लालू यादव से मुलाकात पर लगी पाबंदी, जेल अधीक्षक ने चस्पा की नोटिस

लालू इस वक्त रिम्स के पेइंग वार्ड में इलाजरत हैं. जदयू ने लालू पर आरोप लगाते हुए कहा है कि वो जेल से राजद उम्मीदवारों के लिए टिकट भी बांट रहे हैं .

पटना: तीन दशक बाद ऐसा हो रहा है जब बिहार की राजनीति के पुरोधा कहे जाने वाले लालू प्रसाद यादव चुनाव प्रचार से दूर हैं. जनता दल यूनाईटेड (जदयू) ने आरोप लगाया है कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव जेल से अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के टिकट बांट रहे हैं. उनके शिकायत के बाद होटवार जेल अधीक्षक के आदेश से नोटिस लगाया गया है. नोटिस में कानून व्यवस्था का हवाला देकर मुलाकात पर पाबंदी लगाई गई है.

सजा काट रहे लालू प्रसाद यादव से मुलाकात करने के लिए शनिवार का दिन तय किया गया है. लालू इस वक्त रिम्स के पेइंग वार्ड में इलाजरत हैं. जदयू ने लालू पर आरोप लगाते हुए कहा है कि वो जेल से राजद उम्मीदवारों के लिए टिकट भी बांट रहे हैं और उनके आधिकारिक ट्विटर हैंडल से कोई और ट्वीट भी कर रहा है. इस मामले की शिकायत चुनाव आयोग की और राजद के सभी उम्मीदवारों का नामांकन रद्द करने की मांग की है.

जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की है. कुमार ने आयोग को लिखे पत्र में कहा गया है कि लालू जेल में रहते हुए लोकसभा चुनाव में अपने हस्ताक्षर से ही टिकट बांटा. तो क्या इसके लिए अदालत से इजाजत ली गई थी?

जदयू ने लिखा कि लालू चारा घोटाला मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत सजायाफ्ता होकर रांची के होटवार जेल में बंद हैं. वे एक क्रिमिनल केस में दोषसिद्ध अपराधी हैं, न कि किसी जन आंदोलन के नेता हैं. फिलहाल स्वास्थ्य कारणों से रिम्स, रांची के पेइंग वार्ड में इलाज करा रहे हैं.

जेल मैनुअल में स्पष्ट है कि लालू को केवल परिजन से मिलना है. वह भी सप्ताह में एक दिन सिर्फ शनिवार को. इसके लिए पहले से इजाजत लेनी पड़ती है. नीरज ने कहा कि लालू ने अपने हस्ताक्षर से टिकट बांटे हैं. अगर अदालत से इजाजत नहीं ली गई तो लालू ने जो टिकट बांटे हैं उन उम्मीदवारों के नामांकन को अवैध घोषित किया जाना चाहिए.

कानूनी मामलों के जानकार के मुताबिक, जेल अधीक्षक की स्वीकृति के बिना कोई भी सजायाफ्ता कैदी, जेल से किसी तरह की सामग्री बाहर नहीं भेज सकता. जेल में रहते हुए अध्यक्ष की हैसियत से अगर वे अपने हस्ताक्षर से पार्टी उम्मीदवारों के लिए जेल अधीक्षक की स्वीकृति के बिना चुनाव चिह्न आवंटित कर रहे हैं, तो उसे वैध नहीं माना जाएगा.”

हालांकि, अगर लालू जेल अधीक्षक की स्वीकृति के साथ चुनाव चिह्न का आवंटन करते हैं, तो उसे अवैध नहीं माना जाएगा. जनप्रतिनिधित्व कानून में चुनाव चिह्न आवंटित करने पर रोक नहीं है। चूंकि लालू अभी जेल में सजायाफ्ता कैदी हैं, इसलिए उन पर जेल मैनुअल के नियम लागू होंगे.

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