राष्‍ट्रवाद और सिद्धांतों का जिक्र कर ब्‍लॉग में आडवाणी ने दिए तीन बड़े संदेश

ब्‍लॉग में एलके आडवाणी ने अपना टिकट काटे जाने पर सीधे तो कुछ नहीं कहा, लेकिन इशारों-इशारों में तीन अहम बातें ऐसी कह गए, जिनसे लगता है कि वह पार्टी की नीति से खुश नहीं हैं.

नई दिल्‍ली: बीजेपी के दिग्गज नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने 6 अप्रैल को पार्टी के फाउंडेशन डे से दो दिन पहले ब्लॉग लिखकर गांधीनगर की जनता के प्रति आभार जताया है.

आडवाणी इस सीट से 6 बार सांसद रहे, लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव के लिए जारी की गई बीजेपी उम्‍मीदवारों की सूची में उनका नाम नहीं है. इस बार आडवाणी की जगह पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह को गांधीनगर सीट से उम्‍मीदवार बनाया गया है. हालांकि, इस ब्‍लॉग में आडवाणी ने खुद का टिकट काटे जाने पर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन इशारों-इशारों में तीन अहम बातें ऐसी कह गए, जिनसे लगता है कि वह पार्टी की नीति से खुश नहीं हैं.

पहली- आडवाणी दो बार बताते हैं- मैं बीजेपी का फाउंडर रहा हूं (संकेत स्‍पष्‍ट है, वे किसे बता रहे हैं)

दूसरी- राष्‍ट्रवाद का जिक्र करते हुए आडवाणी लिखते हैं- शुरुआत से बीजेपी ने विरोधियों को कभी एंटी नेशनल नहीं कहा

तीसरी- टिकट काटे जाने के बाद पहली बार आडवाणी ने गांधीनगर के वोटरों का धन्‍यवाद कर 6 बार सांसद बनाने के लिए शुक्रिया कहा. उन्‍होंने स्‍पष्‍ट इशारा किया कि अब मेरी पारी समाप्‍त, धन्‍यवाद

lk advani's blog analysis, राष्‍ट्रवाद और सिद्धांतों का जिक्र कर ब्‍लॉग में आडवाणी ने दिए तीन बड़े संदेश

आडवाणी ने पार्टी के फाउंडेशन डे को लेकर लिखे इस ब्‍लॉग लिखा- ‘देश सबसे पहले, उसके बाद पार्टी और अंत में मैं.’ उन्‍होंने लिखा कि यह महत्वपूर्ण अवसर है कि हम पीछे देखें, आगे देखें और भीतर देखें.

आडवाणी आगे लिखते हैं- ‘बीजेपी का संस्‍थापक सदस्‍य होने के नाते, यह मेरा कर्तव्‍य है कि मैं भारत के लोगों के साथ अपने चिंतन को साझा करूं और खासतौर से मेरी पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं के साथ, दोनों ने मुझे स्नेह और सम्मान से नवाजा है.’

आडवाणी ने लिखा- ‘अपने विचार साझा करने से पहले, मैं गांधीनगर के लोगों का आभार व्‍यक्‍त करता हूं, जिन्होंने 1991 के बाद छह बार मुझे लोकसभा के लिए चुना. उनके प्यार और समर्थन ने मुझे हमेशा अभिभूत किया है.’

वह आगे लिखते हैं- ‘मातृभूमि की सेवा करना मेरा जुनून और मेरा मिशन है, जबसे मैंने 14 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ज्वाइन किया है. मेरा राजनीतिक जीवन सात दशकों से मेरी पार्टी के साथ अटूट रहा है- पहले भारतीय जनसंघ के साथ और बाद में भारतीय जनता पार्टी और मैं दोनों का फाउंडर मेंबर रहा.’

आडवाणी ने ब्‍लॉग में पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी से नेताओं के साथ काम करने को खुद का दुर्लभ सौभाग्य बताया.

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उन्‍होंने अपने जीवन के सिद्धांतों का जिक्र करते हुए लिखा, ‘मेरे जीवन का मार्गदर्शक सिद्धांत- Party नेशन फर्स्ट, पार्टी नेक्स्ट, सेल्फ लास्ट है. सभी परिस्थितियों में, मैंने इस सिद्धांत का पालन करने की कोशिश की है और आगे भी करता रहूंगा.’

ब्‍लॉग में आडवाणी ने मौजूदा दौर में राष्‍ट्रवाद को लेकर चल रही जोरदार बहस पर भी अपने विचारों के जरिए कटाक्ष किया है. साथ अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता पर भी अपने विचार रखे.

वह लिखते हैं- ‘भारतीय लोकतंत्र का सार विविधता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान है. शुरुआत से ही बीजेपी ने वैचारिक विरोधियों को कभी दुश्‍मन नहीं माना. इसी प्रकार से राजनीतिक तौर पर हमसे अलग असहमत होने वालों को भी हमने कभी एंटी-नेशनल नहीं कहा.’

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