पहले फेज में आई EVM में गड़बड़ी की खबरें, जानिए कैसे ऑपरेट होती है ये मशीन

11 अप्रैल को पहले चरण के लिए वोट डाले गए. इस दौरान आंध्र प्रदेश,जम्मू कश्मीर समेत और भी राज्यों से ईवीएम गड़बड़ी की खबरें आई. वहीं आंध्र प्रदेश के गुंटूर में जनसेना के विधायक मधूसूदन गुप्ता ईवीएम ही तोड़ डाली. जानिए कैसे काम करती है ईवीएम और वीवीपैट.
ईवीएम, पहले फेज में आई EVM में गड़बड़ी की खबरें, जानिए कैसे ऑपरेट होती है ये मशीन

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 के पहले चरण के मतदान गुरुवार को संपन्न हुए. छिटपुट हिंसा की खबरों को छोड़ दें तो बाकी चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से हुआ. कई जगहों पर बीजेपी विरोधी दलों के कार्यकर्ताओं, नेताओं ने (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) पर सवाल उठाए.

1- आंध्र प्रदेश के गुंटूर में जनसेना के विधायक मधूसूदन गुप्ता ईवीएम में खराबी से इस हद तक खफा हुए कि उन्होंने ईवीएम को फर्श पर पटक दिया. उन्होंने कहा कि अगर ईवीएम में आई खामी दूर नहीं की गई तो वो सभी ईवीएम को तोड़ देंगे.

2- आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने चुनाव आयोग से अपील की है जिन बूथों पर सुबह 9 बजकर 30 मिनट तक ईवीएम की खराबी की वजह से वोटिंग शुरू नहीं हुई, वहां फिर से चुनाव कराए जाएं. चंद्रबाबू नायडू का कहना है कि राज्य की 157 केंद्रों पर ईवीएम खराब है. तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी) का दावा है कि ईवीएम खराब होने के बाद कई वोटर निराश होकर लौट गए.

पहले भी ईवीएम पर विपक्षी दल निशाना साधते रहे हैं. आज जब पहले चरण के लिए वोट डाले जा रहे थे तो नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर के पुंछ में एक ईवीएम (EVM) में कांग्रेस (Congress) का बटन काम नहीं कर रहा. उमर अब्दुल्ला ने यह दावा ट्वीट करके किया है. यूपी में भी कई जगहों पर ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं.

आइए जानते हैं कि आखिरकार कैसे काम करती हैं ईवीएम
दरअसल ईवीएम में एक कंट्रोल यूनिट, एक बैलट यूनिट और 5 मीटर की केबल होती है. मशीन बैटरी से चलती है. इसकी कंट्रोल यूनिट मतदान अधिकारी के पास होती है जबकि बैलेट यूनिट का प्रयोग मतदाता करते हैं. जब तक मतदान अधिकारी कंट्रोल यूनिट से बैलेट का बटन प्रेस नहीं करेगा, बैलेट यूनिट से वोट डाल पाना नामुमकिन है. बैलेट यूनिट से एक बार वोट डाले जाने के बाद लोग चाहें जितने भी बटन दबाएं, कोई फर्क नहीं पड़ता. मतदाता को अपनी पसंद के कैंडिडेट के नाम के आगे दिया बटन दबाना होता है और एक वोट लेते ही मशीन लॉक हो जाती है. इसके बाद सिर्फ नए बैलट नंबर से ही खुलती है. बैलेट यूनिट तब तक बेकार है जब तब मतदान अधिकारी उसके लिए स्वीकृति न दें.

क्या है VVPAT मशीनें
वोटर वैरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) या वैरिफायबल पेपर रिकॉर्ड (VPR) मशीन बैलेट मशीन से अटैच होती हैं. वोटर्स जब वोट डालते हैं तो इससे एक पर्ची निकलती है, जिसमें किसे वोट गया ये दर्ज होता है. वोट डालते ही मतदाता को इस मशीन में लगी एक स्क्रीन में देखकर ये पता चल जाता है कि उसका वोट उसे ही गया, जिसे वो डालना चाहता था. काउंटिंग के वक़्त यदि कोई शंका होती है तो पर्चियां गिनकर ईवीएम के रिजल्ट्स से मिलान कर उसे दूर कर दिया जाता है.

इन सबके बावजूद यदि किसी व्यक्ति के पास ऐसी तकनीक है, जिससे एक एंटीना और ट्रांसिवर सर्किट का उपयोग करके लाखों ईवीएम को हैक किया जा सके, फिर इस तकनीक का किसी को पता भी न चले और खुद ही ईवीएम से कनेक्ट भी हो जाए, तो उसे फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार दिया जाना चाहिए.

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