narendra modi BJP Shivsena uddhav thackeray loksabha elections 2019, लोकसभा चुनाव 2019: बहुत कठिन है डगर ‘बीजेपी-शिवसेना’ की
narendra modi BJP Shivsena uddhav thackeray loksabha elections 2019, लोकसभा चुनाव 2019: बहुत कठिन है डगर ‘बीजेपी-शिवसेना’ की

लोकसभा चुनाव 2019: बहुत कठिन है डगर ‘बीजेपी-शिवसेना’ की

narendra modi BJP Shivsena uddhav thackeray loksabha elections 2019, लोकसभा चुनाव 2019: बहुत कठिन है डगर ‘बीजेपी-शिवसेना’ की

नई दिल्ली: 2019 के लोकसभा चुनाव नजदीक हैं और सत्ताधारी बीजेपी के लिए मुश्किलें हैं कि थमने का नाम नहीं ले रहीं. सपा-बसपा के गठबंधन से जहां पार्टी को अच्छा-खासा नुकसान होने की उम्मीद है तो वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र में बीजेपी की कभी साथी रही शिवसेना गले की हड्डी बन चुकी है जिसे बीजेपी न निगल पा रही है और न ही पचा पा रही है.

आखिर क्यों शिवसेना इतनी खास है बीजेपी के लिए?

इसका सीधा-सीधा जवाब है कि बीजेपी के पास कोई दूसरा विकल्प है ही नहीं. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों ने मिलकर 48 में से 41 सीटें जीती थीं जिसमें बीजेपी को 23 और शिवसेना को 18 सीटें मिलीं थीं. अगर वोट प्रतिशत की बात करें तो शिवसेना को 20.82 प्रतिशत और बीजेपी को 27 प्रतिशत वोट मिले थे. इस स्थिति में अगर दोनों पार्टियां 2019 में अलग-अलग चुनाव में जाएंगी तो दोनों को ही नुकसान हो सकता है क्योंकि कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन से दोनों पार्टियों के वोट शेयर में जरूर गिरावट आएगी.

यूपी से लेनी होगी सीख

उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटें किसी भी दल के लिए खासा महत्व रखती है. 2014 में बीजेपी ने रिकॅार्ड तोड़ प्रदर्शन करते हुए अपना दल के साथ गठबंधन करके कुल 73 सीटें जीतीं थीं और अगर राजनैतिक पण्डितों की माने तो बीजेपी के लिए इस प्रदर्शन को दोहरा पाना आसान नहीं होगा. दूसरी तरफ सपा-बसपा के गठबंधन ने बीजेपी की चुनौती और कड़ी कर दी है.

चूंकि बीजेपी कैराना, फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीटें हारकर पहले ही 70 सीटों पर सिमट चुकी है ऐसे में महाराष्ट्र बीजेपी के लिए बहुत खास बन जाता है.

क्या कहता है चुनावी गणित?

अगर चुनावी गणित के हिसाब से 2019 चुनाव की बात करें तो शिवसेना-बीजेपी के अलग-अलग लड़ने पर उन्हें अच्छा खासा नुकसान हो सकता है. आंकड़ों की मानें तो अगर समीकरण ऐसा रहा तो बीजेपी 22, शिवसेना 3 और कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को 23 सीटें मिलने की पूरी-पूरी संभावना है.

वहीं दूसरी तरफ अगर दोनों दल साथ-साथ चुनाव में उतरते हैं तो बीजेपी-शिवसेना को 40 और कांग्रेस-एनसीपी को 8 सीटें मिलने की उम्मीद है. ऐसे में ये दोनों दलों के लिए ही जरूरी हो जाता है कि वे अपने मतभेद भुलाकर साथ में आ जाएं नहीं तो आंकड़े पलटने और तख्त पलटने में देर नहीं लगती.

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