90 करोड़ वोटर, 10 लाख पोलिंग बूथ; जानें 2019 चुनाव का पूरा खर्च

साल 2017 में जब चीन की सेना डोकलाम की तरफ आगे बढ़ रही थी उस समय गतिरोध को रोकने के लिए भारत ने अपने 60,000 सैनिकों को चीन-भारत-भूटान ट्राइ जंक्शन पर भेजा था.

लोकतंत्र के सबसे बड़े महापर्व 17वीं लोकसभा चुनाव में लोग बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं. गुरुवार को पहले चरण में 20 राज्यों की 91 सीटों पर सुबह 7 बजे से वोट डाले जा रहे हैं. हालांकि इसकी तैयारी में चुनाव आयोग को काफी मशक्कत करनी होती है.

साल 2017 में जब चीन की सेना डोकलाम की तरफ आगे बढ़ रही थी उस समय गतिरोध को रोकने के लिए भारत ने अपने 60,000 सैनिकों को चीन-भारत-भूटान ट्राइ जंक्शन पर भेजा था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में 11 मई से 19 मई के बीच चुनाव संपन्न कराने में कितना खर्च और तैयरियां की गई है.

–  2.5 लाख़ से अधिक सुरक्षाकर्मियों को मतदान की निगरानी और सुरक्षा-व्यवस्था बनाए रखने की ज़िम्मेदारी दी गई है.

–  इन सभी सुरक्षाकर्मियों को लाने-ले-जाने के लिए 25 हेलीकॉप्टर और 500 से अधिक रेल गाड़ियों का प्रयोग किया गया है.

–  इसके अलावा सड़क मार्ग से सुरक्षाकर्मियों को ले जाने के लिए 17,500 से अधिक गाड़ियां किराये पर ली गई है.

–  दूर-दराज और पहाड़ी इलाक़ों में मतदान की प्रक्रिया पूरी करवाने के लिए कई सौ घोड़े और खच्चर का भी प्रयोग किया गया है.

–  समुद्री इलाक़ों तक पहुंचने के लिए जहाज़ और बोट का इस्तेमाल किया गया है.

–  इन सब में 200 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं.

लोकसभा चुनाव 11 अप्रैल से 19 मई तक, मतगणना 23 मई को 

बता दें कि 11 अप्रैल से 19 मई तक सात चरणों में 17वीं लोकसभा चुनाव होगा और मतों की गिनती 23 मई को होगी.

मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने 10 मार्च-2019 को बताया कि 91 सीटों के लिए (20 राज्यों में) मतदान 11 अप्रैल को, 97 सीटों के लिए (13 राज्य) मतदान 18 अप्रैल को, 115 (14) के लिए 23 अप्रैल को, 51 (सात) के लिए छह मई को, 59 (सात) के लिए मतदान 12 मई को और 59 सीटों (आठ राज्य) के लिए मतदान 19 मई को होगा.

इस चुनाव में मतदाताओं की संख्या लगभग 90 करोड़ होगी, जो 2014 के 81.45 करोड़ से अधिक है.

इसमें से कोई 1.50 करोड़ पहली बार मतदाता बने हैं, जिनकी उम्र 18-19 साल है.

अरोड़ा ने कहा कि चुनाव के लिए लगभग 10 लाख मतदान केंद्र होंगे, जो 2014 से एक लाख अधिक है. चुनाव के लिए सभी मतदान केंद्रों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के साथ कुल 17.4 लाख वीवीपैट इस्तेमाल किए जाएंगे.