‘योगी अली को भी मानना शुरू करें’, पीएम मोदी के बयान पर ओवैसी का पलटवार

पीएम मोदी के अल्पसंख्यकों पर दिए बयान को लेकर अब कई राजनेता सामने आए हैं, जो कि उनके इस बयान पर तरह-तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं.
PM Narendra Modi, ‘योगी अली को भी मानना शुरू करें’, पीएम मोदी के बयान पर ओवैसी का पलटवार

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सेंट्रल हॉल में कहा कि, 2014 में मैंने कहा था, मेरी सरकार इस देश के दलित, पीड़ित, शोषित, आदिवासी को समर्पित है. मैं आज फिर से कहना चाहता हूं कि पांच साल उस मूलभूत बात से अपने आपको ओझल नहीं होने दिया.

अल्पसंख्यकों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि गरीबों के साथ जैसा छल हुआ, वैसा ही छल देश की माइनॉरिटी के साथ हुआ है. अच्छा होता कि माइनॉरिटी की शिक्षा, स्वास्थ्य की चिंता की जाती. 2019 में आपसे अपेक्षा करने आया हूं कि हमें इस छल को भी छेद करना है. हमें विश्वास जीतना है.

पीएम मोदी के अल्पसंख्यकों पर दिए बयान को लेकर अब कई राजनेता सामने आए हैं, जो कि उनके इस बयान पर तरह-तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलिमीन अध्यक्ष असादुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए कहा, “अगर प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि डर है तो मेरी पहली उनसे सिफारिश है कि वे योगी आदित्य नाथ से कहें कि वे अली को भी मानना शुरू कर दें. मान्यता का आधार पर नहीं बल्कि देश की संस्कृति के तौर पर उसे मानना शुरू करें. दूसरा पीएम अपनी पार्टी और अपने लोगों से कह दें और खुद भी मान लें कि मुस्लिम समुदाय के साथ अभद्रता नहीं हुई.”

इसके बाद ओवैसी ने कहा, “इतना आप अल्पसंख्यक-अल्पसंख्यक कह रहे हैं, तो कहीं ऐसा न हो कि आपके वोट आपके हाथ से निकल जाएं, क्योंकि पूरा माहौल तो आपने ही बनाया है. आपकी पार्टी में एक ऐसी सांसद बैठी है, जिसने गोडसे को देशभक्त कहा, जिसपर मालेगांव बम बलास्ट का इल्जाम है और उस बम बलास्ट में छह मुसलमान शहीद हुए, तो पीएम कितनी कॉन्ट्राडिक्टरी बात करते हैं. अगर वो समझ रहे हैं कि इस तरह की बात करने से वो एक संदेश दे रहे हैं, तो नहीं वो इससे कोई संदेश नहीं दे रहे. वो एक्सपोज़ हो चुके हैं. बोलते कुछ है और करते कुछ हैं. ये कोई नई बात नहीं है. उन्हें बोलने की आदत है और बोलते रहेंगे.”

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा, “नरेंद्र मोदी जी का दूसरा टर्म है. पिछले पांच साल में आपने अल्पसंख्यक समाज का, मुसलमान का कोई विश्वास नहीं जीता. उन्हें डराने की कोशिश की गई. आपके नेताओं, मंत्रियों ने पाकिस्तान चले जाओ, लव जिहाद, घर वापसी जैसे बयान दिए. क्या यही तरीका है विश्वास जितने का, लेकिन मैं उम्मीद करता हूं कि अगर दिल की गहराई से आपने बात की है तो उनके विश्वास जीतिए और मंत्रियों को ऐसे बयान से रोकिए.”

वहीं फतेहपुरी मस्ज़िद के मुफ़्ती मुकराम बोले, “पीएम के इस बयान का हम स्वागत करते हैं. पीएम ने जो हम वो अच्छी बात है. हम उम्मीद करते हैं कि उन्होंने जो कहा है वो देश की जनता अमल करेगी और अल्पसंख्यक के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा. कोई नफरत की सियासत नहीं होगी. पहले 5 साल में हमने देखा कि पीएम ने अच्छी बात की, लेकिन जनता ने उसपर अमल नहीं किया. मॉब लिनचिंग, बीफ आदि के नाम पर मुसलमानों पर ज़ुल्म होता है.”

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