ममता के भतीजे ने PM मोदी को भेजा मानहानि का नोटिस, 36 घंटे में माफी मांगने को कहा

अगर प्रधानमंत्री मोदी 36 घंटे में माफी नहीं मांगते हैं तो ऐसी स्थिति में अभिषेक बनर्जी ने कानूनी कार्यवाही करने की चेतावनी भी दी है.

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर से तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मानहानि का नोटिस भेजा है. अभिषेक ने पीएम मोदी की 15 अप्रैल को एक सार्वजनिक सभा के दौरान लगाए मनगढ़ंत आरोपों के लिए मानहानि का नोटिस भेजा.

डायमंड हार्बर सीट से टीएमसी उम्मीदवार अभिषेक ने 36 घंटे के भीतर प्रधानमंत्री से माफी मांगने के लिए भी कहा है. अगर प्रधानमंत्री मोदी माफी नहीं मांगते हैं तो ऐसी स्थिति में अभिषेक बनर्जी ने कानूनी कार्यवाही करने की चेतावनी भी दी है.

15 अप्रैल को, पीएम मोदी ने एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि राज्य में “बुआ-भतीजा” सरकार के चंद दिन बचे हैं. पीएम मोदी, ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक के लिए अक्सर इन शब्दों का जिक्र करते हैं.

पीएम के भाषण की भाषा उनके पद को शोभा नहीं देती

पीएम के आधिकारिक निवास और राज्य भाजपा के मुख्यालय पर भेजे गए नोटिस में लिखा है, “जिस दुर्भावना के साथ आपने कुछ असत्यापित, सनसनीखेज और गलत तरीके से अपनी पार्टी के सदस्यों के इशारे पर गलत जानकारी दी है, उसने मेरे मुवक्किल को मजबूर किया है आपको ये नोटिस भेजने के लिए.”

“आप (पीएम मोदी) ने मेरे मुवक्किल की अर्जित की गई प्रतिष्ठा को मैला करने के लिए लोगों को गुमराह करने के एकमात्र इरादे के साथ कुछ बेतहाशा मनगढ़ंत आरोप लगाए.” नोटिस में कहा गया है कि आपका भाषण गलत, दुर्भावनापूर्ण और बदनाम करने वाली सामग्री से भरा था.

बीजेपी ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

नोटिस के मुताबिक, “इस तरह के अपमानजनक बयान आपके पद को शोभा नहीं देते हैं… घटना के संबंध में, बिना शर्त अगर 36 घंटे के भीतर माफी नहीं मांग जाती है, तो ये मेरे मुवक्किल को इस देश के कानूनों के अनुसार आपके खिलाफ उचित कार्यवाही करने के लिए बाध्य करेगा.”

नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए, बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष जयप्रकाश मजूमदार ने कहा, “चुनाव (सातवें चरण) कल होने जा रहे हैं. आज, इस तरह के पत्र का मतलब कुछ भी नहीं है. यह हार के डर से एक व्यर्थ कदम है.” इस बीच, ममता ने आज चुनाव आयोग को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से बिना किसी हस्तक्षेप के “निष्पक्ष” मतदान करने की मांग की.

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