कन्हैया कुमार ने माना, अफ़जल गुरु था आतंकी, देखें Exclusive Interview

प्रत्याशी के चुनाव-प्रचार में बाधा पहुंचाना आचार संहिता का उल्लंघन है. हम किसी के घर पर जाकर मारपीट नहीं कर रहे हैं हम सिर्फ अपना चुनाव-प्रचार कर रहे हैं.
Kanhaiya Kumar full interview, कन्हैया कुमार ने माना, अफ़जल गुरु था आतंकी, देखें Exclusive Interview

बेगूसराय: जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और वामपंथी दलों के साझा उम्मीदवार कन्हैया कुमार बेगूसराय लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. जेएनयू से पीएचडी की डिग्री हासिल कर चुके 32 वर्षीय कन्हैया कुमार का गृहजिले बेगूसराय में मुख्य मुकाबला बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से है. आरजेडी (राष्ट्रीय जनता दल) ने यहां तनवीर हसन को फिर अपना उम्मीदवार बनाया है. कन्हैया ने कहा है कि उनकी लड़ाई सिर्फ बीजेपी से है. महागठबंधन के साथ सीटों की साझेदारी की बात न बन पाने पर वामदलों ने अपना साझा उम्मीदवार उतारने का फैसला लिया. TV9 भारतवर्ष संवाददाता गौरव अग्रवाल ने कन्हैया कुमार से बातचीत की, पढ़िए उनके अंश…

सवाल: कैसा चल रहा है कैंपेन?
जवाब: कैंपेन अच्छा चल रहा है. लोगों का बहुत सारा प्यार मिल रहा है. लोग काफी उत्साहित हैं. उनको कुछ चीज़ें अच्छी लग रही हैं. पहला तो ये कि वो महसूस कर रहे हैं कि बहुत सारे लोग बाहर पढ़ने के लिए बाहर जाते हैं. अच्छी जगहों पर हैं लेकिन बहुत कम ही लोग ऐसे हैं जो वापस आकर यहां पर काम करने की चाहते रखते हैं, हालांकि कुछ लोग ऐसा करते भी हैं. ये बात भी लोगों को अच्छी लग रही है.

दूसरी बात चुनाव के दौरान बेगूसराय मिनी इंडिया जैसा प्रतीत हो रहा है. देश के हर कोने से लोग यहां पहुंचे हैं और गली-मोहल्ले में घूम रहे हैं लोगों से बात कर रहे हैं. जिससे यहां के लोगों को काफी गर्व हो रहा है कि बेगूसराय को एक बार फिर से पहचान मिली है भारत के नक्शे पर.

तीसरी बात जो वोटरों को बहुत अच्छी लग रही है कि इस बार बेगूसराय में चुनाव हिंदू-मुस्लिम या पाकिस्तान के मुद्दे पर नहीं हो रहा है. इस बार के चुनाव में बेगूसराय के मुद्दों पर बात हो रही है.

सवाल: क्या मुद्दे हैं बेगूसराय के?
जवाब: बेगूसराय में उद्योग नहीं है और सरकारी स्कूलों की हालत अच्छी नहीं है. अस्पताल में सुविधा उच्चस्तरीय नहीं है. लोगों को सभी चीज़ों के लिए निजी व्यवस्था पर आश्रित होना पड़ रहा है. बेगूसराय ग्रामीण इलाक़ों में सड़क व्यवस्था अच्छी नहीं है. यहां के किसानों की समस्या.

सवाल: आप भले ही कहें कि मुद्दे पर चुनाव लड़ा जा रहा है लेकिन सच्चाई यही है कि न केवल बेगूसराय बल्कि पूरे देश में चुनावी मुद्दा हिंदुस्तान-पाकिस्तान, आतंकवाद, साध्वी प्रज्ञा, राष्ट्रवाद और अली- बजरंगबली जैसे मुद्दे ज़्यादा हावी हैं.
जवाब: दरअसल बीजेपी का वोकलतंत्र ज़्यादा मज़बूत है. बीजेपी का कैंपेनर चाय दुकान पर भी ज़ोर से बोलता है क्योंकि ये सत्ता का गुरुर है सत्ता का नशा है. ये सत्ता का दबदबा है कि वो तेज़ आवाज़ में बोलते हैं. हालांकि इन सब के बीच एक सच यह भी है कि लोग स्कूल जैसे बुनियादी सुविधाओं की भी बात कर रहे हैं.

सवाल: आपको अगर काले झंडे दिखाए जाते हैं तो आपके समर्थ उनके साथ मारपीट करते हैं, इस तरह के कुछ आरोप भी अब आप पर लग रहे हैं. रविवार को एक ऐसा ही मारपीट वाला वीडियो वायरल हुआ है.
जवाब: यह एक साज़िश के तहत किया जा रहा है और इस चुनावी माहोल में हिंसा का वातावरण तैयार किया जा रहा है. इनके पास तंत्र है इनके पास पैसा है. इसके बावजूद जब वो लोगों के बीचे मेरे लिए अपार जनसमर्थन देखते हैं तो उन्हें अपना वोटबैंक खिसकता हुआ नज़र आता है और इसी हताशा में वो इस तरह के कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है. जिससे लोगों के बीच यह संदेश जाए कि आम लोग ही कन्हैया का विरोध कर रहे हैं.

सवाल: मगर विरोध करने पर मारपीट करना कहां तक जायज़ है?
जवाब: हम किसी के साथ मारपीट क्यों करेंगे. हम किसी के घर पर जाकर मारपीट नहीं कर रहे हैं हम सिर्फ अपना चुनाव-प्रचार कर रहे हैं. ये तो आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है कि आप किसी को चुनाव प्रचार करने से रोक रहे हैं. प्रत्याशी के चुनाव-प्रचार में बाधा पहुंचाना आचार संहिता का उल्लंघन है.

सवाल: कन्हैया कुमार, गिरिराज सिंह और तनवीर हसन के बीच मुक़ाबला काफी टक्कर का माना जा रहा है. आप अपना मुक़ाबला किससे मानते हैं?
जवाब: मुझे नहीं लगता कि गिरिराज सिंह ख़ुद को प्रत्याशी भी मान रहे हैं. नॉमिनेशन के दिन स्टेज पर जो पोस्टर लगा था उसमें उनका चेहरा ही नहीं था. एक टीवी इंटरव्यू के दौरान उनसे पूछा कि आप चुनाव लड़ रहे हैं आपको लोग बाहरी बता रहे हैं. इसके जवाब में उन्होंने ख़ुद ही कहा कि एक ही चेहरा है पीएम मोदी. सभी 543 सीटों पर नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ रहे हैं. वो ख़ुद ही अपने आपको प्रत्याशी नहीं मान रहे हैं.

बातचीत के बीच में ही कन्हैया कुछ समर्थकों को अभिवादन करने लगते हैं. गाड़ी की खिड़की खुलती है और कन्हैया से शिकायत के अंदाज़ में एक महिला कहती हैं- हमारे परिवार के बीस लोगों का नाम वोटर लिस् से ग़ायब है ऐसे में वोट कैसे देंगे. कन्हैया भरोसा दिलाते हुए कहते हैं कि में बात कर के आपको बताता हूं. इतने में एक अन्य समर्थक कहती हैं नाम होगा तभी तो वोट करेंगे. कन्हैया कुमार को जिताना है. कन्हैया मुस्कुराते हुए कहते हैं आशीर्वाद दीजिए. उसके बाद गाड़ी के बाहर समर्थकों के बीच इंकलाब ज़िदाबाद के नारे लगने लगे.

सवाल: क्या पीएम मोदी की लोकप्रियता आपके आड़े आ रही है?
जवाब: लोकप्रियता अपनी जगह है लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि संवैधानिक प्रक्रिया को ही पूरी तरह से नजरअंदाज़ कर दिया जाए.

बता दें कि बेगूसराय में चौथे चरण में 29 अप्रैल को मतदान होना है और परिणाम 23 मई को आना है.

कन्हैया कुमार से बातचीत की मुख्य बातें-

–  बीजेपी जानबूझकर मुद्दों की बात नहीं करती.

–  साध्वी प्रज्ञा भी बीजेपी की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं.

–  बीजेपी एक साथ सॉफ्ट और हार्ड प्रवृत्ति के लोगों को लेकर चलती रही है- जैसे अटल-आडवाणी, मोदी-योगी और अब प्रज्ञा ठाकुर को सामने ला रहे हैं.

–  यह इनका राजनीतिक एजेंडा है बीजेपी अपने एजेंडे पर देश को लाना चाहती है.

–  बीजेपी ऐसा शासन चाहती है जिसमें एक ही आदमी का शासन हो.

–  जिनको संविधान पर भरोसा होगा वह साध्वी प्रज्ञा और साक्षी महाराज जैसा बयान नहीं देंगे.

–  बीजेपी के लोग गोडसे को अपना हीरो मानते हैं.

–  देशद्रोह के मामले में अभी तक कोर्ट ने आरोप को स्वीकार नहीं किया है.

–  अफ़जल गुरु की बरसी हम क्यों मनाएंगे. अफजल गुरु की बरसी के मुद्दे को तिल का ताड़ बनाया गया.

–  हमें अच्छी शिक्षा मिलने का हक़ है, योग्यता के हिसाब से जॉब मिलनी चाहिए.

–  डेमोक्रेसी क्रिकेट टीम नहीं होती, चेहरे की वजह से देश के लोगों की बात को नजरअंदाज कर दिया गया.

–  मैं राहुल गांधी या पीएम मोदी के बारे में नहीं सोचता, राहुल गांधी की नागरिकता का मुद्दा भी एजेंडे के तहत लाया गया है ताकि लोगों को मुद्दे से हटाया जा सके.

–  जेएनयू में कोई ऐसी घटना नहीं घटी जिसको लेकर दुष्प्रचार किया गया.

–  जेएनयू के स्टूडेंट ने देश के खिलाफ नारेबाजी नहीं की है, बाहरी लोगों ने आपत्तिजनक बातें बोली.

–  मैं अफजल गुरु को आतंकवादी ही मानता हूं.

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