अमित शाह ने 120 सांसदों के काटे थे टिकट, 100 से ज्यादा सीटों पर BJP को फिर मिली जीत

यूपी की हर लोकसभा सीट पर अमित शाह ने एक प्रकार से मोदी को ही प्रत्‍याशी के तौर उतार दिया. मीडिया में दिए गए विज्ञापनों को भी इसी प्रकार से डिजाइन किया गया, ताकि मोदी का नाम सबसे ऊपर रहे.
अमित शाह, अमित शाह ने 120 सांसदों के काटे थे टिकट, 100 से ज्यादा सीटों पर BJP को फिर मिली जीत

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम के बाद एक बार फिर साबित हो गया कि अमित शाह एक कुशल रणनीतिकार हैं.  2019 लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष शाह ने ऐसे 120 सांसदों के टिकट काटे थे, जिनके प्रति अलग-अलग सर्वे में जनता ने नाराजगी जताई थी. BJP अध्यक्ष अमित शाह का नए चेहरों को मौका देने का निर्णय बड़ा काम का साबित हुआ है. इनमे से अधिकतर ने जीत दर्ज की. इसी तरह से शाह के कई रणनीतियों ने मिलकर BJP की लोकसभा चुनाओं में जीत का स्वरुप लिया.

एक नजर अमित शाह की कारगर रणनीतियों पर- 

  • अमित शाह ने पीएम नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का फायदा उठाते हुए उन्ही के नाम पर चुनाव लड़ने की सफल रणनीति बनाई. BJP के एक सर्वे में मोदी की लोकप्रियत 50% थी, लेकिन बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद ये बढ़कर 72% हो गई थी.
  • अमित शाह ने 120 सांसदों के टिकट काटे थे. इन सांसदों के खिलाफ जनता में असंतोष था. इन सांसदों के जगह उतारे गए 100 से भी ज्यादा प्रत्याशियों की जीत हुई.
  • मोदी की लोकप्रियत चरम पर थी, ऐसे में शाह ने उन्ही के नाम को भुनाने की योजना बनाई. प्रत्याशियों को अधिक महत्व न देते हुए वोट मोदी के नाम पर ही मांगा गया. मोदी की रैलियों में प्रत्याशियों के नाम भी नहीं लिए गए.
  • इसके साथ ही अमित शाह की बूथ लेवल की रणनीति भी बड़ी कारगर साबित हुई. बूथों पर 90 लाख सक्रिय कार्यकर्ताओं के साथ हर बूथ पर 20-20 सदस्य (1.8 करोड़) मौजूद थे. यानि की कुल मिलाकर 2 करोड़ 60 कार्यकर्ताओं की फौज खड़ी थी.  ये सभी पिछले 150 दिनों से सक्रिय थे.
  • दश हर में करीब 161 कॉल सेंटर बनाए गए. इसमें 15, 682 कॉलर भर्ती किए गए.  इन कॉलर्स ने केंद्र और भाजपा शासित राज्यों की सभी योजनाओं से लोगों को अवगत कराया.
अमित शाह, अमित शाह ने 120 सांसदों के काटे थे टिकट, 100 से ज्यादा सीटों पर BJP को फिर मिली जीत
अमित शाह सफल रणनीतिकार.

वो 125 सीटें जहां कभी बीजेपी जीती नहीं

अमित शाह ने 2019 लोकसभा चुनाव के लिए खास रणनीति तैयार की थी, जिसके मुताबिक, बीजेपी ने ऐसी 125 लोकसभा सीटों पर सबसे ज्‍यादा फोकस किया, जहां दूर-दूर तक बीजेपी के चुनाव जीतने की संभावना नहीं थी. इनमें ज्‍यादातर सीटें पश्चिम बंगाल, केरल, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, नॉर्थ-ईस्‍ट और तेलंगाना की हैं. इन 125 सीटों को ध्‍यान में रखते हुए पीएम मोदी की 100 रैलियां प्‍लान की गईं. इसके पीछे वजह यह थी कि 2014 में बीजेपी को ज्‍यादातर सीटें उत्‍तर भारत में मिली थीं. यही कारण रहा कि बीजेपी ने उन राज्‍यों पर ज्‍यादा फोकस किया, जहां उसे पहले बेहद कमजोर माना जाता था.

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पीएम मोदी ने जन-जन तक पहुंचाया संदेश

सबसे पहले केरल की बात करते हैं, यहां काफी समय से सीपीआई-एम और आरएसएस के बीच सड़कों पर जंग छिड़ी, लेकिन बीजेपी चुनावी सफलता नहीं प्राप्‍त नहीं कर सकी. इसी प्रकार से पश्चिम बंगाल के भी हालात रहे, लेकिन पीएम मोदी ने दोनों राज्‍यों में जिस प्रकार से जनता को संबोधित किया और अपनी बात को रखा, उससे लोगों तक बीजेपी का संदेश एकदम स्‍पष्‍ट गया.

ओडिशा में यूं दी पटनायक को मात

इसी प्रकार से ओडिशा में बीजेपी ने संभावनाओं को तलाशा. शायद उन्‍हें इसके लिए अपने तीन मुख्‍यमंत्रियों से प्रेरणा मिली होगी, जिन्‍होंने मध्‍य प्रदेश, छत्‍तीसगढ़ और राजस्‍थान में सत्‍ता गंवाई. रमन सिंह और शिवराज तीन-तीन बार सीएम रहे, लेकिन वे 2018 में हारे. ठीक इसी प्रकार से ओडिशा में नवीन पटनायक बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन बीजेपी ने उन्‍हें कम से कम लोकसभा चुनाव में पटखनी देने में सफलता पाई है.

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ममता बनर्जी पर नहीं किए निजी हमले

पीएम मोदी ने 24 दिनों के भीतर 4 बार ओडिशा में रैली कीं, जिसकी वजह से पार्टी का संगठन भी वहां सक्रिय रहा और ओडिशा की जनता को लोकसभा-विधानसभा चुनाव के बीच फर्क समझाने में कामयाब रहा. इसी प्रकार से पश्चिम बंगाल में हिंदुत्‍व के मुद्दे पर बार-बार बीजेपी ने चर्चा की और लगातार पीएम मोदी ने ममता बनर्जी की तानाशाही और हिंदू विरोधी नीतियों को जनता के सामने पेश किया. अमित शाह और नरेंद्र मोदी ने बार-बार ममता बनर्जी पर हमले किए, लेकिन हमले निजी न हों, इसका पूरा ध्‍यान रखा.

यूपी की सबसे कड़ी चुनौती से यूं पाई पार

इसी प्रकार से सबसे कठिन चुनौती के तौर पर उभरे उत्‍तर प्रदेश के लिए भी अमित शाह ने रणनीति तैयार की, जो कामयाब भी रही. यूपी में 2014 लोकसभा चुनाव में एनडीए ने 73 सीटें जीती थीं, इस किले को बचाना अमित शाह की सबसे बड़ी चुनौती थी.

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गठबंधन का अचूक समझा जा रहा हथियार हुआ फेल

यूपी में सपा-बसपा-आरएलडी के गठजोड़ को ब्रैंड मोदी के खिलाफ अचूक हथियार माना जा रहा था, लेकिन यह भी फेल हो गया. यूपी के लिए अमित शाह ने जो रणनीति तैयार की, उसके तहत सभी उम्‍मीदवारों को स्‍पष्‍ट निर्देश दिए गए कि मोदी, राष्ट्रवाद, आतंकवाद, केंद्र की योजनाओं- स्वच्छ भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि को फोकस में रखा. इन सब मुद्दों से इतर अमित शाह ने यूपी की हर सीट पर प्रत्‍याशी के प्रचार से ज्‍यादा ब्रैंड मोदी पर फोकस किया. मतलब उम्‍मीदवारों के भाषण, अन्‍य नेताओं की रैलियों को इस तरह प्‍लान किया कि बात मोदी के इर्द-गिर्द ही रहे.

हर सीट पर मोदी को प्रत्‍याशी बनाया

यूपी की हर लोकसभा सीट पर अमित शाह ने एक प्रकार से मोदी को ही प्रत्‍याशी के तौर उतार दिया. मीडिया में दिए गए विज्ञापनों को भी इसी प्रकार से डिजाइन किया गया, ताकि मोदी का नाम सबसे ऊपर रहे.

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