देश को तोड़ने की कोशिश कर रहे आजम खान, जया बोलीं- लेना चाहते हैं बलि

आजम खान साहब जनता का सैलाब देखकर बौखला गए हैं. वो कुछ भी बोल सकते हैं. वो नेताजी को, आदरणीय मोदी जी को और जया प्रदा को भी गाली देते हैं. बौखलाहट में वो किसी को भी गाली देते हैं.

उत्तरप्रदेश के रामपुर लोकसभा सीट पर राजनीतिक मुक़ाबला बेहद दिलचस्प हो गया है. यहां से बीजेपी प्रत्याशी जया प्रदा ने गठबंधन प्रत्याशी आजम खान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वो उनकी भी बलि दे सकते हैं. जया प्रदा ने कहा कि ‘मुझे समझ नहीं आ रहा कि वो देश के नेताओं की बलि देना चाहते हैं या मेरी.’

जया प्रदा ने आगे कहा, ‘आजम खान साहब जनता का सैलाब देखकर बौखला गए हैं. वो कुछ भी बोल सकते हैं. वो नेताजी को, आदरणीय मोदी जी को और जया प्रदा को भी गाली देते हैं. बौखलाहट में वो किसी को भी गाली देते हैं. वो मायावती को भी गाली देते हैं जबकि उत्तर प्रदेश में उन्हीं के साथ मिलकर गठबंधन में चुनाव लड़ रहे हैं.’

वहीं आज़म ख़ान के बजरंगअली वाले बयान पर जया ने कहा, ‘वो हमेशा देश को तोड़ने की कोशिश करते हैं. यह देश का बंटवारा करने की कोशिश करते हैं.’

बीते दिनों उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरठ में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर बसपा-सपा और कांग्रेस को ‘अली’ पर विश्वास है तो हमें भी बजरंगबली पर विश्वास है.

जिसके बाद आजम खान ने रामपुर में योगी आदित्यनाथ के बयान पर पलटवार करते हुए कहा, ‘अली और बजरंग बली में झगड़ा मत करवाओ. मैं इसके लिए एक नाम दिए देता हूं. बजरंग अली से मेरा दीन कमजोर नहीं होता. योगी जी ने कहा कि हनुमान जी दलित थे और फिर उनके किसी साथी ने कहा कि हनुमान जी ठाकुर थे. फिर पता चला कि वह ठाकुर नहीं जाट थे. फिर किसी ने कहा कि वह हिंदुस्तान के नहीं श्रीलंका के थे लेकिन बाद में एक मुसलमान ने कहा कि बजरंगबली मुसलमान थे. झगड़ा ही खत्म हो गया. हम अली और बजरंग एक हैं. बजरंग अली तोड़ दो दुश्मन की नली. बजरंग अली ले लो जालिमों की बलि.’

बता दें कि जया प्रदा समाजवादी पार्टी (सपा) की पूर्व नेता रह चुकी हैं और 26 मार्च को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हुई हैं. जया प्रदा रामपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं, उन्होंने 2009 और 2014 चुनाव में रामपुर का प्रतिनिधित्व किया था. दोनो बार उन्होंने रामपुर से कांग्रेस की नूर बानो को शिकस्त दी थी.

उन्होंने 1994 में तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) में शामिल होकर राजनीति में प्रवेश किया था. बाद में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गई थीं लेकिन पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से 2010 में उन्हें निष्कासित कर दिया गया था.