भाजपा के संकल्प पत्र पर मचा सियासी घमासान, धारा 370 पर फारुक अब्दुल्ला की खुली चुनौती

फारुक अब्दुल्ला ने डाउनटाउन श्रीनगर के मुनवराबाद क्षेत्र में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा, “क्या वे (नई दिल्ली) सोचते हैं कि वे धारा 370 को समाप्त कर देंगे और हम शांत हो जाएंगे?

नई दिल्ली: 2019 लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा ने संकल्प पत्र जारी कर दिया है. भाजपा के संकल्प पत्र में धारा 370 को समाप्त करने का वादा किया गया है. अब इस बात पर सियासत का पारा गर्म हो गया है. जम्मू-कश्मीर के तीन बार के मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि धारा 370 को निरस्त करने से राज्य के लोगों के लिए ‘आजादी’ का मार्ग प्रशस्त होगा.

फारुक अब्दुल्ला ने डाउनटाउन श्रीनगर के मुनवराबाद क्षेत्र में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा, “क्या वे (नई दिल्ली) सोचते हैं कि वे धारा 370 को समाप्त कर देंगे और हम शांत हो जाएंगे? वे गलत हैं. हम इसके खिलाफ लड़ेंगे. मुझे लगता है कि अल्लाह की इच्छा है कि वे इसे निरस्त करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्हें ऐसा करने दें और यह हमारे आजादी के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा.”

सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिकाओं के एक समूह के बाद राज्य में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने पर बहस एक बड़े विवाद में बदल गई है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने धारा 370 और 35A के निरस्तीकरण के बारे में अपना रुख दोहराया है. भाजपा ने 2014 के घोषणा पत्र में भी ऐसा ही वादा किया था लेकिन पूरा नहीं हो सका. अब भाजपा ने दोबारा से अपने घोषणा पत्र में इसको दोहराया है.

धारा 370 की बड़ी बातें
1- जम्मू-कश्मीर का झंडा अलग होता है.
2- जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है.
3- जम्मू-कश्मीर में भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं है.
4- भारत की सर्वोच्च अदालत के आदेश मान्य नहीं होते.
5- जम्मू-कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले तो उस महिला की जम्मू-कश्मीर की नागरिकता खत्म हो जाएगी.
6- यदि कोई कश्मीरी महिला पाकिस्तान के किसी व्यक्ति से शादी करती है, तो उसके पति को भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाती है.
7- धारा 370 के कारण कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती है.
8- जम्मू-कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते हैं.
9- जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 साल होता है. जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 साल होता है.
10-भारत की संसद जम्मू-कश्मीर के संबंध में बहुत ही सीमित दायरे में कानून बना सकती है।
11- जम्मू-कश्मीर में महिलाओं पर शरियत कानून लागू है.
12- धारा 370 के कारण जम्मू-कश्मीर में सूचना का अधिकार (आरटीआई) लागू नहीं होता.
13- जम्मू-कश्मीर में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) लागू नहीं होता है। यहां सीएजी (CAG) भी लागू नहीं है.
14- जम्मू-कश्मीर में काम करने वाले चपरासी को आज भी ढाई हजार रूपये ही बतौर वेतन मिलते हैं.
15-कश्मीर में अल्पसंख्यक हिन्दूओं और सिखों को 16 फीसदी आरक्षण नहीं मिलता है.