आखिरी चरण के मतदान से पहले एक-दूसरे को साधने में जुटे क्षेत्रीय दल, बन रहे ये समीकरण

आखिरी चरण के मतदान के बाद और चुनाव परिणाम से पहले विपक्षी दल मिलकर दिल्ली में बैठक करने वाले हैं.

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव 2019 के आखिरी चरण का मतदान 19 मई को होना है. विपक्ष का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी और उनके सहयोगी दोबारा सरकार में आने वाले नहीं हैं. ऐसे में मतदान के बाद और परिणाम से पहले विपक्ष एकजुट होकर दिल्ली में बैठक करना चाहता है. जिसमे सरकार बनाने के सभी पहलुओं पर बात की जा सके. लेकिन सभी क्षेत्रीय पार्टियां अलग-अलग राग अलाप रही हैं. कई नेता इस बैठक में हिस्सा लेने से भी बच रहे हैं.  आइए जानते हैं सातवें व आखिरी चरण के मतदान से पहले विपक्ष में कौन किस करवट बैठ रहा है-

KCR ने की स्टालिन से मुलाकात 

लोकसभा चुनाव का परिणाम आने से पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर (KCR) राव अलग-अलग राजनेताओं से मुलाकात कर रहे हैं. राव की इस मुलाकात का मकसद क्षेत्रीय पार्टियों का एक गठबंधन बनाना है, खासकर दक्षिण के राजनीतिक दलों का. राव ने सोमवार को डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के आवास पर उनसे मुलाकात की.

KCR
KCR को अगर स्टालिन और विजयन का साथ मिल जाए तो वह पीएम रेस के मजबूत दावेदार होंगे.

राव की स्टालिन से मुलाकात इसलिए खास हो जाती है क्योंकि राव गैर-कांग्रेसी, गैर-भाजपा वैकल्पिक सरकार के लिए क्षेत्रीय खिलाड़ियों को साथ लाने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं स्टालिन की पार्टी का तमिल नाडु में कांग्रेस से गठबंधन है.  इससे पहले राव ने तिरुवनंतपुरम में केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन से भी कुछ समय पहले मुलाकात की थी. उन्होंने पिछले साल दिसंबर में कोलकाता में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी मुलाकात की थी. इसके साथ ही वह कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी से भी मुलाकात कर चुके हैं. KCR को YSR कांग्रेस के अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी का भी साथ मिलने की बात हो चुकी है.

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चंद्रबाबू नायडू सबको साथ लाने में लगे 

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने बैठक के चलते पिछले हफ्ते कोलकाता में मुख्यमंत्री मामता बनर्जी से मुलाकात की थी. परिणाम आने से पहले बैठक का प्रस्‍ताव चंद्रबाबू नायडू ने ही रखा है. बैठक के लिए अभीतक 21 मई की तारिख निर्धारित की गई है. इस बैठक के लिए नायडू ने राहुल गांधी से भी मुलाकात की है. नायडू को ये लगता है कि देश में कांग्रेस या भाजपा की लहर नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय पार्टियों की लहर है.

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कांग्रेस के ज्यादा करीब आने से बच रहे हैं अखिलेश और माया.

मामता-माया-अखिलेश बैठक में नहीं आना चाहते

माना जा रहा है कि नायडू से मुलाकात में मामता ने परिणाम से पहले बैठक का हिस्सा बनने से  मना कर दिया है. इसके साथ ही सूत्रों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने भी इस बैठक से दूर रहने का मन बनाया है. अखिलेश की पार्टी का कहना है कि ऐसी बैठक का तबतक कोई फायदा नहीं है जबतक ये नहीं मालूम चलता कि कौन टेबल पर क्या लेकर आ रहा है. वहीं मायावती की पार्टी का कहना है कि ये बैठक तब तक सार्थक नहीं होगी जब तक ये न मालूम चले कि लोकसभा चुनाव में हरेक पार्टी कितनी सीटें लेकर आती है.

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