करते हुए कहा, ‘पिछले कई सालों से पैसे का प्रयोग कर वोटरों को प्रभावित करने का तरीका प्रचलन में रहा है जो निष्पक्ष चुनाव कराने की राह में सबसे बड़ी बाधा है. ऐसे में समझा जा सकता है कि प्रवर्तनजो भी जांच कर रही है वो वित्त मंत्रालय को मिले इनपुट्स के आधार पर किये जा रहे होंगे. आयोग वित्त मंत्रालय को स्पष्ट करना चाहते है कि अगर आचार संहिता के दौरान वह कोई जांच कर रहे हैं या रेड डाल रहे हैं तो वह पूरी तरह से निष्पक्ष और भेदभाव रहित होना चाहिए. इतनी ही नहीं अगर कहीं से ऐसा लगता है कि अवैध पैसे का इस्तेमाल चुनाव के लिए किया जाने वाला था तो इस बारे में चुनाव आयोग को भी जानकारी मिलनी चाहिए क्योंकि अभी आचार संहिता लागू है.

Election Panel Directs Agencies, IT रेड पर राजनीति के बीच पढ़िए क्या कहता है चुनाव आयोग का ऑर्डर

वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय और राजस्व खुफिया निदेशालय राजस्व विभाग की कार्यकारी शाखाएं हैं. आयकर विभाग ने रविवार (7 अप्रैल) को मध्य प्रदेश में छापेमारी की और हाल ही में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु में भी छापेमारी की थी.

आदर्श आचार संहिता के 10 मार्च को लागू होने के बाद आयकर विभाग ने राजनीतिक नेताओं और उनके सहयोगियों पर कई छापे मारे हैं जिसे विपक्ष चुनावी मौसम में केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करार दे रहा है. वित्त मंत्रालय के तहत आने वाली एजेंसियों ने पिछले कुछ समय में 55 छापेमारी की हैं। चुनाव आयोग की यह सलाह उन आरोपों के बीच आई है कि सरकार चुनावी मौसम में विपक्षी पार्टियों को निशाना बनाने के लिए इन एजेंसियों का प्रयोग कर रही है.

मध्य प्रदेश में कमलनाथ के करीबियों पर आयकर विभाग की छापेमारी

बता दें कि लोकसभा चुनाव के करीब होने के बीच रविवार तड़के आयकर विभाग के दलों ने एक साथ भोपाल और इंदौर में एक साथ दबिश दी. दोनों स्थानों पर जिन भी लोगों के यहां छापे मारे गए है, वह मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों में गिने जाते हैं.

इनमें ओएसडी (विशेश ड्यूटी पर तैनात अधिकारी) प्रवीण कक्कड़ का प्रमुख नाम है. इसके अलावा भोपाल में एक गैर सरकारी संगठन अश्विनी शर्मा, कक्कड़ के करीबी प्रतीक जोशी के यहां भी मारे गए छापों में बड़ी मात्रा में नगदी मिलने की बात सामने आई है.

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दिल्ली में भी चल रही छापेमारी

आयकर विभाग की रेड देर रात तक चलती रही. दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित आर के मिगलानी के घर से आयकर विभाग के अधिकारी 2 बैग लेकर देर रात घर से बाहर निकले. आयकर विभाग के कुछ अधिकारी अभी भी आर के मिगलानी के घर के अंदर इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की जांच कर रहे हैं.

आयकर विभाग इससे पहले आरके मिगलानी की गाड़ियों से कुछ दस्तावेज भी बरामद कर चुकी है. दरअसल आयकर विभाग दिल्ली को जानकारी मिली थी कि लोकसभा चुनाव में कलैक्शन का खेल किया जा रहा है और हवाला की राशी इधर से उधर की जा रही है. इसी सूचना के आधार पर आयकर विभाग ने इस छापेमारी को अंजाम दिया है.

कांग्रेस ने राजनीतिक विद्वेष के तहत कार्रवाई का लगाया आरोप

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कांग्रेस की मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा केंद्र सरकार पर राजनीतिक विद्वेष पूर्व कार्रवाई किए जाने का आरोप लगा रही हैं। उन्होंने सरकारी एजेंसियों पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि क्या सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग की नजरों में विपक्ष के लोग ही भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, उन्हें चौकीदार और उनकी चोर मंडली का भ्रष्टाचार नजर नहीं आता।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या येदियुरप्पा की डायरी में भाजपा को दिए गए जिस 1000 करोड़ रुपये का जिक्र था, वह भ्रष्टाचार नहीं था, क्या जेटली और गडकरी को उनके द्वारा दिए गए 150-150 करोड़ रुपये, राजनाथ सिंह को दिए गए 100 करोड़ रुपये भ्रष्टाचार नहीं था, ये कैसा दोहरा मापदंड है.