चुनाव आयोग का ये नियम पढ़ लीजिए, प्रधानमंत्री मोदी की सीट पर भी हो सकता है बैलेट पेपर से चुनाव

लोकसभा चुनाव 2019 में तेलंगाना की निजामाबाद सीट पर बैलेट पेपर से मतदान कराया जाएगा, जिन परिस्थितियों पर ये नियम निजामाबाद में लगाए गए हैं वैसे ही परिस्थितियां वाराणसी में बन रही हैं.

नई दिल्ली: विपक्षी दलों ने कई दफा ईवीएम पर सवालिया निशान लगाते हुए बैलेट पेपर (Ballot Paper) से चुनाव कराने की मांग की है. हालांकि केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी और खुद चुनाव आयोग इन मांगों को ठुकराता रहा है. लेकिन अब ऐसी नौबत आन पड़ी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा सीट पर भी बैलेट पेपर (Ballot Paper) से चुनाव कराना पड़ सकता है. दरअसल इस दावे का सीधा संबंध है दक्षिण भारत के दो राज्य तेलंगाना और तमिलनाडु से.

तेलंगाना में आगामी लोकसभा चुनाव के नामांकन पत्र वापस लेने की प्रक्रिया गुरुवार को खत्म हो गई और 170 किसानों समेत 443 उम्मीदवार मैदान में हैं. सबसे ज्यादा कुल 185 उम्मीदवार निजामाबाद लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं. इस सीट से राज्य के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव की बेटी के.कविता चुनाव लड़ रही हैं.

निजामाबाद में बैलेट पेपर के जरिये होगा मतदान

द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक तेलंगाना के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईओ) रजत कुमार ने बताया कि इस सीट पर 185 वैध उम्मीदवार है और यहां वोटिंग बैलेट पेपर के जरिए कराई जाएगी. रिपोर्ट के मुताबिक कुमार ने बताया था कि अगर किसी सीट पर उम्मीदवारों की संख्या 64 से ज्यादा हो जाती है तो चुनाव आयोग को बैलेट पेपर (Ballot Paper) पर मतदान आयोजित करना होता है.

इस सीट पर उम्मीदवारों की संख्या इतनी अधिक मात्रा में होने का कारण है राज्य के नाराज किसान. किसानों ने ही अपना विरोध दर्ज कराने के लिए नामांकन दाखिल किया है. किसान सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति के द्वारा हल्दी और अन्य फसलों पर मिनिमम सपोर्ट प्राइस न देने के चलते विरोध के तौर पर चुनावी ताल ठोक रहे हैं. अब बात करते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी की.

वाराणसी में तमिलनाडु के किसान ठोकेंगे विरोध की चुनावी ताल

दरअसल तमिलनाडु के 111 किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी से विरोध के रुप में चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है. तमिलनाडु किसानों के नेता पी.अय्याकन्नू ने पिछले दिनों यह ऐलान किया था. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा था कि वह ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि बीजेपी से कहा जा सके कि वह अपने घोषणा पत्र में इस बात को शामिल करे कि फसल उत्पादों के लिए मुनाफे वाली कीमत सहित किसानों की अन्य मांगे पूरी की जाएंगी.

वैसे तो 111 किसानों की संख्या ही बैलेट पेपर (Ballot Paper) पर चुनाव कराए जाने के आंकड़े (64 से ज्यादा) से ज्यादा है. उसके बाद भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर और बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर भी अपने-अपने विरोध के चलते प्रधानमंत्री मोदी को उन्हीं की सीट से चुनौती देने का मन बना चुके हैं.

तो क्या प्रधानमंत्री की सीट पर बैलेट से होगा मतदान?

क्विंट की रिपोर्ट के मुताबिक चंद्रशेखर, बहुजनों के बड़े तबके के उत्पीड़न के लिए प्रधानमंत्री मोदी को जिम्मेदार ठहराते हैं और इसी के विरोध के लिए वह उनके खिलाफ चुनावी ताल ठोकना चाहते हैं. वहीं बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर ने पीएम मोदी पर सैनिकों को निराश करने का आरोप लगाया है. द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक तेज बहादुर का कहना है कि मोदी भ्रष्टाचार मुक्त भारत की बात तो करते हैं लेकिन जब उन्होंने बीएसएफ में घटिया खाना मिलने को लेकर आवाज उठाई तो उन्हें बर्खास्त कर दिया गया.’

अब  इन दो (चंद्रशेखर और तेज बहादुर) को भी मिला लिया जाए तो मुख्य विरोधी पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों से इतर कुल 113 प्रत्यार्शी मैदान में पीएम मोदी को चुनौती देने के लिए तैयार हैं. अगर यह सब नामांकन भरते हैं तो आयोग के नियम के अनुसार यह आंकड़ा 64 उम्मीदवारों से कहीं ज्यादा है. तो फिर अब सवाल उठता है कि अगर ऐसी स्थिति वाराणसी सीट पर बनती है तो क्या प्रधानमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में बैलेट (Ballot Paper) के जरिए मतदान होगा.

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